दो साल से अपनी पहचान छुपाकर रह रहे संदिग्ध बांग्लादेशी गिरफ्तार
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दो साल से अपनी पहचान छुपाकर रह रहे संदिग्ध बांग्लादेशी गिरफ्तार

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नई दिल्ली, 27 जुलाई (हि.स.)। राजधानी में दो साल से अपनी पहचान छुपाकर रह रहे संदिग्ध बांग्लादेशी युवक को राजौरी गार्डन पुलिस ने गिरफ्तार किया है। युवक बांग्लादेश के रहने वाले अपने एक सहयोगी के साथ मिलकर कबूतरबाजी में लिप्त था और फर्जी कागजात के जरिए बांग्लादेशी औैर नेपाली युवकों को यूरोपियन देशों व कनाडा भेजता था। पुलिस युवक की मदद करने वाले कैथल के एक कबूतरबाज व आरोपियों की मदद से विदेश जाने की कोशिश कर रहे युवक को भी गिरफ्तार किया है। जिला पुलिस उपायुक्त दीपक पुरोहित ने बताया कि आरोपियों की पहचान ढाका बांग्लादेश निवासी मोहम्मद रकीबुल हसन (37), कैथल हरियाणा निवासी राजेश(26) और अंकित (20) के रूप में हुई है। इनके कब्जे से तीन विभिन्न देशों के 8 पासपोर्ट, रुपये गिनती करने वाला मशीन, पेपर लेमिनेटर, नकली आधार कार्ड, इटालियन हाई कमीशन के फर्जी स्टाम्प, मोबाइल, और फर्जी रेंट एग्रीमेंट बरामद हुए हैं। स्वतंत्रता दिवस की सुरक्षा को लेकर संदिग्ध लोगों पर खुफिया नजर रखी जा रही है। विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय के अधिकारियों से पुलिस को सूचना मिली कि सुभाष नगर के एक मकान में कुछ बांग्लादेशी रहते हैं और संदिग्ध गतिविधि में लिप्त हैं। आतंकी गतिविधि को देखते हुए विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय व दिल्ली पुलिस के अधिकारियों की संयुक्त टीम ने उक्त मकान पर छापा मारा। थाना प्रभारी अनिल शर्मा के नेतृत्व में टीम ने बांग्लादेशी नागरिक रकीबुल हसन को गिरफ्ततार कर लिया। हालांकि आरोपी ने खुद को पश्चिम बंगाल का रहने वाला बताया और एक आधार कार्ड दिखाया। लेकिन तलाशी के दौरान उसके घर से उसका बांग्लादेशी पासपोर्ट मिल गया। उसने बताया कि वह अपने एक सहयोगी अरिफुल रहमान के साथ इस मकान में रहता है और कबूतरबाजी में शालिम है। पुलिस छानबीन करने के बाद उसके एक भारतीय सहयोगी कबूतरबाज कैथल निवासी राजेश और आरोपियों की मदद से विदेश जाने की कोशिश कर रहे अंकित को गिरफ्तार कर लिया। मोहम्मद रकीबुल हसन के कमरे से पुलिस को बांग्लादेशी, नेपाली और एक भारतीय पासपोर्ट मिले। पुलिस कबूतरबाजी में शामिल उसके अन्य सहयोगियों की तलाश कर रही है। बांग्लादेश बॉर्डर से जाता था अपने देश छानबीन में पता चला कि मोहम्मद रकीबुल हसन अपने सहयोगी के साथ वर्ष 2018 में टूरिस्ट वीजा पर भारत आया था। नवंबर 2018 में वीजा की वैधता खत्म होने के बाद से वह दिल्ली में रहने लगा। वह पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना के पते पर रोनी साहा के नाम से अपना एक आधार कार्ड बनवा लिया। वीजा की वैधता खत्म होने के बाद वह कबूतरबाजी के सिडिंकेट से जुड़ गया। इस दौरान वह बंग्लादेश बॉर्डर के रास्ते अपने देश जाता था। नेपाल और दिल्ली के रास्ते लोगों को भेजता था विदेश पूछताछ में पता चला है कि वह नेपाल और दिल्ली के रास्ते लोगों को कनाडा और यूरोपियन देश भेजता था। आरोपी के मुताबिक नेपाल के रास्ते लोगों को कनाडा भेजने में कोई दिक्कत नहीं होती थी वहीं यूरोपियन देश जाने वालों को दिल्ली से भेजता था। उसके मुताबिक वह लोगों को विदेश भेजने के एवज से १६ से २५ लाख रुपये लेता था। शुरूआती जांच के मुताबिक आरोपियों ने अब तक करीब दर्जन भर लोगों को विदेश भेजने की बात कबूल की है। पूछताछ में रकीबुल हसन ने खुलासा किया कि उनके सहयोगी थाईलैंड और मलेशिया से सेक्यूररी प्रेस ग्रेड पेपर का आयात करते थे और फिर कोलकाता में नकली वीजा को तैयार करते थे। उसने बताया कि वह बांग्लादेश और नेपाल से कबूतरबाजी करने वाले सिडिंकेट का हिस्सा हैं। हिन्दुस्थान समाचार/अश्वनी-hindusthansamachar.in