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लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पत्रकारों के कल्याण पर भी विचार करे सरकार : क्रान्ति किरन पांडेय

लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पत्रकारों के कल्याण पर भी विचार करे सरकार : क्रान्ति किरन पांडेय

लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पत्रकारों के कल्याण पर भी विचार करे सरकार : क्रान्ति किरन पांडेय चित्रकूट, 27 मार्च (हि.स.)। उच्च न्यायालय प्रयागराज के अधिवक्ता क्रान्ति किरन पाण्डेय ने कहा कि मीडिया संविधान का चौथा महत्वपूर्ण अंग समझा होता है। ऐसे में वित्तमंत्री के लाॅक डाउन दौरान कोविड-19 वैश्विक महामारी के चलते भारत सरकार की राहत योजनाओं में मीडिया को

जगह नहीं दी गई है, ये अफसोस की बात है। शुक्रवार को उच्च न्यायालय प्रयागराज के अधिवक्ता क्रान्तिकिरन पाण्डेय ने बताया कि केन्द्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने गरीबों को एक लाख 70 हजार करोड़ की मदद की सराहनीय घोषणा की है। उन्होंने आपातकाल में कार्यरत डाॅक्टरों के लिए भी पचास लाख का जीवनबीमा करने की घोषणा की है, लेकिन 24 घंटे जान की बाजी लगाकर समाज को सही जानकारी देने का काम कर रही मीडिया का जरा भी ध्यान नहीं दिया है, जो निन्दनीय है। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय वित्तमंत्री ने 80 करोड़ लोगों को गेहूं, चावल व एक किलो दाल तीन महीने तक देने का प्राविधान किया है। उन्होंने बताया कि किसी को पत्रकार वर्ग की कोई चिन्ता नहीं है। चाहे प्रधानमंत्री हो या वित्तमंत्री या कोई भी विपक्षी दल। किसी को उस पत्रकार वर्ग की परवाह नहीं है जो दिन-रात जनता के सामने सच्चाई लाने को अथक प्रयास करते हैं। ऐसे पत्रकारों को कहीं से कोई वेतन या मानदेय नहीं मिलता है। उन्होंने कहा कि पत्रकार वर्ग कभी कुछ भी अपने लिए मुफ्त नहीं मांगता। ऐसी परिस्थिति में जब उसके लिए सारे रास्ते बन्द हैं, तो क्या सरकार का पत्रकारों के लिए कोई दायित्व नहीं बनता। जब भी जरूरत होती है सरकार को किसी प्रकार के मीडिया कवरेज की तो पत्रकार वर्ग सबसे आगे खड़ा होता है। पत्रकार वर्ग सरकार की योजनाओं को आम जनता तक पहुंचाता है। पत्रकार वर्ग कभी भी फ्री में भोजन नहीं मांगता। इस वैश्विक महामारी के चलते पत्रकार वर्ग के बारे में सरकार को सोचना चाहिए। सरकार को कोई ऐसा रास्ता निकालना चाहिए कि पत्रकार वर्ग इस आर्थिक परेशानी से बाहर निकलकर अपने काम पर सही ध्यान दे सके। उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग किया कि पत्रकार वर्ग के बारे में कुछ सोंचे। एक मध्यम वर्गीय पत्रकार अपने दुख की दास्तान किसी से कह नहीं सकता। वह रोज कुआं खोदता है और रोज पानी पीता है। हिन्दुस्थान समाचार /रतन/मोहित
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