गोहपुर में काति बिहू के आयोजन की तैयारी
गोहपुर में काति बिहू के आयोजन की तैयारी
असम

गोहपुर में काति बिहू के आयोजन की तैयारी

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बिश्वनाथ, 16 अक्टूबर (हि.स.)। असम में तीन बिहू मनाए जाते हैं और तीनों का कृषि और प्रकृति के साथ गहरा नाता है। असमिया लोग आज भी खेती-किसानी और प्रकृति को उसी रूप में संजोए आ रहे हैं। उनकी पालना उसी रूप में करते आ रहे हैं, जो उनके पूर्वज छोड़कर गए या सिखा गए है। आज के इस भौतिकवादी समाज में जब कि समाज अपने रीति-रिवाजों को भूलता और छोड़ता जा रहा है, लेकिन उसी कालखंड में असमियां समाज आज भी अपनी संस्कृति और विरासत को उसी रूप में अपने ह्रदय में धारण कर आगे बढ़ रहा है। शायद यही कारण है कि आज भी असम के लोग अपनी मान्यताओं और परंपराओं पर गर्व और बेझिझकर उसे स्वीकार कर आगे बढ़ रहे हैं। उन्हीं परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के एक पर्व का नाम है काति बिहू। कोरोना संक्रमण के बीच असमिया समाज काति बिहू की तैयारी में व्यस्त है। शनिवार को पूरे असम में काति बिहू मनाया जाएगा। काति बिहू के बाद किसानों की व्यस्तता बढ़ जाएगी। हरे धान के खेत अब सुनहरे हो गए हैं। हालांकि बिश्वनाथ के गोहपुर की महिलाएं भी बहुत ही सामान्य रूप से काति बिहू का आयोजन में जुटी हुई हैं। और, अब वे असमिया पीठा बनाने में व्यस्त हैं। कोरोना के लिए इस बार बिहू का आयोजन बड़े पैमाने पर नहीं किया गया। ग़ोहपुर की महिलाएं चावल पीसकर अब विभिन्न प्रकार के पीठा जैसे तिल पीठा, बर पीठा, तेल पीठा, सुतुली पीठा आदि व्यंजन तैयार करने में व्यस्त हैं। यद्यपि काति बिहू को कंगाली बिहू कहा जाता है। इस साल कोरोना में भी परंपरा के अनुसार काति बिहू पालन करने की तैयारी जोरों पर चल रही है। ज्ञात हो कि गोहपुर को एक प्रमुख कृषि क्षेत्र के रूप में पहचाना जाता है, हर घर में तुलसी की वेदी तैयार की गई है और गोहपुरवासी नाम कीर्तन कर काति बिहू मनाने के लिए तैयार हैं। हिन्दुस्थान समाचार/ देबोजानी// अरविंद-hindusthansamachar.in