पटसन सड़न अनुसंधान में “क्राइजैफ सोना”पाउडर का शुरू हुआ प्रयोग
पटसन सड़न अनुसंधान में “क्राइजैफ सोना”पाउडर का शुरू हुआ प्रयोग
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पटसन सड़न अनुसंधान में “क्राइजैफ सोना”पाउडर का शुरू हुआ प्रयोग

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कोलकाता, 17 जुलाई (हि.स.)। केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान ने पटसन सड़न प्रक्रिया को सरल करने के लिए क्राइजैफ सोना पाउडर का इस्तेमाल शुरू किया है। इससे इस प्रक्रिया में न केवल तेजी आई है, बल्कि गुणवत्ता में भी सुधार होने का दावा किया जा रहा है। केंद्रीय पटसन एवं समवर्गीय रेशा अनुसंधान संस्थान (क्राइजैफ), बैरकपुर के निदेशक डॉ गौरांग कर ने बताया कि हाल ही में भाकृअनुप-केंद्रीय पटसन एवं समवर्गीय रेशा अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर के वैज्ञानिकों द्वारा पटसन सड़न अनुसंधान के क्षेत्र में एक नई सफलता हासिल की गई है, जिसमें उच्च थ्रूपुट जीनोम अनुक्रमण द्वारा पटसन सड़न में सहायक जीवाणु के जीनोम अनुक्रम को डिकोड किया है। उन्होंने बताया कि गहन जीनोमिक विश्लेषण में बेसिलस की तीन अलग-अलग प्रजातियों ने कंसोर्टियम उपभेदों का गठन किया। जीनोम अनुक्रमण भी पुष्टि करता है कि ये जीवाणु केवल पेक्टिन, हेमिसेलुलोज और अन्य गैर-सेल्युलोसिक सामग्री को नष्ट कर देता है और रेशा प्रदान करता है, जो बिलकुल भी हानिकारक नहीं है। जीवाणु उपभेद भी गैर विषैले होते हैं और इस प्रकार के सड़न प्रक्रिया के पश्चात पानी को फिर से सिंचाई के उद्देश्य के लिए सफलतापूर्वक उपयोग किया जा सकता है। दरअसल अनुक्रम डेटा एनआईएच, (यूएसए) के नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन डेटाबेस को प्रस्तुत किया गया है। भाकृअनुप-केंद्रीय पटसन एवं समवर्गीय रेशा अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर द्वारा विकसित “क्राइजैफ सोना” नामक माइक्रोबियल कंसोर्टिअम में इन रेटिंग जीवाणु को पहले से ही अपनाया गया था. इसकी लोकप्रियता के कारण, पिछले तीन वर्षों में, देश के विभिन्न पटसन उत्पादक राज्यों में 50,000 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करने वाले 3.6 लाख किसानों को 7 करोड़ रुपये का “क्राइजैफ सोना” (1428 मीट्रिक टन) बेचा गया। किसानों को पटसन रेशे की गुणवत्ता में सुधार करने और बेहतर सड़न तकनोक के माध्यम से इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लाने के लिए इस उत्पाद का उपयोग करना चाहिए. “क्राइजैफ सोना” के प्रयोग से रेशे की गुणवत्ता में 2-3 श्रेणी का सुधार होता है, सड़न की अवधि को 6-7 दिन कम करता है और पानी की आवश्यकता को भी 75 फीसदी तक कम करता है। पटसन सड़न प्रक्रिया में “क्राइजैफ सोना”पाउडर का प्रयोग संस्थान के निदेशक ने वैज्ञानिकों की टीम को बधाई देते हुए, कहा कि इस तरह की सफलता सबसे पहले पटसन में है और यह विश्वास है कि इन सफलता के निष्कर्षों से वैज्ञानिकों को बेहतर माइक्रोबियल रेटिंग फॉर्म्युलेशन में और सुधार करने में मदद मिलेगी। पेक्टिन, हेमिसेलुलोज और अन्य गैर-सेल्युलोसिक सामग्री को नष्ट करने के लिए जीन को बढ़ाया जा सकता है, ताकि रेटिंग सक्षमता बढ़ायी जा सके और कम से कम पानी के उपयोग के साथ रेटिंग अवधि को कम किया जा सके। इस प्रकार, यह सफलता उच्च गुणवत्ता वाले पटसन रेशे का उत्पादन करने की सुविधा प्रदान करेगी जिससे कृषक समुदायों को बाजार में उच्च आय प्रदान करवायेगी। हिन्दुस्थान समाचार/ओम प्रकाश-hindusthansamachar.in