छत्तीसगढ़ : पहाड़ी गांवों में शहद निकाल महिलाएं अर्जित कर रही आय

छत्तीसगढ़ : पहाड़ी गांवों में शहद निकाल महिलाएं अर्जित कर रही आय
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- बिहान से जुड़कर मधुमक्खी पालन का शुरू किया काम - महिलाओं के काम से जलडेगा और चाल्हा को हर्बल शहद वाले गांव की मिली पहचान रायपुर , 20 जून (हि.स.) । छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ विकासखंड मुख्यालय से 45 किलोमीटर पहाड़ो से घिरे सुदूर दुरूस्थ में स्थित ग्राम जलडेगा ग्राम पंचायत क्रिंधा व ग्राम पंचायत चाल्हा में बिहान से जूड़ी महिला स्व-सहायता समूह अपनी आजीविका के रूप में मधुमक्खी पालन कर रही है। प्रारंभ में बिहान योजना में जुडऩे से पूर्व प्राकृतिक शहद निकालते थे और ग्राम स्तर पर बिचौलियों के पास विक्रय करते थे, जिससे ज्यादा लाभ समूह को नहीं मिलता था। चूकि बिहान योजना में जुड़ने के बाद समूहों को जनपद पंचायत द्वारा अभिसरण के तहत उद्यानिकी विभाग के माध्यम से प्रशिक्षण देने के उपरान्त मधुमक्खी किट और मधुमक्खी कृमि दिया गया। समूहों द्वारा भिन्न-भिन्न विभाग को प्रति किलो ग्राम तीन सौ रुपये के दर पर जैसे उद्यानिकी विभाग, मनरेगा विभाग, जनपद पंचायत, बैंक आदि को बिक्री किया गया। शहद की मांग इतनी बढ़़ गई है कि ग्राम पंचायत चाल्हा, जलडेगा को हर्बल हनी बी गांव के नाम से जाना जाता है इसकी मांग अन्य ब्लाक और अन्य विभाग से नियमित रूप से प्राप्त हो रहा है। विक्रय हेतु समूह स्तर से भी प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। प्रत्येक महिला प्रति माह छह हजार रुपये प्राप्त कर रही है। आज के दिन महिलाएं अभिशरण के द्वारा न सिर्फ समाज और ग्रामीण क्षेत्र का नया चेहरा बनकर सामने आयी है बल्कि आजीविका को नया रूप देकर अपने परिवार को आर्थिक सुरक्षा भी प्रदान कर रही है। हिन्दुस्थान समाचार / गेवेन्द्र

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