आम लोगों को एक अधिक सच्ची दुनिया बताने की जरूरत

 आम लोगों को एक अधिक सच्ची दुनिया बताने की जरूरत
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बीजिंग, 6 सितम्बर (आईएएनएस)। 8 सितंबर को विश्व संवाददाता दिवस या अंतर्राष्ट्रीय संवाददाता एकता दिवस है। इस दिवस का उद्देश्य विश्व भर के संवाददाताओं के बीच एकजुटता की मजबूती कर मेहनत से काम करते समय घटनाओं की हकीकत की रिपोर्ट करने ,बुरे व्यक्तियों तथा बातों पर प्रहार करने और विश्व शांति की सुरक्षा करने के लिए जागरूकता बढ़ाना है। यह दिवस 8 सितंबर 1943 को जर्मन फासिस्ट द्वारा मारे गये चेक स्लोवाकिया के श्रेष्ठ संवाददाता जुलियस फुकिक की याद में स्थापित किया गया। फुकिक की सबसे मशहूर रचना सूली के नीचे एक रिपोर्ट द रिपोर्ट अंडर द गैलोज। उन्होंने जेल में ही यह किताब लिखी, जिसका अनुवाद 90 से अधिक भाषाओं में हुआ। अंतरराष्ट्रीय संवाददाता एसोसिएशन के सचिवालय ने जून 1958 में हुई एक बैठक में हल साल के 8 सितंबर को विश्व संवाददाता दिवस निर्धारित किया। न्यूज विश्व का पता लगाने की अहम खिड़की है। संवाददाता युग-धारा में हमेशा अग्रसर रहते हैं। वे परिवर्तन ,विकास और इतिहास का रिकार्ड करते हैं। एक कलम ,एक माइक्रोफोन और एक कैमरे में बदलाव की शक्ति निहित है। संवाददाता के कार्य आम लोगों के विचारों से घनिष्ठ रूप से जुड़ा है और हमारे भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी कारण संवाददाताओं को एक अधिक सच्ची दुनिया की रिपोर्ट करने की सामाजिक जिम्मेदारी है। लंबे समय से अमेरिका समेत पश्चिमी देश अपनी मजबूत आर्थिक शक्ति से अंतर्राष्ट्रीय न्यूज रिपोटिर्ंग में दबदबा रहे। वे अकसर अपनी ²ष्टि से विकासशील देशों के बार में गुण दोष का बखान करते हैं और अपने मूल्य दर्शन के मुताबिक विश्व संचालन के विभिन्न नियम निर्धारित करते हैं और इन नियमों से दूसरे देशों के हित छीन लेते हैं। पर समाज और युग निरंतर बढ़ रहा है। वर्तमान में पश्चिमी देशों के लिए आसानी से दूसरे देशों को दबाकर एकाधिकार का लाभ प्राप्त करने का युग समाप्त हो रहा है। विकास की नयी शक्तियां और नये इंजन उभर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया की परिस्थिति में भी बदलाव आ रहा है। ग्यारह सितंबर के बाद कतर में स्थित अल जजीरा से पश्चिमी मीडिया से अलग आवाज निकली। वर्ष 2005 में रूस के आरटी टीवी स्टेशन का अंग्रेजी चैनल विश्व के सामने दिखा ,जो रूस के स्पष्ट पक्ष और आवाज व्यक्त करते हैं। इस के साथ लंबे समय से उपेक्षित चीनी जनता की आवाज अधिकाधिक बुलंद हो रही है। विश्व के अधिकाधिक देशों के लोगों ने पहचान लिया कि मानवता के विकास के रास्त विविध हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया जगत में सिर्फ सीएनएन और बीबीसी नहीं होना चाहिए। इस मार्च में पेइचिंग स्थित बीबीसी संवाददाता जोन सुडवर्थ जल्दबाजी से काम छोड़कर चीन से रवाना हो गये। इसका मुख्य कारण है कि कुछ चीनी नागरिक और संस्थान उन की झूठी रिपोर्टें पर नाराज होकर उन पर मुकदमा चलाने की कोशिश कर रहे हैं ।सुडवर्थ कानूनी जिम्मेदारी से बचने के लिए चले गये। वास्तव में सुडवर्थ ने चीन के बारे में सिलसिलेवार झूठी रिपोर्टें बनायीं ,मसलन उन्होंने शिनच्यांग में सामान्य बोडिर्ंग स्कूल को उइगुर संस्कृति का खात्मा करने वाला स्थल बताया और मस्जिद के जीर्णोद्धार को मस्जिद का विनाश बताया। एक बार उन्होंने पुलिस के हिंसक आतंकवाद विरोधी अभ्यास के एक वीडियो क्लिप का प्रयोग कर दावा किया कि महामारी के दौरान संबंधित चीनी विभाग हिंसक तरीके से कानून लागू कर रहा है। अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में सुडवर्थ जैसे दोहरे मापदंड अपनाने और झूठी खबरें फैलाने वाले संवाददाता कम नहीं हैं। अधिक जटिल और परिवर्तित हो रही दुनिया में संवाददाताओं को न्यूज की सच्चाई पर अडिग होकर न्याय कार्य के लिए गुहार लगाने और मानवता की संस्कृति आगे बढ़ाना चाहिए। इस दौरान वे अपना जीवन मूल्य पूरा कर सकते हैं। (साभार---चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) --आईएएनएस एएनएम

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