गया में छकरबंधा पहाड़ी है नक्सलियों का अभेद्य किला
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गया में छकरबंधा पहाड़ी है नक्सलियों का अभेद्य किला

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गया, 02 अगस्त (हि.स.) । छकरबंधा पहाड़ी प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा (माओवादी) के अभेद्य किले में तब्दील हो चुका है। बिहार पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल नक्सलियों के इस किले को ध्वस्त करने में अब तक कामयाब नही हो पाए हैं। इसके पीछे छकरबंधा पहाड़ी पर एक नहीं बल्कि हजारों की संख्या में लगाए गए आईईडी हैं । छकरबंधा पहाड़ी वन्य क्षेत्र संरक्षित क्षेत्र है।ऐसे में इस पहाड़ी की घने जंगल और गुफाएं कुख्यात नक्सली कमांडर और हथियारबंद दस्ता के लिए सुरक्षा कवच बने हुए हैं जिसे भेद पाने में बिहार पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बल अब तक विफल हैं। केंद्रीय अर्धसैनिक बल स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर नक्सलियों के इस किले को ध्वस्त करने के लिए घने जंगल में सड़क निर्माण करने की सोच को सरजमीं पर उतारने की कोशिश कर रहा है। लेकिन इसमें वन्य संरक्षित क्षेत्र का कानून बाधा बन रहा है। लेकिन पहले इस कानून को देश की सुरक्षा और अखंडता के मुद्दे पर कई बार शिथिल कर विकास योजनाओं को स्वीकृति मिली है जैसे अभी पिछले कुछ महीने पूर्व जम्मू-कश्मीर के बार्डर वाले इलाके में सड़क- पुल निर्माण योजना प्रमुख है। खुफिया एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक छकरबंधा पहाड़ी पर पूर्व-पश्चिम और उत्तर-दक्षिण सड़क निर्माण हो जाने से पुलिस और अर्धसैनिक बल को मात्र आधे घंटे के अंदर नक्सलियों के इस किले के सबसे सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचने में सफलता मिल जाएगी।साथ ही नक्सलियों के इस रेड कोरिडोर पर नक्सली गतिविधियों पर रोक लग जाएगी और झारखंड के सीमावर्ती गया और औरंगाबाद जिले में नक्सलियों को कोई सबसे सुरक्षित ठौर-ठिकाना नहीं बचेगा। सीआरपीएफ 159 के कमांडेंट डा.निशित कुमार ने बताया कि इस संबंध में राज्य सरकार के स्तर पर प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे जाने और वन मंत्रालय के अनापत्ति प्रमाण पत्र के बाद ही कोई निर्माण कार्य संभव है। अपर महानिदेशक, अभियान सुशील एम खोपडे ने बताया कि यह सही है कि छकरबंधा पहाड़ी और आसपास के इलाके में नक्सली सिमट कर रह गए हैं जहां से नक्सलियों को खदेड़ने के लिए बिहार पुलिस और अर्धसैनिक बल दिन-रात लगे हुए हैं। एडीजी, अभियान सुशील खोपडे ने कहा कि छकरबंधा पहाड़ी के घने जंगल में सड़क निर्माण का यदि कोई प्रस्ताव स्थानीय पुलिस और अर्धसैनिक बल की ओर से आता है तो उसे सरकार के संज्ञान में लाया जा सकता है। एडीजी खोपडे के अनुसार वन्य क्षेत्र संरक्षित इलाका होने के कारण छकरबंधा पहाड़ी पर कोई भी निर्माण चाहे वह सड़क या पुल-पुलिया हो, उसके लिए वन मंत्रालय का अनापत्ति प्रमाण पत्र आवश्यक है। हिंदुस्थान समाचार/ पंकज कुमार/विभाकर-hindusthansamachar.in