एचआरटीसी परिचालक प्रश्नपत्र वायरल मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन
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एचआरटीसी परिचालक प्रश्नपत्र वायरल मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन

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शिमला, 20 अक्टूबर (हि.स.)। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) में परिचालक भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र वायरल होने के मामले की जांच अब विशेष जांच दल (एसआईटी) करेगी। इसके लिए सात सदस्यीय एसआईटी का गठन कर दी गई है। मंगलवार को हिमाचल प्रदेश के पुलिस महानिदेशक संजय कंडू ने इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया है। एसआईटी का नेतृत्व डीआईजी सीआईडी विमल गुप्ता करेंगे। जांच करने वाली एसआईटी में चार एसपी समेत सात पुलिस अधिकारी शामिल हैं। इनमें कांगड़ा के एसपी विमुक्त रंजन, शिमला के एसपी मोहित चावला, साइबर अपराध के एसपी संदीप धवल, सीआईडी के एसपी संदीप भारद्वाज, सोलन के एएसपी. अशोक कुमार, हमीरपुर की डीएसपी रेणु कुमारी और मंडी के डीएसपी हेडक्वार्टर कर्ण सिंह गुलेरिया शामिल हैं। पुलिस महानिदेशक कुंडू ने बताया कि चूंकि इस प्रकरण की जांच का दायरा प्रदेशव्यापी है। ऐसे में अलग-अलग जिलों से एसआईटी के सदस्य नियुक्त किए गए हैं। उन्होंने कहा कि एसआईटी पूरे प्रकरण के पीछे संलिप्त किसी संगठित गिरोह व समूह की सक्रियता का पता लगाएगी और इस परीक्षा के सचांलन में किसी अनियमितता व चूक की भी जांच करेगी। उन्होंने कहा कि परिचालक भर्ती की लिखित परीक्षा का प्रश्नपत्र वायरल होने के मामले में अब तक तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसे लेकर शिमला व कांगड़ा जिलों में धोखाधड़ी के मामले दर्ज किए गए हैं। उल्लेखनीय है कि हिमाचल पथ परिवहन निगम में परिचालकों के 568 पदों को भरने के लिए गत रविवार (18 अक्टूबर) को सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक लिखित परीक्षा हुई थी। इसके लिए पूरे प्रदेश में 304 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। इसके लिए 60 हजार अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। परीक्षा का आयोजन हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर ने किया था। इस परीक्षा को लेकर बवाल तब मचा, जब इसका प्रश्नपत्र सोशल मीडिया में वायरल हो गया। पुलिस ने कांगड़ा और शिमला के परीक्षा केंद्रों से दो अभ्यर्थियों की पहचान की, जिन्हाेंने प्रश्नपत्र का फोटो अपने मोबाइल से खींचा और इसे वाट्सअप के माध्यम से आगे प्रेषित कर दिया। दोनों अभ्यर्थियों को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। इस परीक्षा को लेकर कर्मचारी चयन आयोग की तैयारियों पर भी सवाल उठे। दरअसल परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों के मोबाइल ले जाने पर पूर्ण पाबंदी रहती है। फिर भी दो अभ्यर्थी मोबाइल लेकर परीक्षा देने बैठ गए और यही प्रश्नपत्र के वायरल होने की वजह बनी। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भी प्रश्नपत्र वायरल होने की घटना के जांच के आदेश दिए थे। हिन्दुस्थान समाचार/उज्ज्वल-hindusthansamachar.in