डेढ़ सौ वर्ष पुराने पेड़ के कटने पर ग्रामीणों में आक्रोश
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डेढ़ सौ वर्ष पुराने पेड़ के कटने पर ग्रामीणों में आक्रोश

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डेढ़ सौ वर्ष पुराने पेड़ के काटने पर दुखी है पूरा गांव व्यक्त कर रहे संवेदनाएं मुंबई,31 जुलाई (हि. स.)। ग्रामीणों के आंदोलन के बाद सांगली जिले में हाइवे विस्तारीकरण के दौरान मार्ग में बाधा बन रहे 400 वर्ष पुराने बरगद के वृक्ष को कटने से भले ही बचा लिया गया हो। लेकिन ठीक उसी समय डहाणू तालुका के वाकी के ग्रामीण भी गांव में स्थित करीब डेढ़ सौ वर्ष पुराने बरगद के एक पेड़ को बचाने के लिए आवाज उठा रहे थे। लेकिन उनकी एक नही सुनी गई और पेड़ को काट दिया गया। पेड़ के कटने के बाद ग्रामीण काफी व्यथित है। और वह इसे पेड़ की कथित तौर पर हत्या बता रहे है। मुंबई-दिल्ली औद्योगिक रेल कॉरिडोर के सर्वेक्षण में बरगद का पेड़ रेल पटरियों के पास आ रहा था। जिसके बाद पेड़ को काटे जाने का निर्णय हुआ। ग्रामीणों का कहना है, की ब्रिटिश इस पेड़ के नीचे न्यायालय चलाते थे। और आदिवासियों के बीच के विवादों का निपटारा करते थे। लोग पेड़ काटे जाने की घोर निंदा कर रहे हैं। उनका कहना है कि अपने हितों के लिए पेड़ की हत्या करना गलत है। बरगद के पेड़ में ग्रामीणों की थी श्रद्धा बरगद के पेड़ काटे जाने का विरोध कर रहे ग्रामीण सुधाकर राउत ने कहा कि ग्रामीण पेड़ में भगवान गणेश का निवास मानते थे और पिछले कई वर्षों से यहां पर गणेश मूर्ति की स्थापना कर गणेश उत्सव मनाया करते थे। राउत ने कहा कि हमारे पूर्वज कहा करते थे कि पेड़ में श्रद्धा को देखते हुए उस समय ब्रिटिश शासन से ग्रामीणों ने पेड़ खरीद लिया था। इसी लिए पेड़ को काटने का विरोध हो रहा था। लेकिन पुलिस का डर दिखाकर विरोध को दबा कर पेड़ को काट दिया गया। जिससे हम व्यथित है। हिन्दुस्थान समाचार/योगेंद्र/ राजबहादुर-hindusthansamachar.in