तालिबान के डर के कारण स्कूल में उपस्थिति दर कम : एमनेस्टी इंटरनेशनल

 तालिबान के डर के कारण स्कूल में उपस्थिति दर कम : एमनेस्टी इंटरनेशनल
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नई दिल्ली, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने शुक्रवार को कहा कि अफगानिस्तान में लड़कियों को माध्यमिक विद्यालय में लौटने और अपनी शिक्षा जारी रखने की अनुमति दी जानी चाहिए। संगठन ने तालिबान के धमकियों और हिंसा का दस्तावेजीकरण करने वाले नए साक्ष्य प्रकाशित किए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों ने एमनेस्टी इंटरनेशनल को बताया कि तालिबान ने देश पर कब्जे से पहले लड़ाई के दौरान सैन्य उद्देश्यों के लिए चार स्कूलों का इस्तेमाल किया। ये स्कूल तुघानी हाई स्कूल और सर-ए-पुल में खेतिब जादा हाई स्कूल, कुंदुज में जखाइल-ए-खोंदन हाई स्कूल और लगमन प्रांत में अलीशिंग हाई स्कूल हैं। स्कूलों के इस तरह के उपयोग से उन पर हमले का खतरा होता है, और इससे पर्याप्त शिक्षा देना बेहद मुश्किल हो जाता है। जबकि देश भर में पुरुष छात्रों को 17 सितंबर को माध्यमिक विद्यालय में लौटने की अनुमति दी गई थी, तालिबान ने जोर देकर कहा कि लड़कियों के लौटने से पहले सुरक्षित सीखने का माहौल आवश्यक है। हालांकि, 20 से अधिक नए साक्षात्कारों में, छात्रों, शिक्षकों और स्कूल प्रशासकों ने एमनेस्टी को बताया कि तालिबान द्वारा डराने और प्रताड़ित करने के कारण सभी स्तरों पर स्कूल में उपस्थिति दर कम बनी हुई है। एमनेस्टी इंटरनेशनल के महासचिव एग्नेस कैलामार्ड ने कहा, वर्तमान में, अफगानिस्तान में लड़कियों को माध्यमिक विद्यालय में लौटने से प्रभावी रूप से रोक दिया गया है। देश भर में, लड़कियों की एक पूरी पीढ़ी के अधिकारों और आकांक्षाओं को खारिज कर दिया गया है। तालिबान को तुरंत सभी माध्यमिक विद्यालयों को लड़कियों के लिए फिर से खोलना चाहिए, शिक्षकों और छात्रों के खिलाफ सभी उत्पीड़न, धमकियों और हमलों को रोकना चाहिए और अफगानिस्तान में स्कूलों के सैन्य उपयोग को रोकना चाहिए। कई परिवार तालिबान से डरे हुए हैं, और अपने बच्चों को स्कूल भेजने से बहुत घबराए हुए हैं, खासकर लड़कियों के मां-बाप इस बात को लेकर चिंतित हैं। गंभीर आर्थिक स्थिति ने कई परिवारों को अपने बच्चों को स्कूल से निकालने और उन्हें काम पर भेजने के लिए मजबूर कर दिया है। तालिबान के देश पर कब्जा करने के दौरान और उसके बाद लाखों अफगान आंतरिक रूप से विस्थापित हुए हैं, और कई विस्थापित बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं। --आईएएनएस आरएचए/एएनएम

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