फिल्म 'मसान' के पांच साल होने पर विक्की कौशल और दृश्यम फिल्म्स ने किया याद
फिल्म 'मसान' के पांच साल होने पर विक्की कौशल और दृश्यम फिल्म्स ने किया याद
मनोरंजन

फिल्म 'मसान' के पांच साल होने पर विक्की कौशल और दृश्यम फिल्म्स ने किया याद

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फिल्म 'मसान' के रिलीज को पांच साल पूरे हो गए हैं। नीरज घेवान द्वारा निर्देशित यह फिल्म 24 जुलाई, 2015 को रिलीज हुई थी। फिल्म में विक्की कौशल, रिचा चड्ढा, संजय मिश्रा, श्वेता त्रिपाठी और विनीत कुमार मुख्य भूमिका में थे। अभिनेता विक्की कौशल ने फिल्म के पांच साल पूरे होने पर इंस्टाग्राम पर कई तस्वीरें साझा की हैं। इस फिल्म से ही अभिनेता विक्की कौशल को पहचान मिली थी। विक्की कौशल ने इंस्टाग्राम पर तस्वीर साझा कर कैप्शन में कुछ लिखा नहीं, बल्कि पांच गुब्बारे शेयर किए हैं। विक्की कौशल इन दिनों सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं। अभिनेता ने जो तस्वीरें शेयर की है, उसमें से एक तस्वीर में अभिनेता को एक श्मशान घाट पर काम करते दिखाया गया है, जहां वह अंतिम संस्कार की चिताओं को जलाते नजर आ रहे हैं। अन्य तस्वीरों में फिल्म के अन्य कलाकार ऋचा चड्डा, संजय मिश्रा, श्वेता त्रिपाठी, पंकज त्रिपाठी और निर्देशक नीरज घेवान हैं। वहीं श्वेता ने भी एक विशेष पोस्ट शेयर किया है। उन्होंने अपने सह-कलाकारों के साथ अनमोल क्षणों को साझा करते हुए लिखा कि इस दिन, 5 साल पहले। वहीं इस फिल्म को प्रोड्यूस कर चुके दृश्यम फिल्म्स के मनीष मुंद्रा ने ट्विटर पर लिखा-'मसान एक यात्रा का हिस्सा रहा है.... जो अभी भी जारी है।' दृश्यम फिल्म्स ने फिल्म 'मसान' के पांच साल पूरे होने पर ट्विटर पर एक वीडियो शेयर कर लिखा-'कान्स में इमोशनल स्टैंडिंग ओवेशन से लेकर सबसे पसंदीदा फिल्म होने तक, मसान की यात्रा वास्तव में विशेष रही है। फिल्म को उन तरीकों से अपनाने के लिए धन्यवाद, जिनकी हमने कल्पना नहीं की थी। मसान के पांच साल पूरे।' फिल्म मसान का प्रीमियर कान्स में हुआ था, जहां इस फिल्म को सम्मानित किया गया था। 'मसान' नीरज घेवान की पहली फिल्म थी। 'मसान' की कहानी बनारस के घाटों पर रची-बसी है। इस फिल्म में एक छोटे से कस्बे के चार लोगों की कहानियां दिखाई गई हैं। फिल्म में बनारस के दो अलग-अलग कहानी को दिखाया गया है। पहली कहानी देवी (रिचा चड्डा) की है जो अपने साथी विद्यार्थी पीयूष के साथ एक होटल में जाती है। जहां पुलिस उसे रेड मे पकड़ लेती है। इसके बाद पीयूष अपनी कलाई काट कर आत्महत्या कर लेता है। देवी पर पुलिस जबर्दस्ती गुनाह कबूल कराती है। इसके बाद पुलिस इस बात को दबाने के लिए उसके पिता विद्याधर पाठक से एक बड़ी रकम रिश्वत के तौर पर मांगती है। वहीं दूसरी कहानी श्मशान घाट में काम करने वाले दीपक (विक्की कौशल) की है, जो निचले वर्ग का है। उसे मृत शरीर को जलाने और क्रिया कर्म का काम से नफरत है और इससे छुटकारा पाना चाहता है। एक दिन उसकी मुलाकात एक उच्च वर्ग की लड़की शालू गुप्ता (श्वेता त्रिपाठी) से होती है। वह दोनों एक दूसरे से प्यार करने लगते हैं। उनका अलग जातियों से होना पारिवारिक और सामाजिक झगड़ों को जन्म देता है। फिल्म को दुनिया भर से सराहना मिली थी। फिल्म के लिए नीरज घेवान को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। हिन्दुस्थान समाचार/मोनिका शेखर-hindusthansamachar.in