हरियाणा में हिंदी को निचली अदालतों में अनिवार्य करने के प्रावधान को उच्च न्यायालय में चुनौती
हरियाणा में हिंदी को निचली अदालतों में अनिवार्य करने के प्रावधान को उच्च न्यायालय में चुनौती
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हरियाणा में हिंदी को निचली अदालतों में अनिवार्य करने के प्रावधान को उच्च न्यायालय में चुनौती

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चंडीगढ़, 22 जून (हि.स.)। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने हरियाणा की सभी सिविल और आपराधिक निचली अदालतों में हिंदी की अनिवार्यता को लेकर हरियाणा सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के अधीनस्थ सभी सिविल और आपराधिक न्यायालय, राजस्व अदालतों से लेकर ट्रिब्यूनल में हरियाणा राजभाषा (संशोधन) अधिनियम-2020 को चुनौती दी है। अधिनियम के तहत सभी अदालतों में हिंदी का उपयोग अनिवार्य तौर पर लागू किया गया है। उच्च न्यायालय में दायर याचिका में याचिकाकर्ता ने दलील दी है कि इस तरह की अधिसूचना को लागू करना उद्देश्य का उद्देश्य स्पष्ट नहीं है। याचिकाकर्ता के मुताबिक अधिसूचना भेदभाव पूर्ण है और भारत के संविधान की धारा 19 (1) (जी) का उल्लंघन करती है। अधिवक्ता अधिनियम-1961 की धारा 30 में उल्लेख है कि अधिवक्ता पूरे भारत में अभ्यास करने का अधिकार रखता है, लेकिन इस संशोधन के बाद गैर हिंदी भाषी वकील इससे प्रभावित हो सकते है। याचिका में यह भी दलील दी गई कि कुछ वकील हिंदी में बहस करने में सक्षम नहीं हो सकते क्योंकि सभी लॉ कॉलेज अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाते हैं और कानूनी शब्दावली का हिंदी संस्करण ज्ञात नहीं है। कानून की अधिकतर जजमेंट और पुस्तक हिंदी में उपलब्ध नहीं है। याची ने कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए दलील दी कि जब कानून की पढ़ाई अंग्रेजी में करेंगे तो बहस हिंदी में कैसे होगी। हिन्दुस्थान समाचार/वेदपाल-hindusthansamachar.in