रेलवे प्रत्येक आइसोलेशन कोच पर खर्च करता है 2 लाख रुपये, केंद्र ने कोविड फंड के लिए 620 करोड़ रुपये किये मंजूर : रेल मंत्रालय
रेलवे प्रत्येक आइसोलेशन कोच पर खर्च करता है 2 लाख रुपये, केंद्र ने कोविड फंड के लिए 620 करोड़ रुपये किये मंजूर : रेल मंत्रालय
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रेलवे प्रत्येक आइसोलेशन कोच पर खर्च करता है 2 लाख रुपये, केंद्र ने कोविड फंड के लिए 620 करोड़ रुपये किये मंजूर : रेल मंत्रालय

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नई दिल्ली, 26 जून (हि.स.)। रेलवे द्वारा तैयार किये गये कोविड-19 केयर सेंटर (आइसोलेशन कोच) में कोरोना मरीजों और स्टाफ के रख-रखाव, भोजन और लिनेन आदि पर एक आइसोलेशन कोच का अनुमानित खर्च लगभग 2 लाख रुपये है। केंद्र सरकार ने कोविड-19 फंड से रेलवे को 620 करोड रुपए मंजूर किए हैं। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष (सीआरबी) विनोद कुमार यादव ने शुक्रवार को डिजिटल प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से पत्रकारों से बातचीत में कहा, रेलवे ने कोरोना संकट के मद्देनजर राज्य सरकारों को स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग के लिए कुल 5,213 कोचों को आइसोलेशन कोच में बदल दिया है। हालांकि इस कार्य में कोई अधिक राशि खर्च नहीं हुई लेकिन कोचों में साफ-सफाई, स्टाफ को पीपीई किट, स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं को मुहैया कराने और स्टाफ व मरीजों आदि के लिए भोजन बिस्तर आदि की व्यवस्था के लिए अनुमानित खर्चा के लिए रेलवे का बजटीय अनुमान था, जिन्हें केंद्रीय कोविड फंड से मिल चुका है। उन्होंने कहा कि अब तक रेलवे मंत्रालय को फंड से 620 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। यादव ने बताया कि रेलवे द्वारा देशभर में तैनात किए गए 960 आइसोलेशन कोच में 17280 बेड की व्यवस्था है। इनमें दिल्ली में 503 और उत्तर प्रदेश में 270 कोच शामिल हैं। दिल्ली के शकूरबस्ती स्टेशन पर तैनात 50 कोचों में अब तक कुल 6 कोरोना संदिग्ध मरीजों को भर्ती कराया जा चुका है जिनमें से एक की छुट्टी भी हो गई है। वहीं उत्तर प्रदेश के मऊ स्टेशन पर तैनात आइसोलेशन कोच में 59 कोरोनावायरस ओं को भर्ती कराया गया जिनमें से 44 को डिस्चार्ज किया जा चुका है अब वहां 15 मरीज मौजूद हैं। वहीं शकूर बस्ती रेलवे स्टेशन पर तैनात आइसोलेशन कोच में स्वास्थ्य सुविधा का जिम्मा भारतीय सेना के डॉक्टर संभाल रहे हैं। भारतीय सेना ने शुक्रवार को बताया कि शकूरबस्ती रेलवे स्टेशन पर दिल्ली सरकार द्वारा स्थापित आइसोलेशन कोच में एक चिकित्सा अधिकारी, दो नर्सिंग सहायकों और एक एम्बुलेंस के साथ भारतीय सेना के चिकित्सकों की टीमों को कार्य करने के लिए तैनात किया गया है। गृह राज्यों से प्रवासी मजदूरों के अपनी कर्मभूमि की ओर लौटने को अर्थव्यवस्था के लिए सुखद संकेत बताते हुए यादव ने कहा कि यह देखकर खुशी हुई कि उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से बड़ी संख्या में मजदूर लौटने लगे हैं। वर्तमान में चल रही 230 स्पेशल ट्रेनों के अलावा और नई स्पेशल रेलगाड़ियां के परिचालन के संबंध में उन्होंने कहा कि हम विशेष ट्रेनों की भीड़भाड़ पर नजर रख रहे हैं। बहुत जल्द हम राज्यों की मांग और कोरोना की स्थिति के आधार पर और विशेष ट्रेनें शुरू करेंगे। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि कोरोनो की स्थिति को देखते हुए निकट भविष्य में सभी नियमित ट्रेनों को चलाना संभव नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि जब भी नई रेलगाड़ियां और बुकिंग शुरू की जाएगी पूर्व में इसकी सूचना दी जाएगी। श्रमिक स्पेशल रेलगाड़ियों के संबंध में उन्होंने बताया कि 25 जून तक 4594 रेलगाड़ियां चलाई गई। इनसे अब तक 62.8 लाख प्रवासी अपने गृह राज्य तक पहुंच चुके हैं। पर समय और समिति स्पेशल चलाने के संबंध में उन्होंने कहा कि यह कार्य लगभग पूरा हो चुका है फिर भी यदि कोई राज्य इसकी जरूरत समझता है तो वह अपनी मांग हमें भेज सकता है। हिन्दुस्थान समाचार/सुशील-hindusthansamachar.in