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घुप्प अंधेरे से आहिस्ता-आहिस्ता रोशनी में आई जिंदगी

घुप्प अंधेरे से आहिस्ता-आहिस्ता रोशनी में आई जिंदगी

अंधेरा कुछ नहीं बस दो मिनट की बात है हिम्मत रख तो हर रोशनी तेरे हाथ है यह शायरी उन एचआईवी पॉजीटिव मरीजों पर सटीक बैठती है जिनकी जिंदगी बीमारी का पता चलने पर घुप्प अंधेरे में चली गई थी। शहर में ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने पहली बार बीमारी का पता चलने पर खुद को संभाला और परिवार के साथ जीवन जी रहे हैं। एचआईवी पॉजीटिव होने पर टूट गए : गम्हरिया निवासी पीआर शुक्ला (काल्पनिक नाम) ने बताया कि 2003-04 में एक खेल प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए वे हैदराबाद गए थे जहां उनका ऑटो पलट गया व जख्मी हो गए। अस्पताल में उन्हें खून चढ़ाया गया जो संक्रमित था। इसके बाद 2004 में उनकी तबीयत खराब हुई तो उन्होंने
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