पेट्रोलियम मंत्रालय ने बदले नियम, अब 80 प्रतिशत कोक स्थानीय उद्योग को देंगे रिफाइनरी

पेट्रोलियम मंत्रालय ने बदले नियम, अब 80 प्रतिशत कोक स्थानीय उद्योग को देंगे रिफाइनरी
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बेगूसराय, 07 जून (हि.स.)। पेट्रोलियम मंत्रालय ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए अपने नीति में बदलाव किया है। अब प्राथमिकता के आधार पर रिफाइनरी रॉ पेट्रोलियम कोक (आरपीसी) का 80 फीसदी हिस्सा स्थानीय उद्योगों को दिया जाएगा। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन का बरौनी रिफाइनरी इसके तहत अब स्थानीय उद्योग को काफी बढ़ावा देगा। सरकार के इस निर्णय का उद्योग भारती समेत तमाम औद्योगिक संगठनों ने स्वागत किया है। पिछले दिनों बरौनी एवं उसके आसपास के मध्यम उद्योग चलाने वाले उद्यमियों ने स्थानीय सांसद एवं केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह से मिलकर पेट्रोलियम उत्पाद कोक कोटा स्थानीय उद्योगों को देने की मांग की थी। इसके बाद केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से आरपीसी का कोटा बढ़ाने का आग्रह करते हुए पेट्रोलियम प्रोडक्ट से स्थानीय उद्योगों के बढ़ावा देने की नीति में परिवर्तन के साथ अवसरों के विकास की बात कही थी। गिरिराज सिंह ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि बेगूसराय के लिए यह अच्छी खबर है। इंडियन ऑयल द्वारा रॉ पेट्रोलियम कोक (आरपीसी) की बिक्री में स्थानीय इकाइयों को प्राथमिकता देने का एक बहुत ही स्वागत योग्य निर्णय लिया गया। बेगूसराय का विकास हमेशा पहली प्राथमिकता रहेगी।इंडियन ऑयल द्वारा रॉ पेट्रोलियम कोक की बिक्री में स्थानीय इकाइयों को प्राथमिकता सूक्ष्म, लघु और मध्यम उपक्रम अर्थव्यवस्था के विकास में गतिवर्धक हैं एवं देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तत्वावधान में इंडियन ऑयल ने 'आत्मनिर्भर भारत मिशन के अंतर्गत एमएसएमई इकाइयों को आत्मनिर्भर बनाने में मदद के लिए अपने बरौनी और अन्य रिफाइनरियों से रॉ पेट्रोलियम कोक जारी करने की नीति को और सरल बनाया। कॉर्पोरेशन की बरौनी और अन्य रिफाइनरियों के आसपास स्थित कैल्सीनेशन इकाइयों (ज्यादातर एमएसएमई) का समर्थन करने के लिए स्थानीय इकाइयों को एक जून से प्राथमिकता के आधार पर आरपीसी की आपूर्ति करने का निर्णय लिया है। संशोधित प्रक्रिया के तहत आरपीसी की दैनिक आपूर्ति पर स्थानीय इकाइयों का पहला अधिकार होगा। दैनिक रिलीज का 80 प्रतिशत स्थानीय इकाइयों के लिए आरक्षित किया जाएगा। इस नीति संशोधन से इकाइयों को बरौनी रिफाइनरी और अन्य आईओसी रिफाइनरियों से भी उत्पाद प्राप्त करने की सुविधा होगी। सिक्योरिटी और बयाना जमा राशि को समाप्त कर दिया गया है। इससे इन इकाइयों को अपने वित्तीय प्रबंधन करने में मदद मिलेगी। यह नीति ना केवल इकाइयों को अपने संयंत्रों के लिए कच्चे माल को बेहतर तरीके से प्राप्त करने में मदद करेगी, बल्कि इन इकाइयों के माध्यम से व्यापार से जुड़े हजारों परिवार के सदस्यों को पोषण भी प्रदान करेगी। आईओसी को भी आरपीसी की तेज निकासी से लाभ होगा। जो कि पेट्रोल, डीजल, विमानन ईंधन और राष्ट्र को ऊर्जा देने वाले अन्य ईंधन के अलावा घरों के लिए पर्याप्त एलपीजी के उत्पादन की सुविधा प्रदान करेगी। सांसद प्रतिनिधि अमरेंद्र कुमार अमर ने बताया कि पिछले दिनों स्थानीय उद्यमियों ने स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नीति में परिवर्तन का आग्रह किया था। हिन्दुस्थान समाचार/सुरेन्द्र/चंदा