कई तरह के नशीले पदार्थों के बाद अब म्यांमार से हो रही अफीम के बीज की तस्करी

 कई तरह के नशीले पदार्थों के बाद अब म्यांमार से हो रही अफीम के बीज की तस्करी
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आइजोल/इंफाल, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। म्यांमार से ड्रग्स और बंदूकों की बड़े पैमाने पर तस्करी की घटनाएं आए दिन सामने आती रहती हैं। इस बीच अब असम राइफल्स के जवानों ने सीमा पार से भारी मात्रा में मिजोरम में अवैध रूप से लाए गए अफीम के बीज जब्त किए हैं। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। अफीम से जुड़ी नशीली ड्रग्स के उत्पादन के लिए कुछ पूर्वोत्तर राज्यों में अवैध रूप से अफीम की खेती की जाती है। असम राइफल्स के सूत्रों ने आईएएनएस को बताया कि एक गुप्त सूचना के आधार पर अर्धसैनिक बल के जवानों ने सीमा शुल्क अधिकारियों के साथ मिलकर भारत-म्यांमार सीमा पर चंफाई जिले के तलंगसम-त्याओ रोड से लगभग 19 लाख रुपये मूल्य के 140 बैग (बोरी) में रखे गए अफीम के बीज जब्त किए। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि अफीम के बीज की तस्करी मिजोरम के लिए चिंता का एक प्रमुख कारण है, खासकर भारत-म्यांमार सीमा पर। भारत में, एनडीपीएस नियम, 1985 के तहत केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो द्वारा जारी लाइसेंस के अलावा, नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के तहत अफीम पोस्त की खेती निषिद्ध है। पड़ोसी म्यांमार से अफीम के बीज की तस्करी हेरोइन, अफीम, पोपी स्ट्रा, गोलियां और कैप्सूल (याबा या मेथामफेटामाइन सहित), गांजा (मारिजुआना), मॉर्फिन, कफ सिरप की बोतलों सहित विभिन्न ड्रग्स के बड़े पैमाने पर अवैध व्यापार में शामिल एक नई वस्तु है। मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने हाल ही में उखरूल जिले के पेह (पाओई) गांव में अफीम के बागानों को नष्ट करने के ग्रामीणों के प्रयास की सराहना करते हुए 10 लाख रुपये के नकद इनाम की घोषणा की थी। अरुणाचल प्रदेश और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों से भी इसकी सूचना मिली थी। मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, असम राज्य नशीले पदार्थों के खतरे से जूझ रहे हैं और जंगलों को नष्ट करते हुए अफीम और गांजा (मारिजुआना) की खेती कर रहे हैं। अफीम और गांजा धीरे-धीरे एक प्रमुख नकदी फसल के रूप में उभर रहा है और लोगों का एक वर्ग आसानी से पैसे कमाने के लिए अवैध रूप से इनकी खेती कर रहा है। गांजा को भारत के दूसरे राज्यों में भी चोरी-छिपे ले जाया जा रहा है। वन अधिकारियों ने कहा कि इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट (आईएसएफआर) के अनुसार, पिछले दो दशकों के दौरान अधिकांश पूर्वोत्तर राज्यों ने वन क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा खो दिया है, क्योंकि विभिन्न नशीले पदार्थों की अवैध खेती बढ़ रही है। असम, मणिपुर और त्रिपुरा सरकारें, जिन्होंने राज्यों को नशा मुक्त बनाने के लिए नशीले पदार्थों के खिलाफ एक युद्ध छेड़ा था, वे भी पूर्वोत्तर क्षेत्र के माध्यम से भारत के अन्य हिस्सों में ड्रग्स की आपूर्ति को खत्म करने के लिए उत्सुक हैं। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि भारत में तस्करी की जाने वाली ड्रग्स पाकिस्तान से और पूर्वोत्तर राज्यों की सीमाओं से विशेष रूप से म्यांमार से आती हैं। नशीले पदार्थो के खतरे के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए, हाल ही में असम के कार्बी आंगलोंग, गोलाघाट, होजई और नगांव जिलों में 170 करोड़ रुपये की जब्त की गई ड्रग्स को सार्वजनिक रूप से जला दिया गया था। जब्त नशीले पदार्थों में मेथामफेटामाइन की गोलियां और विदेशी मूल की सिगरेट शामिल हैं। मेथामफेटामाइन टैबलेट, जिसे आमतौर पर याबा या पार्टी टैबलेट या डब्ल्यूवाई (वल्र्ड इज योर) के रूप में भी जाना जाता है, एक सिंथेटिक ड्रग है और लोगों के बीच विशेष रूप से युवाओं में उच्च खुराक वाली दवा के रूप में इसका दुरुपयोग किया जाता है। भारत के अलावा अन्य देशों में भी इस नशे की काफी मांग है। --आईएएनएस एकेके/एएनएम

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