अमेरिकी मीडिया को तथ्यों का सम्मान करना चाहिये

 अमेरिकी मीडिया को तथ्यों का सम्मान करना चाहिये
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बीजिंग, 13 जुलाई (आईएएनएस)। हाल ही में अमेरिकी मीडिया ब्लूमबर्ग ने एक अंतरराष्ट्रीय महामारी विरोधी रैंकिंग जारी की। जिसके मुताबिक अमेरिका 76 अंकों के साथ पहले स्थान पर रहा, जबकि सभी एशियाई देशों को शीर्ष 5 से बाहर रखा गया है। अमेरिकी मीडिया हमेशा कुछ रैंकिंग सूचियां बनाना पसंद करता है। हालांकि, एक विश्व प्रसिद्ध मीडिया के रूप में, ब्लूमबर्ग ने महामारी विरोधी मुद्दे पर जानबूझकर पक्षपाती मानकों को अपनाया है, जिससे लोगों को अनिवार्य रूप से अमेरिकी मीडिया की विश्वसनीयता पर संदेह पैदा हुआ है। न्यू कोरोना वायरस महामारी के फैलने के बाद से अमेरिकी मीडिया की रिपोटरें का सिंहावलोकन करते हुए हम देख सकते हैं कि अमेरिकी मीडिया ने तथ्यों की अनदेखी कर अफवाह फैलाया है। उन्हों ने चीन महामारी को छुपाता है, न्यू कोरोना वायरस विशेष रूप से एशियाई लोगों को लक्षित है और वायरस वुहान प्रयोगशाला से आता है जैसे अनेक झूठी खबरें फैला दी हैं। तथ्यों ने साबित कर दिया है कि अमेरिकी मीडिया के पीछे कुछ राजनीतिक ताकतें हैं। अमेरिकी मीडिया कोई स्वतंत्र मीडिया नहीं, बल्कि अमेरिकी राजनीतिज्ञों के हाथ में औजार ही है। अमेरिका के आधिपत्य को बनाए रखने के लिए, वे काले और सफेद को उलटने और सही को गलत बोलने में स्वतंत्र हैं। न्यू कोरोना महामारी मानव इतिहास में एक अभूतपूर्व आपदा है। महामारी से लड़ने और स्रोत का पता लगाने के मुद्दे पर, मीडिया की यह जिम्मेदारी है कि उसे राजनीतिक पूर्वाग्रहों को छोड़कर वैज्ञानिक ²ष्टिकोण के साथ तथ्यों के अनुरूप रिपोर्ट करना पड़ता है। सामान्य तर्क के अनुसार, किसी देश के महामारी विरोधी प्रदर्शन को पुष्ट मामलों की संख्या, मृत्यु दर, इलाज की दर और टीकाकरण की संख्या आदि के आधार पर आंका जाना चाहिए। लेकिन ब्लूमबर्ग के अपने ही मानदंड हैं। जिसके मुताबिक नाकाबंदी को कम करने, उड़ान में बदलाव छोटा बनने और अंतरराष्ट्रीय उड़ान मार्ग की संख्या बढ़ाने के 3 आइटम सबसे महत्वपूर्ण आइटम माना जाता है। इस मानक के अनुसार, महामारी के अंतरराष्ट्रीय प्रसार को पूरी तरह से नजरअंदाज किया जा सकता है, और अन्य देशों, विशेष रूप से कमजोर सार्वजनिक चिकित्सा क्षमता वाले विकासशील देशों में लोगों के जीवन और स्वास्थ्य हितों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया जा सकता है। वर्तमान में, डेल्टा वायरस दुनिया के 104 देशों में फैल गया है, और इस उत्परिवर्ती वायरस के प्रति मौजूदा वैक्सीन का प्रतिरोध थोड़ा अपर्याप्त है। दुनिया भर में अभी भी एक ही दिन में 350,000 से अधिक नए मामले सामने आते हैं, और हर रोज मरने वालों की संख्या 7,600 तक पहुंची है। साथ ही अधिकांश देश नकारात्मक विकास से जूझ रहे हैं। पहली जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार अमेरिका में कुल 3.45 करोड़ पुष्ट मामले हैं और मृतकों की कुल मात्रा 6.2 लाख तक पहुंची है। इसका मतलब है कि अमेरिकी आबादी के दसवें से अधिक भाग पुष्ट हो गया है। जिसमें छिपे हुए संक्रमित लोगों की गिनती नहीं हुई है। इसी स्थिति में ब्लूमबर्ग ने अमेरिका को महामारी की रोकथाम में चैंपियन नामित कैसे कर सका? क्या वह अमेरिकी लोगों के मनोबल बढ़ाना चाहता है? या यह सिर्फ एक व्यंग्य है? पश्चिमी मीडिया शिक्षण सामग्री में सत्य, निष्पक्षता और न्याय ये सब मूल सिद्धांत हैं। हालांकि, वास्तव में, अमेरिकी मीडिया पेशेवर अक्सर भूल जाते हैं कि उन्होंने कक्षा में क्या सीखा है। कुछ राजनीतिक उद्देश्यों के लिए, अमेरिकी मीडिया तथ्यों की अवहेलना कर सकता है और जनता को भ्रमित कर सकता है। तथ्यों ने दिखाया है कि मीडिया अमेरिकी राजनीतिक दलों के हाथों में एक औजार है। राजनेता विरोधियों पर हमला करने , जनता की राय को निर्देशित करने और उन्हें धोखा देने के लिए मीडिया का उपयोग करते हैं। अपने राजनीतिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए, अमेरिकी मीडिया की कोई नैतिक रेखा नहीं है और यहां तक कि वह खुले तौर पर तथ्यों को गढ़ा जा सकता है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, न्यू कोरोनावायरस लंबे समय तक मानव समाज के साथ रहेगा। वर्तमान में अमेरिका और पश्चिमी देश वैक्सीन प्लस झुंड प्रतिरक्षा उपायों को अपनाने के लिए अधिक इच्छुक हैं। अर्थात वे इस वायरस को पारंपरिक फ्लू की तरह एक आम वायरस के रूप में मानते हैं, और सामाजिक व्यवस्था की बहाली के लिए, वे कोई विशेष अलगाव उपाय नहीं करेंगे। उधर अमेरिका और पश्चिम जैसे मजबूत चिकित्सा और स्वास्थ्य स्थितियों वाले देशों के लिए, वे सामाजिक खुलेपन द्वारा लाए गए महामारी के प्रसार का विरोध करने में सक्षम हो सकते हैं। लेकिन उन विकासशील देशों, जिनके पास सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षमता कम है और यहां तक कि अपर्याप्त टीके भी नहीं हैं, के लिए महामारी का ऐसे विरोध करने का खतरा मौजूद है। चीन ने हमेशा सख्त बंद उपायों को अपनाया है। कारण यह है कि चीन की बड़ी आबादी है और चिकित्सा प्रणाली पर भारी दबाव है। इससे भी महत्वपूर्ण है कि चीनी सरकार जनता के जीवन और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देती रहती है। और चीन सरकार किसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए लोगों के जीवन को नहीं छोड़ेगी। यदि हम ब्लूमबर्ग द्वारा वकालत अमेरिकी आदर्श का अनुसरण करते हो, तो सभी देशों को रेस्तरां की पूर्णता, मुफ्त छुट्टियों, मास्क के उन्मूलन, यात्रा प्रतिबंधों में छूट और सीमा को हटाने के कदम उठाना चाहिये। पर इन सबके पीछे अमेरिका का मानक है। लेकिन अन्य देशों, विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए, अमेरिका के मानकों तक पहुंचना और ब्लूमबर्ग की गौरव सूची में एक जगह जीतना यह कोई आसान बात नहीं है। (साभार---चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) --आईएएनएस एएनएम

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