यूएन चार्टर के उद्देश्यों व सिद्दान्तों का संगठित पालन ज़रूरी, रूस

यूएन चार्टर के उद्देश्यों व सिद्दान्तों का संगठित पालन ज़रूरी, रूस
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रूस महासंघ के विदेश मंत्री सर्गे वी लैवरॉफ़ ने यूएन महासभा को सम्बोधित करते हुए, संयुक्त राष्ट्र के संस्थापना दस्तावेज़ – यूएन चार्टर के उद्देश्य व सिद्धान्त जीवित व क़ायम रखने के लिये, एक नई सहमति की पुकार लगाई है. रूसी विदेश मंत्री ने शनिवार को उच्च स्तरीय जनरल डिबेट को सम्बोधन में, पश्चिम समर्थित – “नियम आधारित व्यवस्था” की अवधारणा को रद्द किये जाने का आहवान भी किया. विदेश मंत्री सर्गे लैवरॉफ़ ने यूएन सभा में, देशों के प्रतिनिधियों से कहा कि संयुक्त राष्ट्र में, एक ज़्यादा व्यापक सहयोग, विशेष रूप से इस समय प्रासंगिक है, जबकि अन्तरराष्ट्रीय एजेण्डा पर, समस्याओं की संख्या बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि हर जगह, सीमा पार से ख़तरों का दायरा बढ़ रहा है, और अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के बजाय, “जिसकी लाठी, उसकी भैंस” यानि बल प्रयोग पर निर्भरता का नज़रिया अपनाया जा रहा है, और ऐसा बहुतायत के साथ हो रहा है. “अग्रणी ताक़तों के दरम्यान, विश्व व्यवस्था के सिद्धान्तों पर कोई सहमति नहीं है.” यूएन की पूर्ण क्षमता रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को, सार्वभौमिक बहुपक्षवाद, और वैधता की भरपूर सम्भावनाओं का सदुपयोग करते हुए, विश्व राजनीति में, ख़ुद एक केन्द्रीय संयोजक की भूमिका निभानी चाहिये. उन्होंने कहा कि हाल के समय में, संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को कमज़ोर बनाने, या फिर स्वार्थी राष्ट्रीय हित आगे बढ़ाने के लिये, इस विश्व संगठन को, एक लचीले औज़ार के रूप में इस्तेमाल करने के, अनेक प्रयास हुए हैं. उन्होंने, तथाकथित “नियम आधारित व्यवस्था” की अवधारणा की आलोचना करते हुए कहा कि पश्चिमी देश, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के उलट, इस अवधारणा को, राजनैतिक विमर्श में लगातार दाख़िल कर रहे हैं. सर्गे लैवरॉफ़ ने कहा कि अमेरिका द्वारा, एक “लोकतंत्र सम्मेलन” आयोजिक किये जाने के हाल के प्रस्ताव में, “शीत युद्ध की भावना ज़्यादा नज़र आती है, क्योंकि इसमें भिन्न विचार रखने वाले तमाम पक्षों के ख़िलाफ़, एक नए वैचारिक धर्मयुद्ध की घोषणा की गई है”. उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव में, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की इस बुनियादी पुकार से विरोधाभास नज़र आता है जिसमें विश्व को विरोधी धड़ों में बँटने से बचाए जाने को कहा गया है. उन्होंने कहा कि कुछ देशों द्वारा इकतरफ़ा प्रतिबन्ध और पाबन्दियाँ लगाए जाने से, सुरक्षा परिषद और यूएन केन्द्रित ढाँचे की आहमियत कम होती है जिसे, दूसरे विश्व युद्ध के बाद के हालात में आकार दिया गया था. वह ढाँचा, वैश्विक चुनौतियों के हालात में, विनाशकारी परिदृश्यों के ख़िलाफ़ सदैव ही एक भरोसेमन्द बीमा साबित हुआ है. “विश्व को, एक नए विभाजन की नहीं, बल्कि एकता की ज़रूरत है.” उन्होंने सुरक्षा परिषद से, अपने भीतर सुधार करने और नई बहुकेन्द्रीय विश्व व्यवस्था की वास्तविकता के अनुरूप बदलाव करते हुए, एशिया, अफ़्रीका, और लातीनी अमेरिका के लिये, प्रतिनिधित्व बढ़ाने का आहवान किया. पी5 सम्मेलन की पेशकश उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के इस प्रस्ताव की तरफ़ ध्यान आकर्षित किया जिसमें सुरक्षा परिषद के पाँच स्थाई सदस्यों के बीच, “वैश्विक स्थिरता मुद्दों पर बेबाक चर्चा करने की ख़ातिर”, एक सम्मेलन आयोजित करने की पेशकश की गई है, ये पाँच सदस्य हैं – चीन, फ़्रांस, रूस, अमेरिका और ब्रिटेन. उन्होंने कहा कि सभी देश, अपने साझा हितों के साथ, एक ही नाव में सवार हैं, और ये सुनिश्चित किये जाने की ज़रूरत है कि “ये नाव, वैश्विक राजनीति की लहर में, सुरक्षित रूप में तैरती रहे.” उन्होंने कहा कि मतभेदों के बावजूद एक साथ काम करते रहने, और साझा भलाई की ख़ातिर, संयुक्त राष्ट्र के सम्मानजनक मिशन को पूर्ण करना सम्भव होना चाहिये - मौजूदा पीढ़ी को, युद्ध के अभिशाप से बचाने, और आने वाली पीढ़ियों को भी, युद्ध, भुखमरी और बीमारियों से बचाने, सभी के लिये, एक ज़्यादा शान्तिपूर्ण, स्थिर और लोकतांत्रिक भविष्य सुनिश्चित करने के लिये. अन्त में, मैं ये हैशटैग मुहिम प्रस्तावित करता हूँ - #UNCharterIsOurRules. --संयुक्त राष्ट्र समाचार/UN News

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