जैव विविधता दिवस : मनोरंजन के लिए जंगली जानवरों का शिकार न करें अमेरिकी लोग

 जैव विविधता दिवस : मनोरंजन के लिए जंगली जानवरों का शिकार न करें अमेरिकी लोग
biodiversity-day-american-people-do-not-hunt-wild-animals-for-fun

बीजिंग, 22 मई (आईएएनएस)। अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस 22 मई को मनाया जाता है। इस बार का मुद्दा है प्रकृति की रक्षा सबकी जिम्मेदारी। बेशक जंगली जानवर पारिस्थितिक तंत्र में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। जंगली जैव संसाधनों की रक्षा से पारिस्थितिक पर्यावरण के संतुलित विकास और जैव विविधता के विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। लेकिन जहां पूरी दुनिया जंगली जानवरों की रक्षा का आह्वान कर रही है, वहीं अमेरिका उन्हें मारने के लिए तरह-तरह के बहाने ढूंढ रहा है। अमेरिकी कृषि मंत्रालय द्वारा पिछले साल जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, पूरे वर्ष 2019 में अमेरिका में मारे गए जंगली जानवरों की कुल संख्या 12 लाख से अधिक रही। उनमें टेक्सास, कोलोराडो और न्यूमैक्सिको तीन स्टेट सब से अधिक हैं। उन मारे गए जंगली जानवरों में 14 हजार से अधिक भेड़िये, 3 लाख 64 हजार लाल पंख वाले काले पक्षी, 393 काले भालू, 300 पहाड़ी शेर, 777 बॉबकैट, 2,447 लोमड़ियां आदि शामिल हुई हैं। साथ ही घोंसलों में बड़ी संख्या में पशुशावक भी मारे गए थे! ध्यानाकर्षक बात यह है कि इस सूची में सूचीबद्ध भालू, बॉबकैट, पहाड़ीशेर, भेड़िये, लोमड़ी, रैकून और कछुआ- ये सभी संरक्षित जानवर हैं। अवश्य ही अमेरिकी कृषि मंत्रालय ने उन जंगली जानवरों को मारने के लिए एक उचित कारण ढूंढा है, यानी स्थानीय कृषि का विकास करने के लिए यह काम किया गया। बड़े पैमाने वाले कृषि व पशुपालन व्यवसायों के विकास के कारण अमेरिकी लोगों ने जंगली जानवरों के क्षेत्र पर हमला किया, जिससे जानवरों की गतिविधियों का दायरा मानव के कृषि व पशुपालन के दायरे के साथ ओवरलैप होता है। इसका परिणाम यही है कि शाकाहारी जंगली जानवर खेतों में आते हैं, और मांसाहारी जंगली जानवर पशुओं को अपना भोजन मानते हैं। वास्तव में इन मासूम जंगली जानवरों का क्या कसूर है? लेकिन मानव के चारागाह और खेत में प्रवेश करने वाले जंगली जानवरों को अमेरिकी किसानों ने बेझिझक गोलियों से मार डाला, क्योंकि अमेरिका में लोग कानूनी रूप से बंदूकें रख सकते हैं, और कानूनी रूप से शिकार भी कर सकते हैं। इसलिए जंगली जानवरों की हत्या उनके लिए एक सामान्य बात है। इसे देखकर लोग शायद अमेरिका के इतिहास में स्थानीय इंडियन्स के नरसंहार के खूनी दृश्यों के बारे में सोच सकते हैं। पुरातन समय में अमेरिका ने इंडियंस को उनके घर से भगाया, और वर्तमान में वे जंगली जानवरों को भी उनके घरों से निकाल रहे हैं। बेशक, जंगली जानवरों को मानव के साथ इस लड़ाई में जरूर हार मिलेगी। गौरतलब है कि उत्तरी अमेरिका में जंगली जानवरों का संसाधन बहुत समृद्ध है। और एक आश्चर्य की बात यह है कि गतवर्ष विश्व में कोविड-19 महामारी के प्रकोप के दौरान अमेरिका में मांस प्रसंस्करण उद्योग बंद हो गए। इसके कारण तमाम लोगों ने बर्खास्तगी या काम न मिलने के कारण ज्यादा समय हासिल किया। फिर कई अमेरिकी लोगों ने शिकार से मिले मांस खाना शुरू किया, क्योंकि यह दुकान से मांस खरीदने की अपेक्षा ज्यादा आसान व सस्ता है। पर मांस की आपूर्ति में कमी के पीछे का कारण यही नहीं है कि अमेरिका में पर्याप्त पशुधन नहीं हैं। वास्तव में अमेरिकी मांस उत्पादों की खरीद प्रतिबंध और कीमतों में वृद्धि होने का कारण आपूर्ति श्रृंखला का विराम है। इससे जाहिर हुआ है कि आपातस्थिति के मुकाबले में अमेरिका सरकार की क्षमता कमजोर है। फिर अनगिनतएल्क, जंगली सूअर और अन्य जंगली जानवर अक्षम सरकार की ओर से बलि के बकरे बन गए हैं! उन के अलावा अमेरिकियों ने न सिर्फ अपने देश में जंगली जानवरों को मार डाला, बल्कि जंगली जानवरों के स्वर्ग--अफ्रीकी महाद्वीप में भी अपना हाथ बढ़ाया। जानवरों के मन में शायद यह विचार पैदा होगा कि पहले वे स्वर्ग को एक बहुत अच्छी जगह मानते हैं, लेकिन बाद में उन्हें पता है कि केवल मरने के बाद वहां जा सकते हैं। क्योंकि अमेरिका के अमीर लोग, खास तौर पर दूसरी पीढ़ी के अमीर अकसर शिकार के लिये अफ्ऱीका जाते हैं। वे हाथियों, शेरों, गैंडों, चीतों और अन्य जंगली जानवरों का शिकार करने से मजा लेते हैं, और शिकार ट्राफियों की फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट करके अपनी दौलत दिखाते हैं। ऐसी घटनाएं कई बार सामने आई हैं। खाने के लिए जानवरों को मारना भले ही क्षमा योग्य हो, लेकिन मनोरंजन के लिए उन्हें मारना निर्दयता है। पर अफ्ऱीका में इस तरह का ट्राफी शिकार एक व्यापक उद्योग श्रृंखला बन गया। पर्यटन एजेंसी, हॉटल, शिकार स्थान के अलावा जानवरों के नमूने बनाने के लिए बड़े और छोटे कारखानों को भी इस से लाभ मिल सकता है। हर वर्ष लगभग एक लाख जंगली जानवर इस तरह के शिकार में मर जाते हैं। उन में कम से कम 600 हाथी और 800 तेंदुए शामिल हुए हैं। यहां हम केवल यह बताना चाहते हैं कि अगर खरीदार नहीं होंगे, तो जानवरों की हत्या नहीं होगी। यह रिपोर्ट पढ़कर क्या आपके दिमाग में यह सवाल पैदा नहीं होता कि अगर जंगली जानवर रो पाते तो क्या अमेरिका उनके आंसुओं में नहीं डूब जाता? (साभार : चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग) --आईएएनएस एसजीके