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भारत की व्यावसायिक क्षमता, बाजारों में स्वीडन का विश्वास बढ़ा

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नई दिल्ली, 12 नवंबर (आईएएनएस)। भारत और स्वीडन एक दशक से भी अधिक समय से राजनीतिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक संबंध साझा करते हैं। दोनों देश ज्ञान और अनुभव के आदान-प्रदान के साथ ही करीब आए हैं। भारत-स्वीडन नवाचार शिखर सम्मेलन संबंधों को मजबूत करने का एक आदर्श उदाहरण है। स्वीडिश कंपनियों ने भारतीय बाजारों की संभावनाओं में जबरदस्त दिलचस्पी दिखाई है। बिजनेस क्लाइमेट सर्वे (बीसीएस) के 13वें संस्करण में भी इसी तरह का आशावाद परिलक्षित हुआ, जिसने भारत में कारोबार करने में स्वीडिश कंपनियों के बढ़ते विश्वास को प्रदर्शित किया। इसके अतिरिक्त, हालिया बीसीएस रिपोर्ट ने भी स्वीडिश कंपनियों की रुचि और भारत में व्यापार करने की मंशा में पर्याप्त वृद्धि दिखाई है। बीएससी एक अत्यधिक विश्वसनीय वार्षिक सर्वेक्षण है, जो 2008 से स्वीडिश चैंबर ऑफ कॉमर्स, भारत द्वारा, भारत में स्वीडन के दूतावास, मुंबई में स्वीडन के महावाणिज्य दूतावास और बिजनेस स्वीडन के साथ आयोजित किया जाता है। यह भारत-स्वीडन व्यापार संबंधों की ताकत और कमजोरियों को समझने के लिए और लंबे समय से चली आ रही और उभरती बाधाओं को कैसे पहचाना, कम और हल किया जा सकता है, यह समझने के लिए हर साल किया जाता है। अब तक, 220 से अधिक स्वीडिश कंपनियां भारत में काम कर रही हैं, जो औद्योगिक उपकरण जैसे विभिन्न व्यावसायिक कार्यक्षेत्रों में सक्रिय रूप से योगदान दे रही हैं। अधिक कंपनियां अब पर्यावरण प्रौद्योगिकी और ऊर्जा क्षेत्र (जल, अपशिष्ट, एचवीएसी, आदि) में प्रवेश कर रही हैं। इन कंपनियों का भारतीय नौकरी बाजार पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ा है क्योंकि वे 200,000 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रूप से और अन्य 22 लाख को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार देती हैं। दोनों देशों के बीच संबंध पर टिप्पणी करते हुए, स्वीडन के विदेश व्यापार और नॉर्डिक मामलों के मंत्री अन्ना हॉलबर्ग ने कहा, महामारी के बावजूद स्वीडन और भारत का द्विपक्षीय सहयोग और भी मजबूत हुआ है। स्वीडिश कंपनियों ने बार-बार दिखाया है कि उनके पास लंबे समय से भारत के प्रति प्रतिबद्धता है। इसलिए, मुझे विशेष रूप से गर्व है कि 2021-22 के बिजनेस क्लाइमेट सर्वे (बीसीएस) को इतनी बड़ी प्रतिक्रिया मिली है और यह महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे कि हरित संक्रमण और कार्यबल में महिलाओं को आगे बढ़ाता है। इस साल की बीसीएस रिपोर्ट के लॉन्च पर, भारत में स्वीडन के राजदूत क्लास मोलिन ने टिप्पणी की, स्वीडिश कंपनियां भारत में फल-फूल रही हैं। यहां तक कि महामारी से उत्पन्न चुनौतियों के मद्देनजर, स्वीडिश कंपनियों ने निवेश, विस्तार और निवेश करना जारी रखा है। जैसा कि बिजनेस क्लाइमेट सर्वे में दशार्या गया है, यह देखना बेहद उत्साहजनक है कि इतनी सारी स्वीडिश कंपनियां आने वाले वर्षों में भारत में अपने निवेश को बढ़ाने की योजना बना रही हैं। इस साल के सर्वेक्षण, टुवर्डस सस्टेनेबल ग्रोथ शीर्षक से, स्वीडिश कंपनियों द्वारा भारत के साथ अपने दीर्घकालिक सहयोग में दिखाई गई प्रतिबद्धता को दर्शाता है। दिलचस्प बात यह है कि महामारी के देश के आर्थिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डालने के बावजूद, स्वीडिश कंपनियां भारत में अपने व्यापार और निवेश का विस्तार करने की उम्मीद कर रही हैं। इसके अलावा, सर्वेक्षण में नौकरी के अवसरों में वृद्धि और भारतीय कार्यबल में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को भी ध्यान में रखा गया है। ये दोनों देशों के बीच व्यापारिक सौदों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में से एक के रूप में भी काम करते हैं। भारत में व्यापार के अवसरों की खोज के मौजूदा रुझानों और प्रमुख एजेंडे के अनुरूप, भारत में स्वीडन के राजदूत क्लास मोलिन के नेतृत्व में छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल जल्द ही टाइम फॉर इंडिया नामक एक सप्ताह के रोड शो के लिए स्वीडन का दौरा करेगा। मोलिन के साथ आने वाले राजनयिकों में मुंबई में स्वीडन के महावाणिज्यदूत अन्ना लेकवॉल, व्यापार आयुक्त सेसिलिया ऑस्करसन, भारत में स्वीडिश चैंबर ऑफ कॉमर्स के महाप्रबंधक सारा लार्सन शामिल होंगे। प्रतिनिधिमंडल में स्वीडन और लातविया में भारत के राजदूत तन्मय लाल और स्वीडन इंडिया बिजनेस काउंसिल के अध्यक्ष हाकन किंगस्टेड शामिल होंगे। रोड शो स्टॉकहोम से शुरू होगा, उसके बाद लुलिया, गोटेबोर्ग, माल्मो और फिर स्टॉकहोम वापस जाएगा, जहां स्वीडन में भारतीय दूतावास भारत में निवेश पर एक अंतिम संगोष्ठी का आयोजन करेगा। --आईएएनएस आरएचए/आरजेएस