तिब्बत में आत्मदाह करे वाले तिब्बतियों के लिए लाॅंच किया गया श्रद्धाजंलि कार्यक्रम

तिब्बत में आत्मदाह करे वाले तिब्बतियों के लिए लाॅंच किया गया श्रद्धाजंलि कार्यक्रम
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धर्मशाला, 29 अप्रैल (हि.स.)। तिब्बत में चीन सरकार के दमनकारी रवैये के खिलाफ अपनी जान कुर्बान कर देने वाले तिब्बती शहीदों के लिए गुरुवार को मैकलोड़गंज में तिब्बती युवा कांग्रेस ने भारत तिब्बत सहयोग मंच और दिल्ली में स्थित तिब्बती पीपुल्स मूवमेंट द वाॅयस फार वॉयसलेस द्वारा ‘श्रद्धांजलि’ कार्यक्रम लाॅंच किया गया। इस कार्यक्रम का उद्येश्य उन 157 तिब्बती शहीदों को श्रद्धांजलि देना है जिन्होंने तिब्बत के अंदर आत्मदाह कर अपनी जान दे दी है। इन शहीदों ने तिब्बत की आजादी और चीन सरकार की दमनकारी नीतियों और तिब्बतियों के साथ हो रहे अत्याचार के खिलाफ अपने प्राणों की आहुति दे दी। तिब्बती युवा कांगे्रस द्वारा शहीदी दिवस पर गुरुवार को ‘श्रद्धांजलि’ कार्यक्रम को लाॅंच किया गया। तिब्बती युवा कांगे्रस के पदाधिकारी गोंपो ढोंढुप ने बताया कि इस दिन ही तिब्बत में सबसे पहले तिब्बती युवक पावो थुपटेन ने आत्मदाह किया था। इस कार्यक्रम के तहत भारत में इन शहीदों की आकांक्षाओं और प्रोफाइल के बारे में तिब्बती लोगों सहित दुनिया के लोगों के बीच जागरूकता पैदा करना है। तिब्बत की समस्याओं और आत्म-हनन के लिए अग्रणी परिस्थितियों को सामने लाना तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करना भी इस कार्यक्रम का मुख्य उद्येश्य है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय शक्तियों द्वारा तत्काल चर्चा और कार्रवाई के लिए माहौल बनाना है। इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए भारत में एक 108 सदस्यों की संयुक्त कार्य समिति बनाई जाएगी। जिसमें स्थानीय और प्रख्यात लोग शामिल होंगे। विभिन्न गांवों, बस्तियों, जिलों, के नाम पर स्थानीय स्वयंसेवकों की तरह चुने गए 108 लोगों की समिति स्थानीय समिति के साथ कार्यक्रम आयोजित करेगी। इसी तरह की समितियां विश्व के अन्य देशों में भी बनाई जाएंगी। उन्होंने बताया कि तिब्बत पर चीन सरकार के कठोर और अत्याचारी शासन के तहत शहीदों द्वारा झेली गई प्रताड़नाओं से भी विश्व स्तर पर तिब्बती समुदाय व अन्य लोगों को अवगत करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि तिब्बती युवा कांग्रेस धर्मशाला में स्थित सबसे बड़ी तिब्बती एनजीओ है, जो तिब्बत की स्वतंत्रता की बहाली और पूर्ण स्वतंत्रता के लिए काम कर रही है। वहीं भारत तिब्बत सहयोग मंच भी तिब्बती स्वतंत्रता के लिए सबसे मजबूत समर्थकों में से एक रहा है। हिन्दुस्थान समाचार/सतेंद्र/सुनील