फर्जी बेबसाइट बनाकर हजारों लोगों से ठगी
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फर्जी बेबसाइट बनाकर हजारों लोगों से ठगी

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नई दिल्ली, 05 नवम्बर (हि.स.)। स्वास्थ्य एवं जन कल्याण संस्थान नाम से फर्जी वेबसाइट बनाकर एक माह के दौरान करीब 27 हजार युवाओं से ठगी करने वाले गैंग का दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस संबंध में मास्टर माइंड समेत पाच लोगों को गिरफ्तार किया है। गैंग ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत दो फर्जी वेबसाइट( www.sajks.org, www.sakjs.com) बनाकर 13 हजार सरकारी नौकरियां निकाली। इसके लिए देशभर में करीब 15 लाख युवाओं को एसएमएस भेजे गए। लेकिन जल्दी वेबसाइट के फर्जी होने का पता चल गया। एक अभ्यर्थी की शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गैंग का मास्टर माइंड 12वीं कक्षा पास है और मुंडका में अपने पार्टनर के साथ ऑन लाइन एग्जाम का सेंटर चलाता है। पकड़े दो आरोपियों में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर व दूसरा सॉफ्टवेयर डिप्लोमा होल्डर है। स्पेशल सेल की साइबर क्राइम यूनिट के पुलिस उपायुक्त अनीश रॉय ने बताया कि कुछ दिनों पूर्व एक अभ्यर्थी ने पुलिस से सरकारी नौकरी के नाम पर ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि स्वास्थ्य एवं जन कल्याण संस्थान नामक फर्जी वेबसाइट बनाकर कुछ लोग युवाओं से ठगी कर रहे हैं। नौकरी के लिए आवेदन के लिए बकायदा वेबसाइट पर सरकारी लोगो का इस्तेमाल कर एलडीसी, यूडीसी, एंबुलेंस ड्राइवर व नर्स समेत अन्य पदों के लिए 13 हजार पोस्ट निकाली गई हैं। इसके लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों से 500/400 रुपये ऑन लाइन वेबसाइट पर गेटवे के जरिये लिये जा रहे हैं। सूचना के बाद पुलिस की टीम ने वेब साइट की जांच की तो दोनों ही वेबसाइट (www.sajks.org, www.sajks.com) फर्जी मिली। पुलिस ने तुरंत एक टीम का गठन कर मामले की जांच शुरू की। अभ्यर्थी जिस गेटवे के जरिये पैसे ट्रांसफर कर रहे थे उनकी जांच की गई। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि गेटवे से कुछ खाते जुड़े हैं, उन खातों से हिसार के कुछ एटीएम में रुपये निकाले जा रहे हैं। सूचना के बाद पुलिस ने हिसार में छापेमारी शुरू की। सबसे पहले टीम ने हिसार से गांव खाटकर, ऊचाना, जींद हरियाणा निवासी अमनदीप (27) को एटीएम से कैश निकालते समय रंगे हाथों गिरफ्तार किया। इसके बाद इसके बाद अलग-अलग इलाकों से खेड़ी बारखी, बरवाला, हिसार निवासी सॉफ्टवेयर इंजीनियर जोगिंदर सिंह (35), मास्टर माइंड सिसाई कालीराम, हांसी, हिसार निवासी रामधारी (50), अमनदीप कालोनी, कार्मी रोड, हिसार निवासी संदीप कुमार (32) और गांव जीता खेड़ी, पपोसा भिवानी निवासी सुरेंद्र (50) को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपियों के खातों में कुल 49 लाख रुपये बरामद होने के अलावा तीन लैपटॉप और सात मोबाइल बरामद हुए। गैंग ने महज एक माह के भीतर देशभर के करीब 27 हजार युवाओं से 1.09 करोड़ रुपये ठग लिये। ठगी के 60 लाख रुपये आरोपी आपस में बांटकर हज्म कर चुके हैं। पुलिस को दूसरे मास्टर माइंड विष्णु शर्मा की तलाश है। पुलिस की पूछताछ में मास्टर माइंड रामधारी ने बताया कि वह अपने पार्टनर विष्णु शर्मा के साथ मिलकर दिल्ली के मुंडका इलाके में एकलव्य नाम से ऑन लाइन टेस्ट का सेंटर चलाते हैं। कई निजी कंपनियां व सरकारी विभाग इनके सेंटर की सेवाएं लेते हैं। इन लोगों ने करीब 550 अभ्यर्थियों के टेस्ट कराने का इंतजाम किया हुआ है। टेस्ट कराने के दौरान दोनों को नौकरी के लिए टेस्ट देने वाले देशभर के हजारों युवाओं का डाटा मिल गया। वहीं से दोनों के दिमाग में फर्जीवाड़ा करने का आइडिया आया। अगस्त में रामधारी व विष्णु ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर जोगिंदर की मदद से बिल्कुल सरकारी वेबसाइट से मिलती जुलती दो वेबसाइट बनवाई। उस पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का लोगो इस्तेमाल किया गया। यहां तक उनका एड्रेस में .org, .com का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद वेबसाइट पर 13 हजार पदों रिक्तियों को निकाला गया। सभी पदों को ऐसा दिखाया गया जैसे सरकारी विज्ञापन में आता है। इसके बाद फीस भी जनरल और आरक्षित पदों के लिए अलग-अलग रखी गई। इससे अभ्यर्थियों के अलावा कई जॉब पोर्टल व मीडिया एजेंसियां भी धोखा खा गए। इन्होंने भी अपने यहां इन पदों की रिक्तियों के बारे में दिखाया या सूचना दी। वेबसाइट बनाने के बाद रामधारी व विष्णु ने देशभर के 15 लाख युवाओं को एसएमएस भेजे और अपनी वेबसाइट का लिंक दिया। इसके बाद करीब 27 हजार युवा इनके जाल में फंस गए। जोगिंदर ने दो वेबसाइट बनाई। संदीप इन दोनों वेबसाइट की देखरेख करता था। अमनदीप का काम ठगी की रकम को अलग-अलग एटीएम से निकालना था। वहीं सुरेंद्र सिंह के बैंक खातों और उसके मोबाइल का इस्तेमाल ठगी में किया गया। छानबीन के दौरान पुलिस को पता चला है कि मुख्य आरोपी रामधारी महज 12वीं कक्षा पास है। उसने भी पूरे फर्जीवाड़े के लिए फंड जुटाकर फर्जी वेबसाइट तैयार करवाई। इसमें 10वीं पास अमनदीप को शामिल किया। बाद में सॉफ्टवेयर इंजीनियर जोगिंदर व ग्रेजुएशन करने के बाद कंप्यूटर का डिप्लोमा करने वाले संदीप कुमार की मदद ली गई। सुरेंद्र पेशे से प्लंबर है। रामधारी को लगता था कि छोटी रकम ठगने से कोई उनके खिलाफ शिकायत नहीं करेगा। लेकिन एक माह के भीतर ही पुलिस ने उनका भांडा फोड़ दिया। पुलिस ने अपील की है कि अभ्यर्थी जब भी किसी पोस्ट के लिए अपलाई करें तो उसकी जांच अच्छी कर कर लें। हिन्दुस्थान समाचार/अश्वनी-hindusthansamachar.in