विदेशी निवेशक एक बार फिर बिगाड़ सकते हैं शेयर बाजार की चाल

विदेशी निवेशक एक बार फिर बिगाड़ सकते हैं शेयर बाजार की चाल
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नई दिल्ली, 28 अप्रैल (हि.स.)। भारतीय शेयर बाजार में इस सप्ताह के तीनों कारोबारी दिनों में तेजी का रुख बना रहा है, लेकिन कोरोना संकट के कारण अप्रैल के महीने में विदेशी निवेशकों की ओर से रिकॉर्ड बिकवाली किए जाने की आशंका भी बन गई है। माना जा रहा है कि मार्च 2020 के बाद पहली बार अप्रैल 2021 में विदेशी निवेशक अभी तक की सबसे बड़ी बिकवाली कर सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो भारतीय शेयर बाजार में पिछले साल की तरह ही एक बार फिर भारी गिरावट हो सकती है। जिससे निवेशकों के लाखों करोड़ रुपये भी एक झटके में स्वाहा हो सकते हैं। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक 23 अप्रैल तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 110 करोड़ डॉलर के शेयरों की बिकवाली की है, जो मार्च 2020 के बाद अभी तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इसके पहले मार्च 2020 में कोरोना के संक्रमण पर काबू पाने के लिए जब पहली बार देशव्यापी लॉकडाउन लगाया गया था, उस वक्त विदेशी निवेशकों ने जमकर बिकवाली की थी और भारतीय शेयर बाजार से अपने पैसे निकाल लिए थे। धमीजा सिक्योरिटीज के सीईओ प्रेम कुमार धमीजा के मुताबिक विदेशी निवेशकों को निकट भविष्य में कोरोना के के कारण अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका डरा रही है। विदेशी निवेशक कोरोना की वजह से इकोनॉमिक रिकवरी और कंपनियों की कमाई पर पड़ने वाले प्रतिकूल असर की बात को लेकर भी असमंजस की स्थिति में हैं। विदेशी निवेशकों को इस बात का भी डर है कि पिछले 1 साल में बाजार में आई तेजी के दौरान उन्होंने अपना जो पैसा भारतीय शेयर बाजार में लगाया है, वो कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से डूब न जाए। इसके साथ ही विदेशी निवेशक इस बात को लेकर भी डरे हुए हैं कि जिस तरह से महाराष्ट्र में लॉकडाउन को 15 दिनों के लिए और दिल्ली में 1 हफ्ते के लिए बढ़ाया गया, वैसा ही सख्त कदम अन्य राज्यों में भी न उठा लिया जाए। अभी तक गोवा में 5 दिन का लॉकडाउन लगाया जा चुका है। इसी तरह राजस्थान और कर्नाटक में भी लॉकडाउन जैसी पाबंदी लागू है। जानकारों का कहना है कि लॉकडाउन जैसी सख्तियों के कारण उद्योग-धंधे और कारोबार तो ठप होते ही हैं, देश में सप्लाई चेन पर भी काफी बुरा असर पड़ता है। इस तरह की पाबंदियां अर्थव्यवस्था के लिए भी खतरा साबित हो सकती हैं। साथ ही इनकी वजह से विकास दर पर भी बुरा असर पड़ सकता है। माना जा रहा है कि इन वजहों के कारण ही विदेशी निवेशक समय रहते बिकवाली करके अपने पैसों की निकासी करने में लग गए हैं, ताकि किसी भी संभावित नुकसान की स्थिति से बचा जा सके। हिन्दुस्थान समाचार/योगिता/सुनीत