जान हथेली पर रख कर नदी पार करते हैं ग्रामीण
जान हथेली पर रख कर नदी पार करते हैं ग्रामीण
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जान हथेली पर रख कर नदी पार करते हैं ग्रामीण

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मुंबई,31 जुलाई (हि. स.)। पालघर में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की उपेक्षा से आजादी के वर्षों बाद भी जनजातीय क्षेत्रो में रहने वाले गरीब आदिवासी उपेक्षित व बदहाल जीवन जी रहे है। जबकि सरकारे इन क्षेत्रों में विकास के तमाम दावे करती रही है। वाड़ा तालुका जनजातीय बहुल क्षेत्र है। तालुका मुख्यालय से करीब 40 किमी की दूरी पर आखाडा ग्रामपंचायत के तहत आने वाला भगत पाड़ा गांव पिंजाली नदी के किनारे बसा हुआ है। गांव में करीब 200 लोग रहते है। गांव के आस-पास न तो स्कूल है न अस्पताल है। गांव के लोगों को नदी पार करने के लिए आज तक पुल की सुविधा तक नहीं मिल पाई है। ग्रामीण बरसात के दिनों में राशन, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए जान हथेली पर रख कर नदी पार करने को मजबूर होते हैं। नदी पर पुल और सड़क बनाने की मांग वर्षों से की जा रही है, लेकिन समस्या जस की तस बनी है। बारिश में कट जाता है, गांव का संपर्क ग्रामीणों ने बताया कि बारिश में नदी में जलस्तर बढ़ने के बाद गांव का चार महीने तक अन्य क्षेत्रों से संपर्क कट जाता है। जिससे ग्रामीणों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। बारिश में कोई बीमार हो जाता है, तो मरीज को डोली के सहारे नदी पार करके 17 किमी दूर परली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाना पड़ता है। ऐसे में कभी-कभी मरीज की तबियत ज्यादा भी बिगड़ जाती है। संतोष बुधर, निवासी भगतपाडा कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए पूरा सरकारी अमला तैनात है। कोरोना के प्रभाव कम होते ही नदी पर पुल बनाने का प्रस्ताव तैयार कर भेजा जाएगा। हिन्दुस्थान समाचार/योगेंद्र/ राजबहादुर-hindusthansamachar.in