जगदलपुर: विदेशी मुद्रा अर्जित करने वाला बस्तर का साल बीज दयनीय स्थिति में

जगदलपुर: विदेशी मुद्रा अर्जित करने वाला बस्तर का साल बीज दयनीय स्थिति में
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वनोपज का समर्थन मूल्य बीते तीन वर्षों से नहीं बढ़ा बस्तर ऑयल मिल बंद होने से ग्रामीणों को इसका बड़ा नुकसान हुआ जगदलपुर, 9 जून (हि.स.)। बस्तर के साल बीज जो कभी विदेशी मुद्रा अर्जित करने वाला था, आज दयनीय स्थिति में है। इस वनोपज का समर्थन मूल्य बीते तीन साल से नहीं बढ़ने और इस सीजन में अब तक खरीदी शुरु नहीं होने से बस्तर के साल बीज संग्राहक ग्रामीणों को इसका खामियाजा उठाना पड़ रहा है। फिलहाल सरकारी खरीदी दर 20 रुपये प्रति किलो है। जिले के बस्तर, बकावंड और जगदलपुर ब्लॉक में अधिक साल-बीज का संग्रहण किया जाता है। इनमें सबसे अधिक साल वन मौजूद हैं, बस्तर ब्लॉक में भानपुरी, बनियागांव, मुंडागांव, घोटिया, बकावंड ब्लॉक के बकावंड, करपावंड, सतोषा, राजनगर तथा जगदलपुर ब्लॉक के नानगुर क्षेत्र में सबसे अधिक संग्रहण ग्रामीण करते हैं। ग्राम जामावड़ा की फूलो व सुकलदई ने बताया कि प्रति वर्ष दो से तीन क्विंटल साल बीज का संग्रहण करते हैं। इनका कहना है कि सरकार ने तेंदूपत्ता का पारिश्रमिक दर बढ़ाया, लेकिन साल बीज का नहीं बढ़ाया है, वहीं अभी तक खरीदी भी शुरू नहीं हुई है। उल्लेखनिय है कि कुरंदी औद्योगिक क्षेत्र में स्थित बस्तर ऑयल मिल में साल बीज से तेल निकाला जाता रहा है। इसके बाद तेल को विदेशों में निर्यात किया जाता था, बस्तर का यह उद्योग कभी विदेशी मुद्रा अर्जित करने वाला था, लेकिन सरकार ने अनुबंध निरस्त कर दिया। इसके बाद से यहां तेल निकालना बंद हुआ, जो अब पूरी तरह से बंद हो चुका है। इसके बंद होने से साल बीज की मांग भी समाप्त हो गई, बाद में सीमायी प्रांत ओडिशा और महाराष्ट्र के व्यापारी बस्तर में साल बीज की खरीदी करने आते रहे। इसी बीच सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य में साल बीज की खरीदी शुरू की लेकिन अब तक खरीदी शुरू नहीं होने से साल बीज संग्राहक ग्रामीणों में नाराजगी है। बस्तर के ग्रामीणों का बड़ा आय का साधन साल बीज का उद्योग बस्तर में पुन:स्थापित करने की आश्यकता है, जिसका सीधा लाभ स्थानीय ग्रामीणों को मिलेगा। हिन्दुस्थान समाचार/राकेश पांडे