एनडीडीबी और डेयरी के साथ मिलकर बरौनी रिफाइनरी शुरू करेगी खाद प्रबंधन परियोजना
एनडीडीबी और डेयरी के साथ मिलकर बरौनी रिफाइनरी शुरू करेगी खाद प्रबंधन परियोजना
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एनडीडीबी और डेयरी के साथ मिलकर बरौनी रिफाइनरी शुरू करेगी खाद प्रबंधन परियोजना

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खाद प्रबंधन परियोजना के लिए रिफाइनरी ने एनडीडीबी एवं डेयरी के साथ किया त्रिपक्षीय समझौता बेगूसराय, 22 सितम्बर (हि.स.)। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन की बरौनी रिफाइनरी, नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) एवं डेयरी के साथ मिलकर बेगूसराय में खाद प्रबंधन परियोजना के लिए एक बड़ी पहल किया है। इसके लिए त्रिपक्षीय समझौता पूरा कर लिया गया है। परियोजना के तहत 50 बायोगैस संयंत्रों की स्थापना पर बरौनी रिफाइनरी द्वारा एक करोड़ 12 लाख 50 हजार (112.50 लाख) रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है। परियोजना पूरा हो जाने से बेगूसराय पारंपरिक ऊर्जा से भी समृद्ध हो जाएगा। रिफाइनरी के कॉर्पोरेट संचार प्रबंधक अंकिता श्रीवास्तव ने मंगलवार को बताया कि पर्यावरण दायित्व के अंतर्गत बरौनी रिफाइनरी ने बेगूसराय जिले के बछवाड़ा क्षेत्र में खाद प्रबंधन परियोजना को निष्पादित करने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी), आणंद और बरौनी डेयरी के साथ त्रिपक्षीय एमओयू पर हस्ताक्षर किया है। कार्यपालक निदेशक एवं रिफाइनरी प्रमुख शुक्ला मिस्त्री, मुख्य महाप्रबंधक (परियोजना) बी.बी.बरुआ, मुख्य महाप्रबंधक (टीएस एवं एचएसई) आर.के. झा, मुख्य महाप्रबंधक (तकनीकी) ए.के. तिवारी समेत अन्य महाप्रबंधक की उपस्थिति में ऑनलाइन विडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान बरौनी रिफाइनरी के महाप्रबंधक (मानव संसाधन) टी.के. बिसई, बरौनी डेयरी के प्रबंध निदेशक एस आर मिश्रा और एनडीडीबी के कार्यपालक निदेशक मीनेश शाह ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस परियोजना के तहत बरौनी दुग्ध संघ द्वारा 50 बायोगैस संयंत्रों की स्थापना की जाएगी, जो क्लस्टर आधारित खाद मूल्य श्रृंखला स्थापित करने में मदद करेगी। ये सभी सुविधाएं बरौनी डेयरी से जुड़ी 50 महिला डेयरी किसानों की मदद से बनाई जाएंगी। बरौनी डेयरी क्षेत्र कार्यान्वयन एजेंसी होगी और एनडीडीबी के दिशानिर्देशों के अनुसार कार्य करेगी। इस परियोजना से संभावित लाभों में मिट्टी की उर्वरता में सुधार, चयनित डेयरी किसानों के लिए हरित और कम लागत वाला ईंधन उपलब्ध कराना, किसानों को जैविक खाद का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना और रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करना, दुग्ध उत्पादकों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाना और सामान्य संसाधनों को साझा करके किसानों को अधिकतम लाभ पहुंचाना है। हिन्दुस्थान समाचार/सुरेन्द्र/चंदा-hindusthansamachar.in