विश्लेषणःः बाइडेन यदि जीते तो अमेरिका की विदेश नीति में होंगे बड़े बदलाव
विश्लेषणःः बाइडेन यदि जीते तो अमेरिका की विदेश नीति में होंगे बड़े बदलाव
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विश्लेषणःः बाइडेन यदि जीते तो अमेरिका की विदेश नीति में होंगे बड़े बदलाव

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निवेदिता शर्मा अमेरिका के पूर्व उप राष्ट्रपति जो बाइडेन यदि नवंबर में होने वाले राष्ट्रपति पद के चुनाव में जीत हासिल कर लेते हैं तो अमेरिका की विदेश नीति में बड़े बदलाव किए जाने की संभावना लगभग तय मानी जा रही है। बाइडेन सत्ता में आने पर देश के मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कुछ अहम और सबसे साहसिक कदमों को पलट सकते हैं। इसके साथ ही लगातार विदेश नीति के जिन मुद्दों पर वे और उनकी पार्टी ट्रंप को लगातार घेरती रही है, उनमें बाइडेन पूरी तरह से परिवर्तन लाने के पक्ष में हैं। इस मामले में राष्ट्रपति पद के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार बाइडेन और उनके सलाहकारों ने मध्य पूर्व से एशिया, लातिन अमेरिका से अफ्रीका तक, खासकर यूरोप में व्यापार, आतंकवाद, हथियार नियंत्रण एवं आव्रजन के मामलों के संबंध में विदेश नीति में बड़े बदलाव करने का संकेत दिए हैं । कुछ अपवादों के साथ, अमेरिकी बाइडेन को पारंपरिक सहयोगियों के साथ फिर से जुड़ने की उम्मीद कर सकते हैं। बाइडेन ने अपने चुनावी अभियान में विदेश नीति सलाहकारों की एक अनुभवी टीम को भी इकट्ठा किया है। जेक सुलिवन ने राष्ट्रपति बराक ओबामा और विदेश विभाग में नीति नियोजन निदेशक के उप सहायक के रूप में कार्य किया है। निकोलस बर्न्स ने जॉर्ज डब्ल्यू बुश और बिल क्लिंटन के साथ उच्चस्तरीय विदेश नीति में कार्य किया है । टोनी ब्लिंकेन राज्य के उप सचिव और ओबामा के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रह चुके हैं। सुसान राइस, जिन्होंने 2009 से 2013 तक संयुक्त राष्ट्र में 27 वें संयुक्त राज्य अमेरिका के राजदूत और 2013 से 2017 तक 24 वें संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में कार्य किया है । सत्ता परिवर्तन होने पर यहां उपराष्ट्रपति के लिए एक फाइनलिस्ट हैं। यदि वह चयनित नहीं भी होती हैं तब भी वे एक प्रमुख सलाहकार बन सकती हैं यदि बाइडेन राष्ट्रपति बनते हैं । इस बारे में बाइडेन के सहयोगी बिना नाम लिए कहते हैं कि यदि वे राष्ट्रपति चुने जाते हैं तो वह व्हाइट हाउस, स्टेट डिपार्टमेंट और पेंटागन में दैनिक प्रेस ब्रीफिंग को तुरंत बहाल कर देंगे, अभी ऐसा लगता है कि अमेरिकी नीति को संप्रेषित करने के लिए बहुत कुछ जो महत्वपूर्ण माना जाता है, उसे ट्रम्प प्रशासन ने छोड़ दिया है। बाइडेन सत्ता में आते ही वह सभी कार्य शुरू करेंगे। वहीं, बाइडेन और उनके सहयोगियों का साफ कहना है कि यदि वे सत्ता में आए तो इन सभी विषयों पर जल्द कार्य करने का इरादा रखते हैं, जिसमें कि मानवीय आधार पर फिलिस्तीनी प्राधिकरण को सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, जिसमें कि अभी ट्रम्प प्रशासन ने फिलिस्तीनी शरणार्थियों का समर्थन करने वाली एजेंसियों को समाप्त कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों जैसे संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन और संभवत: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में अमेरिकी सदस्यता बहाल करने पर भी उनका जोर होगा । यूरोपीय सहयोगियों के संबंध में बयानबाजी और अपमान करने के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कुख्यात हो चुके है, ऐसे में नाटो के साझेदारों के बीच संबंधों को पुन: ताकतवर बनाने की कोशिश अमेरिका द्वारा शुरू की जाएगी । अफ्रीका महाद्वीप पर अमेरिका की प्रोफाइल को ऊपर उठाने की कोशिश करने का वादा भी बाइडेन और उनके सहयोगियों द्वारा किया जा रहा है । जोकि अभी चीन के साथ प्रतिस्पर्धा का एक नया युद्धक्षेत्र बना हुआ है। इसके अलावा यदि एशिया की बात करें तो यहां जापान और दक्षिण कोरिया में अमेरिकी सैनिकों की उपस्थिति का समर्थन करने वाले एक पारंपरिक अमेरिकी रुख पर वापस लौटेने की बात उनकी तरफ से कही जा रही है । फिलहाल बाइडेन ने किम के साथ ट्रम्प के व्यक्तिगत संबंधों की भी आलोचना की है। इसी के साथ लैटिन अमेरिका देशों में ट्रम्प प्रशासन समझौतों को रद्द कर शरण मांगने वाले आप्रवासियों को मेक्सिको और अन्य देशों में भेजता है, जबकि वे अदालत की तारीखों का इंतजार करते हैं और उन्हें न्याय समय पर नहीं मिल पाता है । ऐसे में बाइडेन और उनके सहयोगी क्यूबा के साथ ओबामा-युग को फिर से शुरू करना चाहते हैं। बाइडेन ने अपनी बात रखते हुए मीडिया के बीच कहा है कि मुझे पता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम कैसे करना है। मैं अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एवं खुफिया मामलों को समझता हूं। अपने देश के लिए जो भी बेहतर होगा मैं करूंगा। इसके लिए पॅलिसी स्तर में जहां जैसे संभव होगा यदि बदलाव की आवश्यकता महसूस हो रही है या बेहतर परिणामों क लिए बदलाव जरूरी है तो मैं उसे करने में जरा भी देर नहीं लगाऊंगा।-hindusthansamachar.in