सन मोबिलिटी ने ऊर्जा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी विटोल से जुटाए 50 मिलियन डॉलर

 सन मोबिलिटी ने ऊर्जा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी विटोल से जुटाए 50 मिलियन डॉलर
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नई दिल्ली, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। ई-मोबिलिटी का लक्ष्य भारत में बड़े कदम उठाना है, इसी के तहत इलेक्ट्रिक वाहन समाधान फर्म सन मोबिलिटी ने बुधवार को घोषणा की है कि उसने विटोल द्वारा 50 मिलियन डॉलर जुटाए हैं, जो ऊर्जा के दुनिया के सबसे बड़े स्वतंत्र व्यापारियों में से एक है और शून्य-उत्सर्जन प्रौद्योगिकी में एक महत्वपूर्ण निवेशक है। इस नई फंडिंग के साथ, सन मोबिलिटी की योजना स्वैप पॉइंट्स की संख्या में वृद्धि करके, विभिन्न ओईएम (मूल उपकरण निमार्ताओं) के साथ साझेदारी करके, नए बिजनेस मॉडल पेश करने के लिए विभिन्न फ्लीट ऑपरेटरों और वितरकों के साथ सहयोग और अधिक जोड़कर प्रमुख शहरों में अपने पदचिह्न् का विस्तार करने की है। सह-संस्थापक और उपाध्यक्ष उदय खेमका ने एक बयान में कहा, विटोल 2025 तक सन मोबिलिटी के प्लेटफॉर्म पर 10 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों को जोड़ने के हमारे ²ष्टिकोण को मजबूत करेगा। साथ ही, अन्य उभरते देशों में मेक-इन-इंडिया ईवी प्रौद्योगिकी समाधान करने में मदद करेगा। कंपनी का लक्ष्य 2022 के अंत तक भारत में 500 स्वैप पॉइंट स्थापित करना है और स्वैप अनुभव को बढ़ाने और देश भर में बैटरी स्वैपिंग में अपने नेतृत्व को और मजबूत और विस्तारित करने के लिए नए उत्पादों को रोल आउट करने की योजना है। आर एंड्रयू डे, अक्षय ऊर्जा प्रमुख, विटोल,ने कहा, भारत में 160 मिलियन से अधिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों के साथ, सन मोबिलिटी के मॉडल में महत्वपूर्ण क्षमता है। एक लचीली और लागत प्रभावी पेशकश के माध्यम से भारत के वाहन बेड़े के सबसे बड़े हिस्से का विद्युतीकरण करने से शहरी प्रदूषण को कम करने की क्षमता है। सन मोबिलिटी के पास वर्तमान में 14 शहरों में 50 बैटरी-स्वैपिंग स्टेशनों का नेटवर्क है, मार्च 2021 तक 20 शहरों में 150 स्टेशनों तक इसे बढ़ाने की योजना है। इसने अपने गैस स्टेशनों पर बैटरी स्वैप मॉड्यूल तैनात करने के लिए इंडियन ऑयल कंपनी के साथ पहले ही साझेदारी की है। सीईईडब्ल्यू सेंटर फॉर एनर्जी फाइनेंस (सीईईडब्ल्यू-सीईएफ) के एक स्वतंत्र अध्ययन के अनुसार, यदि भारत अपने महत्वाकांक्षी 2030 लक्ष्य को पूरा करने के लिए निरंतर प्रगति करता है, तो भारत में ईवी बाजार 2030 तक 206 बिलियन डॉलर का अवसर होगा। इसके लिए वाहन उत्पादन और चाजिर्ंग इंफ्रास्ट्रक्च र में 180 अरब डॉलर से अधिक के संचयी निवेश की आवश्यकता होगी। --आईएएनएस एनपी/आरजेएस

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