चीन ने नाबालिगों को हानि पहुंचाने के मुकदमे पर अनिवार्य रिपोर्टिग प्रणाली स्थापित की

 चीन ने नाबालिगों को हानि पहुंचाने के मुकदमे पर अनिवार्य रिपोर्टिग प्रणाली स्थापित की
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बीजिंग, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। हर साल के 11 अक्तूबर को अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस होता है। गत वर्ष की मई को चीन के सर्वोच्च जन प्रोक्युरेटोरेट द्वारा चीनी राष्ट्रीय निगरानी कमेटी, शिक्षा मंत्रालय, सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रालय, नागरिक मामलात मंत्रालय, न्याय मंत्रालय, राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग, कम्युनिस्ट यूथ लीग सेंट्रल और राष्ट्रीय महिला संघ के साथ हस्ताक्षर की गयी नाबालिगों को हानि पहुंचाने के मुकदमे पर अनिवार्य रिपोटिर्ंग प्रणाली स्थापित करने की राय जारी हुई। सर्वोच्च जन प्रोक्युरेटोरेट के संबंधित प्रधान ने कहा कि अनिवार्य रिपोटिर्ंग प्रणाली की स्थापना नाबालिगों के वैध अधिकारों व हितों की रक्षा करने, नाबालिगों की रक्षा से जुड़े सामाजिक शासन प्रणाली के आधुनिकीकरण को मजबूत करने का महत्वपूर्ण कदम है। जो ठीक समय पर नाबालिगों की कारगर रक्षा करने के लिये आवश्यक है। हाल के कई वर्षों में नाबालिगों के खिलाफ अपराधों की संख्या निरंतर रूप से बढ़ रही है। वर्ष 2017 से वर्ष 2019 तक प्रोक्यूरेटोरियल संस्थाओं ने नाबालिगों के खिलाफ कुल 1.6 लाख से अधिक अपराधों के मुकदमे चलाये। मुकदमों की सुनवाई में यह पता लगा कि इस तरह के मुकदमे मुख्य तौर पर परिवार, स्कूल, प्रशिक्षण संस्थान, मनोरंजन स्थल आदि बंद वातावरण में पैदा हुए। इसलिये अन्य लोग बहुत मुश्किल से इसे देख सकते हैं। और बहुत बच्चे दुर्व्यवहार मिलने के बाद दूसरों से मदद मांगने से डरते हैं या झिझकते हैं। अगर ऐसे मामलों का ठीक समय पर पता नहीं चला, तो नाबालिगों को बचाने व सहायता देने में बुरा प्रभाव पड़ेगा। सर्वोच्च जन प्रोक्युरेटोरेट का नौवां विभाग खास तौर पर नाबालिगों से जुड़े काम संभालता है। इस विभाग के प्रधान शी वेईचोंग ने कहा कि नौ मंत्रालयों व विभागों द्वारा संयुक्त रूप से हस्ताक्षर इस अनिवार्य रिपोटिर्ंग प्रणाली की स्थापना की राय के अनुसार उन राष्ट्रीय संस्थाओं, कानूनों और नियमों द्वारा अधिकृत विभिन्न संगठनों और सरकारी अधिकारियों, नाबालिगों से घनिष्ठ रूप से संपर्क रखने वाले व्यवसायों से जुड़े संगठनों व कार्यकर्ताओं को नाबालिगों के खिलाफ मुकदमे की रिपोर्ट देने की जिम्मेदारी होती है। उन में शिक्षा, देखभाल, चिकित्सा, बचाव व निगरानी आदि व्यवसाय शामिल हुए हैं। शी वेईचोंग के अनुसार, यौन शोषण, दुर्व्यवहार, बदमाशी, परित्याग, तस्करी, संगठित भीख आदि नाबालिगों के खिलाफ नौ तरीके वाले मुकदमों को देखकर संबंधित इकाइयों व व्यक्तियों को फौरन इस की रिपोर्ट देनी होती है। साथ ही संदिग्ध मामलों की रिपोर्ट भी देने की जरूरत होती है। इस राय में सार्वजनिक सुरक्षा संस्था द्वारा मुकदमे का निपटारा करने वाले कार्य और प्रोक्युरेटोरियल संस्था द्वारा निगरानी करने वाले कार्य पर नीति-नियम बनाये गये हैं। इस बात की पुष्टि की गयी कि सार्वजनिक सुरक्षा संस्था को संबंधित रिपोर्ट सुनने के बाद फौरन इसे स्वीकार करके आरंभिक स्थिति की जांच करनी है। अगर संबंधित मामलों में सार्वजनिक सुरक्षा प्रबंधन का उल्लंघन करने वाली कार्रवाई और संदिग्ध अपराध मौजूद हैं। तो कानून के आधार पर उन मामलों की जांच करनी है। फिर तीन दिनों के भीतर रिपोटिर्ंग इकाई को जांच के परिणाम या मुकदमे की सुनवाई की प्रक्रिया को बताना पड़ेगा। उधर प्रोक्युरेटोरियल संस्थाओं को कानून के आधार पर संबंधित मामलों की निगरानी करनी चाहिये। शी वेइचोंग ने कहा कि अनिवार्य रिपोटिर्ंग प्रणाली स्थापित करने की राय में सार्वजनिक सुरक्षा संस्था और प्रोक्युरेटोरियल संस्था से नाबालिगों के खिलाफ मुकदमे की निपटारा करने के दौरान नाबालिगों की सुरक्षा पर ध्यान देने का आग्रह किया गया। इस की चर्चा में उन्होंने कहा, अगर सार्वजनिक सुरक्षा संस्था और प्रोक्युरेटोरियल संस्था को यह पता लगा कि नाबालिगों के मां-बाप या अन्य अभिभावक ने कानून के आधार पर नाबालिगों के लिये संरक्षक की जिम्मेदारी नहीं निभाई, या नाबालिगों के वैध अधिकारों व हितों का उल्लंघन किया। तो उन्हें चेतावनी और पारिवारिक शिक्षा लेने का निर्देशन देना चाहिये। अगर स्थिति बहुत गंभीर है, तो उन्हें कानून व नीति के आधार पर सजा दी जाएगी। अगर नाबालिग घरेलू हिंसा से पीड़ित हैं, या उन के सामने घरेलू हिंसा का खतरा मौजूद है, तो उक्त दो संस्थाएं नाबालिगों की ओर से कोर्ट से व्यक्तिगत सुरक्षा संरक्षण आदेश का आवेदन कर सकती हैं। अनिवार्य रिपोटिर्ंग प्रणाली स्थापित करने की राय के अनुसार संबंधित सरकारी विभागों को अपने व्यवसाय व क्षेत्र में अनिवार्य रिपोटिर्ंग प्रणाली को लागू करने की स्थिति पर निगरानी व मार्गदर्शन करना चाहिये। शी वेइचोंग ने कहा कि प्रोक्युरेटोरियल संस्था को इस राय को लागू करने की कानूनी निगरानी करनी चाहिये। उन के अनुसार, अनिवार्य रिपोटिर्ंग प्रणाली की भूमिका अदा करने के लिये इसे लागू करना खास महत्वपूर्ण है। अगर प्रोक्युरेटोरियल संस्था ने काम करने में संबंधित विभागों की निष्क्रियता को ढूंढ़ा। तो प्रोक्युरेटोरियल सुझाव जारी करके उन की निगरानी की जा सकती है, ताकि ठीक समय पर अपराधों की जांच करके निपटारा किया जा सके। उनके अलावा अगर सरकारी अधिकारी ने लंबे समय तक अनिवार्य रिपोटिर्ंग काम पर ध्यान नहीं दिया, और अनिवार्य रिपोटिर्ंग प्रणाली को लागू नहीं किया। तो विभिन्न स्तरीय निगरानी कमेटी उन्हें जवाबदेह ठहराएगी। और उन लोगों, जो अपने पद से लाभ उठाकर अपराध करने से संदिग्ध हैं, की जांच व निपटारा कानून के आधार पर किया जाएगा। साथ ही सर्वोच्च जन प्रोक्युरेटोरेट ने नाबालिगों को हानि पहुंचाने के मुकदमों की अनिवार्य रिपोर्ट देने के पाँच क्लासिक उदाहरण भी जारी किये। जैसे: शिक्षक ने पाया कि उसका छात्र अवैध उत्पीड़न का शिकार बना, और ठीक समय पर रिपोर्ट दी। फिर कई विभागों ने संयुक्त रूप से अपराधियों को सजा दी। शी वेइचोंग ने कहा कि स्कूलों व शिक्षकों को गंभीरता से अनिवार्य रिपोटिर्ंग प्रणाली को लागू करने की आवश्यकता है। उन के अनुसार, स्कूलों को गंभीरता से अनिवार्य रिपोटिर्ंग प्रणाली को लागू करना चाहिये, शिक्षक समूह में रिपोटिर्ंग जिम्मेदारी और उत्पीड़न से ग्रस्त विद्यार्थियों को बचाने की जिम्मेदारी को मजबूत करना चाहिये। साथ ही गैर-रिपोटिर्ंग, छिपाव और चूक के लिए स्पष्ट दंडों की पुष्टि भी की गयी। ताकि वास्तविकता से स्कूलों में नाबालिगों के अधिकारों व हितों की रक्षा की जा सके। जानकारी के अनुसार संबंधित विभाग संयुक्त बैठक तंत्र की स्थापना करेंगे, अनिवार्य रिपोटिर्ंग प्रणाली को लागू करने व निगरानी करने को मजबूत करेंगे, और मुकदमे से जुड़े नाबालिगों की रक्षा व बचाव कार्य अच्छी तरह से करेंगे। ( साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग ) --आईएएनएस एएनएम

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