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गेवरा स्टेशन से यात्री ट्रेन संचालन के लिए सैकड़ों नागरिक उतरे सड़कों पर, माकपा से प्रशासन ने मांगा 15 दिनों का समय

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कोरबा, 03 फरवरी (हि स )। लॉक डाउन के बाद से कुसमुंडा के गेवरा रोड स्टेशन से बंद पड़ी सभी ट्रेनों को चालू करने की मांग पर बुधवार को माकपा द्वारा आहूत रेल चक्का जाम आंदोलन को आम जनता का अभूतपूर्व समर्थन मिला। सीटू, छत्तीसगढ़ किसान सभा, जनवादी महिला समिति और रेल संघर्ष समिति के साथ ही व्यापारियों और ऑटो चालकों के संगठनों द्वारा इस आंदोलन में भाग लेने के कारण एक ओर सैकड़ों नागरिक सड़कों पर दिखे, तो दूसरी ओर जिला प्रशासन, रेल प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन भी भारी दबाव में दिखे। रेल प्रशासन ने इस मांग पर सकारात्मक कार्रवाई करने के लिए 15 दिनों की लिखित मोहलत मांगी है। इस आंदोलन को टालने के लिए माकपा नेताओं के साथ रेल प्रशासन की बैठक विफल होने के बाद इस आंदोलन से निपटने के लिए कल रात भर प्रशासन सक्रिय रहा। आंदोलनकारी संगठनों और नेताओं पर आंदोलन स्थगित करने के लिए दबाव बनाया जाता रहा। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने प्रशासन के इस रुख को गैर-लोकतांत्रिक बताते हुए इसकी तीखी निंदा की है और कहा कि जायज अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण आंदोलन में हिस्सेदारी करना हर नागरिक का अधिकार है और कोई इसे छीन नहीं सकता। माकपा ने गेवरा से यात्री ट्रेन न चलने देने के लिए एसईसीएल प्रबंधन पर रेल प्रशासन के साथ मिलीभगत का भी आरोप लगाया है। माकपा नेता प्रशांत झा कहना है कि कोरोना संकट की आड़ में ये सब ट्रेनें मात्र इसलिए बंद कर दी गई है कि कोल परिवहन के लिए रास्ता साफ रहे। आम जनता को यह मंजूर नहीं है। प्रशासन को इस क्षेत्र से राजस्व वसूलने पर ही नहीं, नागरिकों की बुनियादी सुविधाओं की ओर भी ध्यान देना होगा, वरना आंदोलन तेज किया जाएगा। आज जैसे ही मालगाड़ी रोकने के लिए इस क्षेत्र के नागरिक रैली बनाकर निकले, पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारियों द्वारा उन्हें इमलीछापर में रोक लिया गया, जिसके बाद आंदोलनकारी सड़क जाम कर बैठ गए और जोरदार नारेबाजी करने लगे। गेवरा से ट्रेनें न चलने के लिए रेल प्रशासन द्वारा कल राज्य सरकार को जिम्मेदार बताने के बाद आज वह बैकफुट पर दिखी। राज्य सरकार के जिम्मेदार अधिकारियों को उसने सूचित किया कि 15 दिनों के अंदर वह इस मांग पर सकारात्मक कार्यवाही करेगा। रेल प्रशासन के इस रुख से आंदोलनकारी नागरिकों और माकपा नेताओं को सूचित करने के बाद उनके उग्र तेवरों में नरमी आई, लेकिन उन्होंने इसे लिखित रूप में देने को कहा। इसके बाद नागरिकों के गुस्से को शांत करने के लिए जिला प्रशासन की ओर से कोरबा तहसीलदार, दीपका नायब तहसीलदार और कोरबा रेलवे के एआरएम मनीष अग्रवाल को 15 दिन के अंदर ठोस निराकरण करने का लिखित आश्वासन देने के लिए बाध्य होना पड़ा। इस लिखित आश्वासन के बाद सबने मिलकर रेलवे ट्रैक को जाम करने की कार्रवाई को स्थगित करने का फैसला लिया। हिन्दुस्थान समाचार / हरीश तिवारी-hindusthansamachar.in