दिव्यांगजन ने कमजोरी को बनाया ताकत,कोरोना काल मे मुश्किलों से जूझ रहे लोगो को बना रहा आत्मनिर्भर
दिव्यांगजन ने कमजोरी को बनाया ताकत,कोरोना काल मे मुश्किलों से जूझ रहे लोगो को बना रहा आत्मनिर्भर
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दिव्यांगजन ने कमजोरी को बनाया ताकत,कोरोना काल मे मुश्किलों से जूझ रहे लोगो को बना रहा आत्मनिर्भर

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मुंबई,01 अगस्त (हि. स.)।कहते है, कि अगर हौशलो में जान हो, तो बड़ी से बड़ी मुश्किलें भी उसके सामने दम तोड़ देती है। इस कहावत को एक बार फिर चरितार्थ कर दिखाया है, विनोद राउत ने जो खुद आंखों से देख नही सकते,लेकिन कोरोनाकाल मे लोगो को आत्मनिर्भर बनाने में जुटे हुए है। उनके इस कार्य की चौतरफा प्रशंशा हो रही है। कोरोना के बढ़ते संक्रमण की वजह से लोगों को बेहद मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। दिव्यांगजन भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। एक समय खुद काम की तलाश में संघर्ष करते दिव्यांग विनोद राउत ने अपनी कमजोरी को ताकत बनाया और दूसरे लोगों का सहारा बन गए। आज वह करीब 30 दिव्यांगों को रोजगार दे रहे हैं। खुद अपाहिज होते हुए भी दिव्यांगों को आत्मनिर्भर बनाने में जुटे हैं। कोरोना के संक्रमण के फैलने से पहले वह अपनी संस्था के माध्यम से लोगो को खाने का डिब्बा दिया करते थे। जिसमे कई दिव्यांगों को रोजगार मिलता था। कोरोना का खतरा बढ़ने के बाद उनका रोजाना जाने वाला खाने का डिब्बा बंद हो गया। जिसके बाद उन दिव्यांगजनो पर आर्थिक संकट मंडराने लगा। लेकिन राउत ने हार नही मानी और दिव्यांगों को मोमबत्ती, अगरबत्ती,कागज की प्लेट और रुई की बत्तियां बनाने के लिए प्रोत्साहित किया।जिससे आज उन सभी को रोजगार मिल रहा है। और इससे होने वाली आय से कुछ दिव्यांगजन तो बाकायदा अपने परिवार की जिम्मेदारी भी उठा रहे है। मन से निकाल दे बेचारगी विनोद राउत पिछले कई वर्षों से दिव्यांगजनों के हितों में कार्य कर रहे है। उन्होंने वंदे मातरम अंध अपंग सेवाभावी नामक एक संस्था बनाई है। संस्था के इस समय करीब 700 सदस्य है। राउत कहते है, कि दिव्यांगता मन से होती है। अगर मन से खुद के दिव्यांग होने की बेचारगी का भाव निकाल दें तो एक दिव्यांग भी अमूमन वह सब कुछ कर सकता है, जो एक सामान्य व्यक्ति। उन्होंने कहा कि प्रयास है, कि हजारो दिव्यांगजनो को प्रक्षितित कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए। ढाई किमी रोजाना चलते है, पैदल विनोद राउत के सामने कठिनाइयां तो कई आई लेकिन उन्होंने हिम्मत नही हारी। वह दातिवरी इलाके में रहते है। और रोजाना सेंटर तक आने के लिए ढाई किमी पैदल चलते है। उनका कहना है, कि दिव्यांगजनो को बिना आत्मनिर्भर बनाये उनकी समस्याएं खत्म नही होगी। दिव्यांगजनो का घर बसा दिया रोजगार राउत अब तक 28 दिव्यांगजनो का घर बसा कर उन्हें रोजगार देकर आत्मनिर्भर भी बना चुके है। जिससे आज उन लोगो की घर गृहस्थी एक सामान्य इंसान की तरह चल रही है। उनका कहना है, कि वह आंखों से भले ही नही देख सकते लेकिन मन की आंखों से लोगो के कष्ट नही देख सकते। हिन्दुस्थान समाचार/योगेंद्र/ राजबहादुर-hindusthansamachar.in