गुयाना से कच्चे तेल का आयात शुरू, मध्य पूर्व का दबाव खत्म करने की तैयारी

गुयाना से कच्चे तेल का आयात शुरू, मध्य पूर्व का दबाव खत्म करने की तैयारी
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- अमेरिकी तेल उत्पादक देशों से क्रूड ऑयल का आयात करने की मिली इजाजत नई दिल्ली, 24 मार्च (हि.स.)। भारत सरकार ने निजी और संयुक्त क्षेत्र की कंपनियों को भी अमेरिकी तेल उत्पादक देशों से क्रूड ऑयल का आयात करने की इजाजत दे दी है। कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की खरीद के मामले में मध्य पूर्व पर निर्भरता कम करने के इरादे से भारत सरकार ने ये फैसला लिया है।इसके तहत भारत की ओर से ज्वायंट वेंचर एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी लिमिटेड (एचएमईएल) ने पहली बार दक्षिणी अमेरिकी देश गुयाना से कच्चे तेल का सौदा किया है। इस सौदे के तहत कच्चे तेल की पहली खेप 8 अप्रैल तक भारत में गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पहुंच सकती है।एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी लिमिटेड (एचएमईएल) सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम और स्टील किंग एलएन मित्तल का ज्वायंट वेंचर है। एचएमईएल की रिफाइनरी पंजाब के बठिंडा में है, जिसकी क्रूड ऑयल रिफाइनिंग क्षमता रोजाना 2.26 लाख बैरल है। मुंद्रा पोर्ट पर कच्चे तेल का कार्गो आने के बाद वहां से क्रूड को बठिंडा रिफाइनरी लाया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक तेल निर्यातक देशों (ओपेक कंट्रीज) और उनके सहयोगी संगठनों के कच्चे तेल के उत्पादन में लगातार कटौती करने के फैसले के कारण भारत सरकार ने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की सभी ऑयल रिफाइनिंग कंपनियों को मध्य पूर्व के देशों से होने वाले कच्चे तेल के आयात को चरणबद्ध तरीके से कम करने के लिए कहा है। ताकि मध्य पूर्व के देशों पर निर्भरता और उनके दबाव को कम किया जा सके। इसके साथ ही सरकार की ओर से भारतीय कंपनियों को अमेरिकी देशों से क्रूड का आयात बढ़ाने का संकेत भी दिया गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी कच्चा तेल (डब्लूटीआई क्रूड) की कीमत भी ब्रेंट क्रूड की तुलना में प्रति बैरल करीब तीन डॉलर कम है। इसके साथ ही अमेरिकी कच्चा तेल में सल्फर की मात्रा भी कम होती है। जिसकी वजह से उसकी रिफाइनिंग कॉस्ट भी घट जाती है। ऐसे में अगर ब्रेंट क्रूड की जगह अमेरिकी देशों से डब्लूटीआई क्रूड की खरीद को बढ़ावा दिया जाता है, तो इसका असर इंपोर्ट बिल और रिफानिंग कॉस्ट में कमी के रूप में भी नजर आने लगेगा।सूत्रों के मुताबिक भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर मध्य पूर्व से कच्चे तेल के आयात में कमी करने का कोई ऐलान नहीं किया है। पिछले एक साल के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार से कच्चे तेल के आयात के जितने भी सौदे हुए हैं, उनके आंकड़े इसी बात का संकेत देते हैं कि भारत क्रूड इंपोर्ट के मामले में मध्य पूर्व पर अपनी निर्भरता को न्यूनतम करने की कोशिश कर रहा है।अप्रैल 2020 और जनवरी 2021 के बीच भारत के कच्चा तेल के आयात में ओपेक कंट्रीज की हिस्सेदारी में बड़ी गिरावट आई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जनवरी महीने में सिर्फ सऊदी अरब से ही कच्चे तेल की खरीदारी 36 फीसदी गिर गई है, जबकि अमेरिकी देशों से क्रूड का आयात दोगुना से अधिक हो चुका है। सूत्रों का दावा है कि इंडियन ऑयल लिमिटेड ने मई में सऊदी अरब से कच्चे तेल की खरीद को 25 फीसदी तक घटाने की योजना बनाई है। आंकड़ों के मुताबिक भारत के क्रूड ऑयल इंपोर्ट में सऊदी अरब की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। भारत सऊदी अरब से अपने कुल ऑयल इंपोर्ट का 19 फीसदी कच्चा तेल खरीदता है। इसके अलावा मध्य पूर्व के दूसरे तेल उत्पादक देश और अमेरिकी तेल उत्पादक देशों से तेल जरूरत का बाकी कच्चा तेल खरीदा जाता है। हिन्दुस्थान समाचार/योगिता/सुनीत

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