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निष्पक्ष दृष्टि से रचनाओं को देखना ही आलोचना

निष्पक्ष दृष्टि से रचनाओं को देखना ही आलोचना

ने कहा कि पल्लव आलोचना के लिए अधिकांशत: अच्छी लेकिन उपेक्षित रचना को चुनते हैं और व्यक्तिगत संबंध के निर्वाह के नाम पर किसी को भी अनावश्यक रियायत नहीं देते हुए पक्षपातरहित दृष्टि से रचनाओं को देखते हैं वास्तव में आलोचना यही है। उन्होंने कहा कि वह जमाना गया जब किसी एक दिग्गज आलोचक के कहने मात्रा से साहित्य की प्रमाणिकता तय हो जाती थी आज प्रत्येक व्यक्ति व आलोचक अपने नज़रिए से सोचना है और चीजों का मूल्य तय करता है पल्लव उसी लोकतांत्रिकता का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने ‘प्रयास’ की साहित्यिक गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि इस पुरस्कार के कारण देशभर के लोग चूरू
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