अलग बोड़ोलैंड राज्य की मांग को लेकर नये संगठन का हुआ जन्म
अलग बोड़ोलैंड राज्य की मांग को लेकर नये संगठन का हुआ जन्म
असम

अलग बोड़ोलैंड राज्य की मांग को लेकर नये संगठन का हुआ जन्म

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कोकराझार (असम), 15 अक्टूबर (हि.स.)। कोकराझार जिला के कदमतोला के निरभमा पार्क के सभागार में गुरुवार को एक बार फिर से अलग बोड़ोलैंड राज्य की मांग को लेकर आवाज उठायी गयी है। हाल ही में केंद्र सरकार की पहल पर दिल्ली में बीटीआर समझौता अलग बोड़ोलैंड राज्य की मांग के मुद्दे का समाधान हो गया, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। अलग राज्य की मांग को लेकर आब्सू के संस्थापक उपाध्यक्ष हीरा सरन नार्जरी की अध्यक्षता में एक सभा का आयोजन किया गाय। सभा पूर्व सांसद सानसुमा खुंगर बिसमुतियारी, जेब्रा राम मुसाहारी के साथ विभिन्न क्षेत्र के बोडो समाज के बुद्धिजीवियों ने हिस्सा लिया। सभा में सर्वसम्मित से निर्णय लिया गया कि अलग बोडोलैंड की मांग के लिये एक संगठन बनाया जाये। नये संगठन का नाम ऑल इंडिया बोडो पीपुल्स नेशनल लीग्स फॉर बोडोलैंड स्टेट हुड रखा गया। नव गठित संगठन की एक एडहॉक समिति का गठन किया गया। जिसमें सर्वसम्मति से पूर्व सांसद बिसमुतियारी को अध्यक्ष, जी हजवारी को उपाध्यक्ष, जेब्रा राम मुसाहारी को महासचिव, नितय नंदा बसुमातारी को सह सचिव के रूप में शामिल किया गया। समिति गठन के पश्क्षात ऑल इंडिया बोडो पीपुल्स नेशनल लीग्स फॉर बोडोलैंड स्टेट हुड के अध्यक्ष ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि यह समिति अलग बोडोलैंड राज्य की मांग को लेकर राज्य सरकार और केंद्र सरकार से बात करेगी और जरूरत पड़ने पर गणतांत्रिक रूप से आंदोल भी करेगी। क्योंकि, भाजपा सरकार ने बीटीआर समझौते में जिन मांगों को शामिल किया गया है जैसे बीटीसी का नाम बदलना, गैर बोडो गांवों को बाहर निकालनने के विरूद्ध यह निर्णय लेना पड़ा है। साथ ही 07 अक्टूबर को बोडो भाषा को असमिया की सहायक भाषा के रूप में मान्यता देना जैसे कदम को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बुधवार को मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल को ज्ञापन सौंपकर उनसे आह्वान किया गया कि आगामी 27 अक्टूबर से पूर्व बीटीसी चुनाव करवाया जाये और राजयपाल शासन को आगे न बढ़ाया जाया। नव गठित संगठन के अध्यक्ष ने कहा कि हमे अत्यंत दुख के साथ यह कहना पड़ रहा है कि चालू माह में बोडो समुदाय के 600 से 700 लोगों को षडयंत्र के तहत तथा लालच देकर भाजपा में शामिल किया गया है। अतः हम आज उन सभी लोगों का आह्वान करते हैं कि जो भी बोडो समाज के लोग भाजपा में शामिल हुये हैं वे जल्द से जल्द भाजपा का त्याग करें। ज्ञात हो कि नये संगठन के जन्म के बाद एक बार फिर से बोडो राजनीति की दशा व दिशा बदलती दिखायी दे रही है। केंद्र और राज्य सरकार ने बोडो इलाके के विकास के लिए अनेकों योजनाएं शुरू किया था तथा कुछ शुरू होने वाला था, लेकिन नये संगठन के हुंकार से फिर से एक बार बोडो समाज के विकास का मार्ग अवरूद्ध होता दिखायी दे रहा है। बीटीआर समझौते के दौरान बोडोलैंड के सभी दल व संगठन एकजुट होकर अलग राज्य की मांग को दरकिनार करते हुए बोडोलैंड के विकास के लिए समहत हुए थे। नये संगठन के जन्म से एकजुटता पर पानी फिरता नजर आ रहा है। हिन्दुस्थान समाचार /किशोर/ अरविंद-hindusthansamachar.in