अमेरिका में 'टिक टॉक' एप की साझीदार होगी अमेरिकी टेक कंपनी ओरेकल
अमेरिका में 'टिक टॉक' एप की साझीदार होगी अमेरिकी टेक कंपनी ओरेकल
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अमेरिका में 'टिक टॉक' एप की साझीदार होगी अमेरिकी टेक कंपनी ओरेकल

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- टिक टॉक एप के अमेरिका में चाहने वाले दस करोड़ युवाओं में ख़ुशी - ख़रीद फ़रोख़्त में अभी लग सकता है एक और सप्ताह ललित मोहन बंसल लॉस एंजेल्स 15 सितम्बर (हि.स.)। अमेरिका में 'टिक टॉक' एप की साझीदार अमेरिकी टेक कंपनी ओरेकल होगी। रविवार की देर सायं ओरेकल कंपनी की ओर से टिक टॉक ख़रीदे जाने की ख़बर के बाद युवाओं में ख़ासा उत्साह है। युवाओं ने कहा है कि अब उन्हें टिक टॉक एप पर प्रतिबंध लगने और उनके मनपसंद टिक टॉक एप के खोने का कोई ख़तरा नहीं रह गया है। अमेरिका में टिक टॉक एप के दस करोड़ से अधिक चाहने वाले युवा हैं। ओरेकल कंपनी ने सोमवार को अधिकृत तौर पर अमेरिका में टिक टॉक कंपनी की सम्पति और कार्य संचालन के ख़रीदने पर अपनी स्वीकृति दे दी है। इसका संबंध में एक विधिवत प्रस्ताव ट्रेज़री सेक्रेटरी स्टीव मयुंचिन को भेज दिया गया है। इस संदर्भ में पूछे जाने पर मयुंचिन ने भी कहा है कि वह इस सप्ताहांत प्रस्ताव पर फिर से ग़ौर करेंगे। इसके बाद माइक्रोसाफट अथवा वाल मार्ट के टिक टॉक एप ख़रीदे जाने के मुद्दे पर विराम लग चुका है। उधर टिक टॉक प्रवक्ता ने भी कहा है कि एक बार क्रय-विक्रय के बारे में समझौता होने के पश्चात बीस हज़ार टेक कर्मियों को अतिरिक्त रोज़गार दिए जा सकेंगे। स्टीव मयुंचिन ने अमेरिकी मीडिया के साथ बातचीत में कहा है कि अमेरिकी प्रशासन को ओरेकल कंपनी की ओर से टिक टॉक सम्पत्ति ख़रीदे जाने संबंधी प्रस्ताव मिल गया है। उन्होंने कहा कि ट्रम्प प्रशासन के सम्मुख टिक टॉक को ले कर बड़ा मुद्दा (कोड) देश हित में डाटा सुरक्षा को ले कर है। टिक टॉक की ओर से भी भरोसा दिलाया जा रहा है कि अमेरिकी डाटा कदापि चीनी सरकार से साझा नहीं किए जायेंगे। मयुंचिन ने इस प्रस्ताव पर विचार करने का आश्वासन दिया है, न कि इसे स्वीकार किए जाने के बारे में कोई टिप्पणी की है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पिछले महीने घोषणा की थी कि देश की सुरक्षा हितों को ध्यान में रखते हुए वह टिक टॉक की पैतृक चीनी कंपनी 'बाइटडाँस' को यों ही अमेरिका में टिक टॉक एप के चलने चलाने की अनुमति नहीं दे सकते। इसके लिए उन्होंने 20 सितंबर तक कंपनी के सम्मुख दो विकल्प रखे थे। एक, वह अमेरिका में टिक टॉक एप चलाना चाहती है, तो टिक टॉक से संबंधित अपने सभी अधिकार अमेरिकी कंपनी को बेच कर चल दे। दूसरा, ऐसा वह २० सितंबर तक नहीं कर पाती है तो उस पर ट्रम्प प्रशासन प्रतिबंध लगा देगी। इस संदर्भ में टिक टॉक के ख़रीदार के रूप में माइक्रोसाफट और ओरेकल ने प्रस्ताव दिए थे। लेकिन बाइटडाँस ने माइक्रोसाफट के प्रस्ताव को अमान्य घोषित कर दिया था। इसका कारण यह बताया जा रहा है कि ओरेकल टेक कंपनी के बारे में ट्रम्प का झुकाव था। हिन्दुस्थान समाचार-hindusthansamachar.in