चालू सत्र में 15 मई तक 3 करोड़ 3.6 लाख टन चीनी का उत्पादन: इस्‍मा

चालू सत्र में 15 मई तक 3 करोड़ 3.6 लाख टन चीनी का उत्पादन: इस्‍मा
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- इस्मा ने सरकार से किया चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य बढ़ाने की मांग नई दिल्ली, 17 मई (हि.स.)। देशभर की चीनी मिलों ने चालू विपणन सत्र 2020-21 में 15 मई तक 3 करोड़ 3.6 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है, जो एक वर्ष पहले की इसी अवधि में 2 करोड़ 65.3 लाख टन से 14.43 फीसदी ज्यादा है। चीनी उद्योग के प्रमुख संगठन भारतीय चीनी मिल संघ (इस्मा) ने सोमवार को चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य बढ़ाने का आग्रह सरकार से किया, ताकि चीनी मिलों को किसानों के बकाया गन्ना बिल चुकाने में मदद मिल सके। इस्मा ने एक बयान जारी कर बताया कि चीनी का दाम अपेक्षाकृत कम है, जिसकी वजह से मिलों की नकदी समस्या बढ़ी है। चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) आखिरी बार फरवरी, 2019 में तय किया गया था। हालांकि, गन्ना और चीनी उद्योग पर नीति आयोग के गठित टास्क फोर्स ने 2 रुपये प्रति किलो की एकमुश्त बढ़ोतरी की सिफारिश की है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक चीनी विपणन सत्र 2020-21 (अक्टूबर-सितंबर) में फरवरी तक गन्ने का बकाया 22,900 करोड़ रुपये था, जो विपणन सत्र 2019-20 के 19,200 करोड़ रुपये से ज्यादा है। इस्मा ने कहा कि पिछले कई महीनों से चीनी की एक्स-मिल कीमतें 31-33 रुपये प्रति किलो के दायरे में हैं। नकदी के स्तर को बनाए रखने के लिए मिलों पर कम कीमत पर चीनी बेचने का दबाव है। इससे इतना धन सृजित नहीं किया जा सकता, जिससे गन्ना किसानों का एफआरपी का भुगतान किया जा सके। इस्मा ने कहा कि चीनी मिलों ने मौजूदा विपणन सत्र 2020-21 में अप्रैल तक घरेलू बाजार में एक करोड़ 52.6 लाख टन चीनी की बिक्री की है, जबकि सरकार ने 1.47 करोड़ टन का कोटा निर्धारित किया है। चीनी मिलों ने अब तक 57 लाख टन चीनी निर्यात करने का अनुबंध किया है, जो कि चालू सत्र के लिए सरकार के निर्धारित 60 लाख टन निर्यात लक्ष्य का 95 फीसदी है। हालांकि, चालू सत्र में जनवरी-अप्रैल के दौरान 37 लाख टन चीनी का भौतिक रूप से देश से बाहर निर्यात किया गया है, जिसमें 7-8 लाख टन चीनी निर्यात की प्रक्रिया में है। चीनी उद्योग संगठन इस्मा ने चीनी उत्पादन के बारे में कहा कि देशभर की चीनी मिलों ने चालू विपणन सत्र 2020-21 में 15 मई, 2021 तक 3 करोड़ 3.6 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है, जो एक वर्ष पूर्व की इसी अवधि में 2 करोड़ 65.3 लाख टन से 14.43 फीसदी ज्यादा है। इस्मा ने कहा कि चीनी मिलों को चीनी के एमएसपी में बढ़ोतरी के संबंध में बहुप्रतीक्षित घोषणा की उम्मीद है, जिससे चीनी मिलों की आय में सुधार हो और किसानों का भुगतान किया जा सके। उल्लेखनीय है कि पिछले साल जून में खाद्य सचिव सुधांशु पांडे ने कहा था कि सरकार चीनी के एमएसपी को मौजूदा स्तर से बढ़ाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है लेकिन अभी तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। दरअसल, चीनी का एमएसपी, उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) के घटकों और सबसे कुशल मिलों की न्यूनतम रूपांतरण लागत को ध्यान में रखकर तय किया जाता है। हिन्दुस्थान समाचार/प्रजेश शंकर