बिलासपुर : सरकारी अस्पताल की लापरवाही, महिला की मौत के पांच दिन बाद तक पति को बताते रहे अभी इलाज चल रहा है

बिलासपुर : सरकारी अस्पताल की लापरवाही, महिला की मौत के पांच दिन बाद तक पति को बताते रहे अभी इलाज चल रहा है
bilaspur-negligence-of-government-hospital-till-five-days-after-the-death-of-the-woman-she-kept-telling-her-husband-is-still-undergoing-treatment

बिलासपुर/रायपुर, 29 अप्रैल (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के जिला सरकारी अस्पताल में आपराधिक लापरवाही का मामला सामने आया है। महिला की मौत के पांच दिन बाद तक पति को बताते रहे कि अभी इलाज चल रहा है। अब प्रबंधन द्वारा जाँच की बात कही जा रही है। बिलासपुर शहर के नजदीक महमंद गांव की महेशिया बाई निषाद को तबीयत खराब होने पर परिवार के लोगों ने बिलासपुर के जिला कोविड-19 अस्पताल में 24 अप्रैल को भर्ती किया था । इसके बाद से उस महिला के पति कमलेश निषाद रोज सुबह-शाम घंटों अस्पताल में मौजूद रहते थे। उसे अस्पताल में भर्ती उसकी पत्नी महेशिया बाई से मिलने या उसे नजर भर देखने की अनुमति तो कभी मिली नहीं। लिहाजा, महेशिया बाई का पति कमलेश निषाद डॉक्टरों से और अस्पताल के चिकित्सा कर्मियों से पूछता फिर रहा था कि उसकी पत्नी की हालत कैसी है। डॉक्टर बिना इस मामले पर गौर किए उसे सीधा बता देते थे कि उसकी पत्नी का इलाज चल रहा है। जानकारी के मुताबिक यह पूरा खेल 24 अप्रैल को महेशिया बाई निषाद के जिला अस्पताल में भर्ती होने से लेकर 28 अप्रैल की सुबह तक चलता रहा। महेशिया बाई के पति को डॉक्टरों के रवैये पर शक तो रोज होता था। लेकिन एक-एक दिन बीतने के साथ ही अपनी पत्नी महेशिया बाई निषाद के अस्पताल में चल रहे इलाज और डॉक्टरों के रवैए को लेकर कमलेश निषाद को काफी शक होने लगा। तब उन्होंने कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता और समाजसेवी, अभय नारायण राय से संपर्क किया। अभय नारायण राय भी महमंद गांव के ही हैं और वह कमलेश निषाद को अच्छे से पहचानते हैं। उसकी बात सुनकर अभय नारायण राय ने अस्पताल प्रबंधन से कहा कि आखिर महेशिया बाई है कहां..? श्री राय के सक्रिय होते ही जिला अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई और महेशिया बाई की खूब खोज-खबर की गई। तब महेशिया बाई तो नहीं मिली, लेकिन उसकी लाश, मर्च्युरी में होने का खुलासा हुआ। हंगामे के बाद डॉक्टरों ने अभय नारायण राय को बताया कि उक्त महिला को 24 अप्रैल को भर्ती किया गया था। 25 अप्रैल को ही उसकी मौत हो गई थी। यह सुनते ही महमंद गांव से पहुंचे लोगों ने अस्पताल में हो हंगामा शुरू कर दिया। डॉक्टरों के पास इस बात का कोई जवाब नहीं था कि जब महेशिया बाई निषाद की मौत भर्ती होने के एक दिन बाद ही 25 अप्रैल को हो चुकी थी। तब अपनी पत्नी का हाल-चाल जानने के लिए रोज डॉक्टरों से अस्पताल कर्मियों से मिलने , पूछने वाले कमलेश निषाद को इस बात की जानकारी क्यों नहीं दी गई..? बिना उसे बताए किसके कहने पर और किसने महेशिया बाई निषाद की लाश को एक लावारिस की तरह मर्च्यूरी में रख दिया और भूल गया। अब मामले में शिकायत होने पर जिला चिकित्सा अधिकारी जाँच की बात कह रहे है। हिन्दुस्थान समाचार /केशव शर्मा