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क्राइम

फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा, दो भाईयों समेत आठ आरोपित गिरफ्तार

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नई दिल्ली, 08 अप्रैल (हि.स.)। बाहरी जिला की स्पेशल स्टाफ ने नांगलोई में पिछले एक साल से चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा किया है। पुलिस ने कॉल सेंटर चलाने वाले दो भाईयों समेत आठ आरोपितों को गिरफ्तार किया है। जिसमें छह महिलाएं शामिल है। कॉल सेंटर से ऑनलाइन और घर पर काम दिलाने का झांसा देकर ठगी को अंजाम दिया जा रहा था। पुलिस ने इनके कब्जे से मोबाइल फोन, सिम, लैपटॉप और अन्य सामान बरामद किए हैं। पुलिस आरोपित भाईयों से पूछताछ कर जांच में जुटी है। डीसीपी परविंदर सिंह ने बताया कि छह अप्रैल को जिले की स्पेशल स्टाफ को नांगलोई में एक फर्जी कॉल सेंटर चलने की जानकारी मिली। एएसआई ऋषिकेश के नेतृत्व में पुलिस टीम ने मेट्रो बाजार इलाके में एक मकान पर दबिश दी। जहां कुछ महिलाएं फोन पर बात कर रही थी। जो पुलिस टीम को देखकर सकपका गई। पुलिस ने मौके से आठ फोन, एक लैपटॉप, एक डेस्कटॉप, 20 सिमकार्ड और दस रजिस्टर बरामद किए। जांच में पता चला कि कॉल सेंटर फर्जी है, जिसे नांगलोई निवासी अजीम अली अपने भाई अफजाल मिर्जा के साथ मिलकर चला रहे थे। पुलिस ने दोनों भाई और वहां बतौर टेली कॉलर काम कर रही छह महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया। महिला की पहचान मुबारकपुर डबास निवासी पूनम शर्मा, कराला गांव निवासी भारती, किरारी सुलेमाननगर निवासी नेहा, सुल्तानपुरी निवासी हर्षिता, खुशबू और हिमांशी के रूप में हुई। पूनम के पास से मिले फोन में ठगी के लिए बनाए गए मैसेज मिले। मैसेज को लोगों के व्हाट्सएप और ईमेल पर भेजे जाते थे। जिसमें ऑनलाइन काम और घर पर बैठे काम का अवसर देने की बात लिखी गई थी। हामी भरने पर पीडि़तों से रजिस्ट्रेशन व अन्य मदों में उनसे एक हजार से लेकर तीन हजार रुपये को बैंक खाते में ट्रांसफर करने के लिए कहा जाता था। पैसे मिलने के बाद पीडि़तों से दोबारा संपर्क नहीं किया जाता था। दो हजार रुपये प्रतिदिन कमाने का देते थे झांसा पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि करीब दो साल पहले उसने इस तरह का विज्ञापन समाचार पत्र में देखा था। जिसके बाद उनलोगों ने ऑनलाइन ठगी करने की योजना बनाई। जनवरी 2020 में उनलोगों ने कॉल सेंटर खोला। जिसमें छह महिला टेली कॉलर को भर्ती किया। पूछताछ में अजीम अली ने बताया कि उनलोगों ने रजिस्ट्रेशन और सत्यापन के लिए सिर्फ एक हजार से तीन हजार रुपये मांगते थे। उनका मानना था कि कम रकम होने की वजह से ठगी का शिकार व्यक्ति इसकी पुलिस में शिकायत नहीं करेंगे। टेली कॉलर के जरिए वह किसी भी व्यक्ति या फिर महिला को फोन लगाकर उन्हें घर बैठे प्रतिदिन दो हजार रुपये कमाने का प्रलोभन देते थे। अगर कोई व्यक्ति इसके लिए राजी हो जाता था तो उनसे सत्यापन या फिर रजिस्ट्रेशन के नाम पर एक से तीन हजार रुपये की मांग करते थे। खाते में रुपये आने के बाद उनसे संपर्क नहीं करते थे। जांच में पता चला है कि आरोपी एक दिन में चार से पांच लोगों से ठगी का शिकार बनाते थे। पुलिस आरोपितों के रजिस्टर और बैंक खातों की जांच कर पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपितों ने अब तक कितने लोगों से ठगी की है। हिन्दुस्थान समाचार/अश्वनी