कोविड-19 व्यवधान से ‘शिक्षा प्रणाली को उबारने में शिक्षकों की अहम भूमिका’

कोविड-19 व्यवधान से ‘शिक्षा प्रणाली को उबारने में शिक्षकों की अहम भूमिका’
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संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने कहा है कि कोविड-19 महामारी की वजह से शिक्षा में आए व्यवधान को दूर करने और शिक्षा प्रणाली की सफल पुनर्बहाली के लिये, विश्व में सात करोड़ से अधिक शिक्षकों के कल्याण, प्रशिक्षण, पेशेगत विकास और कामकाजी परिस्थितियों में निवेश बढ़ाये जाने की आवश्यकता होगी. संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवँ सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) की महानिदेशक ऑड्री अज़ूले, संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ़) की कार्यकारी निदेशक हेनरीएटा फ़ोर, अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के महानिदेशक गाय राइडर और एजुकेशन इण्टरनेशनल के महासचिव डेविड एडवर्ड्स ने 5 अक्टूबर को ‘विश्व शिक्षक दिवस’ के अवसर पर जारी अपने साझा सन्देश में शिक्षकों को पुनर्बहाली प्रयासों के केंद्र में बताया है. Teachers play one of the most crucial roles in our societies. We must ensure their work is appreciated and valued accordingly → We need to #InvestInTeachers so they can keep impacting lives and building our societies. Happy #WorldTeachersDay! 😊 pic.twitter.com/HApN2gvHWU — UNESCO 🏛️ #Education #Sciences #Culture 🇺🇳😷 (@UNESCO) October 5, 2021 यूएन एजेंसियों के शीर्ष अधिकारियों ने कहा, “आज हम सभी शिक्षकों के असाधारण समर्पण और साहस, परिस्थितियों के अनुरूप ढलने और बेहद चुनौतीपूर्ण व अनिश्चित हालात में अभिनव रास्तों को खोजने की की उनकी क्षमता की सराहना करते हैं.” कोविड-19 संकट से शिक्षा प्रणाली में उपजे व्यवधान ने पढ़ाई-लिखाई जारी रखने में शिक्षकों की अहम भूमिका को रेखांकित किया है. शुरुआती चुनौतियों के बाद, नवीनतम टैक्नॉलॉजी का सहारा लेकर शिक्षा जारी रखने से लेकर अपने छात्रों को सामाजिक-भावनात्मक समर्थन प्रदान करने और पीछे छूट जाने का जोखिम झेल रहे छात्रों को विशेष सहायता उपलब्ध कराने तक, शिक्षा क्षेत्र में जवाबी कार्रवाई में शिक्षकों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है. वक्तव्य के मुताबिक़ यह समय शिक्षकों की असाधारण भूमिका को पहचाने जाने और उनकी प्रतिभा को निखारने के लिये ज़रूरी प्रशिक्षण और समर्थन सुनिश्चित करने का है. यूएन एजेंसियों का कहना है कि समावेशी, न्यायोचित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को हर परिस्थिति में, हर छात्र तक तेज़ी से पहुँचाने की कुँजी, शिक्षकों के पास है. यह अन्तरराष्ट्रीय दिवस हर वर्ष 5 अक्टूबर को मनाया जाता है और इसके ज़रिये सरकारों व अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से शिक्षकों व उनके समक्ष पेश चुनौतियों से निपटने के लिये असरदार नीतिगत उपायों की पुकार लगाई जाती है. चुनौतियाँ बरक़रार 27 सितम्बर तक, 124 देशों में स्कूल पूरी तरह से, 44 देशों में आंशिक रूप से खुल गए हैं, जबकि 16 देशों में अब भी स्कूलों में तालाबन्दी है. ये आँकड़े दर्शाते हैं कि स्कूलों को फिर से खोले जाने की प्रक्रिया में शिक्षकों के स्वास्थ्य व कल्याण पर ध्यान दिया जाना होगा और सफल शैक्षिक टैक्नॉलॉजी को एकीकृत करने व उसके इस्तेमाल के लिये प्रयास जारी रखने होंगे. यूनेस्को के अनुसार, 71 फ़ीसदी देशों में शिक्षकों के टीकाकरण को कुछ हद तक प्राथमिकता दी गई है, मगर 19 देशों ने पहले दौर के टीकाकरण में उन्हें शामिल किया है. जबकि 59 देशों ने उन्हें अपनी टीकाकरण योजनाओं में प्राथमिकता नहीं दी है. बताया गया है कि जिन देशों में दूरस्थ (रिमोट) और मिलीजुली (हाइब्रिड) शिक्षा इन्तज़ामों की आवश्यकता है, वहाँ शिक्षकों को हरसम्भव समर्थन प्रदान किया जाना होगा. यूएन एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा प्रणाली की पुनर्बहाली के केंद्र में शिक्षकों को रखा जाना होगा, और इसके लिये उनकी संख्या को बढ़ाये जाने की आवश्यकता है. नई रिपोर्ट इस दिवस पर आपात परिस्थितियों और लम्बे समय से जारी संघर्षों में शिक्षा प्रयासों के लिये संयुक्त राष्ट्र वैश्विक कोष (Education Cannot Wait) ने अपनी एक नई रिपोर्ट जारी की है. रिपोर्ट बताती है कि विश्व भर में 30 बेहद ख़राब मानवीय संकटों के दौरान 46 लाख बच्चों और किशोरों तक गुणवत्तापरक शिक्षा पहुँचाना सम्भव हुआ है. इनमें 48 प्रतिशत लड़कियाँ हैं. ‘Winning the Human Race’ शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में शिक्षण कार्यबल में निवेश की अहमियत पर बल दिया गया है ताकि संकट प्रभावित लड़के-लड़कियों के लिये गुणवत्तापरक पढ़ाई-लिखाई को सहारा दिया जा सके. रिपोर्ट के मुताबिक़ यूएन कोष ने क़रीब डेढ़ लाख शिक्षकों की या तो भर्ती की है या फिर उन्हें वित्तीय समर्थन दिया है, जिनमें 41 हज़ार से अधिक महिलाएँ हैं. इसके अलावा, आपात हालात और संकटों में रहने के लिये मजबूर 26 लाख बच्चों और किशोरों को पढ़ाई-लिखाई के लिये सामग्री मुहैया कराई गई है. कोविड-19 के दौरान दो करोड़ 92 लाख अतिरिक्त ज़रूरतमन्द लड़कियों व लड़कों, और तीन लाख से अधिक शिक्षकों तक मदद पहुँचाई गई है, जो कि संकट व आपात हालात में रह रहे थे. इनमें दूरस्थ पढ़ाई लिखाई के लिये समाधान, बच्चों, शिक्षकों और उनके समुदाय के स्वास्थ्य कल्याण की रक्षा के लिये सामग्री है. इसके बावजूद, यूएन कोष ने आगाह किया है कि कोविड-19 महामारी ने निर्बलों के लिये पहले से मौजूद मुश्किलों को और पैना किया है. इन हालात में मानवीय राहत अपीलों में शिक्षा के लिये ज़रूरी धनराशि वर्ष 2019 में एक अरब से बढ़कर एक अरब 40 करोड़ तक पहुँच गई है. --संयुक्त राष्ट्र समाचार/UN News

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