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सुख धन से नहीं धर्म से प्राप्त होता हैः आर्यिका विभाश्री

सुख धन से नहीं धर्म से प्राप्त होता हैः आर्यिका विभाश्री

भिंड। नईदुनिया न्यूजप्राणी अभाव के सद्भाव की प्राप्ति को ही सुख कहते हैं। संसार में सुख धन से नहीं धर्म से प्राप्त होता है। मनुष्य जीवन में सुख की तलाश में माया के पीछे दौड़ता है परंतु वह भूल जाता है कि सच्चा सुख धन से नहीं खरीदा जा सकता। इसके लिए व्यक्ति को धर्म का मार्ग अपनाना होगा। यह प्रवचन शहर के पुस्तक बाजार स्थित परेड जैन मंदिर में आर्यिका विभाश्री माताजी ने कही। माताजी ने अपने प्रवचनों में सच्चे सुख की परिभाषा बताते हुए कहा कि अंधे व्यक्ति से पूछा जाए कि तुम्हारी इच्छा क्या है तो वह कहेगा कि उसे आंखों की रोशनी प्राप्त हो जाए तो सुखी हो जाएगा। परंतु वह भूल जाता है कि
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