सरकारी विज्ञापनों का इस्तेमाल संपादकीय सामग्री को प्रभावित करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए : पाकिस्तानी मीडिया

 सरकारी विज्ञापनों का इस्तेमाल संपादकीय सामग्री को प्रभावित करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए : पाकिस्तानी मीडिया
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नई दिल्ली, 25 नवंबर (आईएएनएस)। पाकिस्तान ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन (पीबीए) ने विज्ञापनों को संपादकीय नीति को प्रभावित करने के लिए एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल करने के खिलाफ आवाज उठाई है। पाकिस्तानी अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, इसने किसी भी सरकार द्वारा जबरदस्ती के रूप के रूप में पहचाने जाने वाले विज्ञापनों की निंदा की है। बुधवार को जारी एक बयान में, पीबीए ने जोर देकर कहा कि सरकारी विज्ञापन का इस्तेमाल कभी भी संपादकीय सामग्री को प्रभावित करने या मुक्त रूप से अपनी बात रखने को नियंत्रित करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ, जब कुछ ही घंटों पहले पीएमएल-एन की उपाध्यक्ष मरियम नवाज ने स्वीकार किया कि एक वायरल ऑडियो क्लिप, जिसमें उन्हें कुछ टीवी चैनलों पर किसी को विज्ञापन बंद करने का निर्देश देते हुए सुना जा सकता है, प्रामाणिक है। मरियम ने एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान स्वीकार करते हुए कहा, मैं यह नहीं कह रही कि इसे अलग-अलग मौकों से संकलित किया गया है। यह मेरी आवाज है। इस मुद्दे पर संज्ञान लेते हुए, एसोसिएशन ने मांग की है कि सरकार को पिछले 20 वर्षों के सभी मीडिया खर्च को सार्वजनिक करना चाहिए, जिसमें मौजूदा सरकार द्वारा वितरित किए गए खर्च भी शामिल हों। बयान में कहा गया है, मौजूदा सरकार पर भी यही रणनीति अपनाने के आरोप लगते हैं, जबकि अपने घोषणापत्र के मुताबिक, उसे यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जनता के हित में विज्ञापन के लिए करदाताओं का पैसा अच्छी तरह से खर्च किया जाए और यह योग्यता के आधार पर ही खर्च हो। इसमें कहा गया है कि वर्तमान सरकार ने मीडिया पर नियंत्रण रखने के लिए अलग-अलग सरकारी संगठनों, विभागों और मंत्रालयों से इसे लेकर विज्ञापन निर्णयों को भी केंद्रीकृत कर दिया है। पीबीए ने कहा कि मीडिया संबंधों पर वर्तमान सरकार के ट्रैक रिकॉर्ड की भी मीडिया प्रहरी और पत्रकार संगठनों ने काफी आलोचना की है। पाकिस्तान ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन ने कहा, जब सरकारें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को नियंत्रित करने की कोशिश करती हैं, तो लोकतंत्र और पाकिस्तान के लोगों को सबसे ज्यादा नुकसान होता है। --आईएएनएस एकेके/आरजेएस

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