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मैं सबकी हिम्मत थी, फिर कमजोर कैसे पड़ती

मैं सबकी हिम्मत थी, फिर कमजोर कैसे पड़ती

कैंसर से जूझते लोगों की मदद करते-करते कभी यह सोचा नहीं था कि खुद भी कभी इसकी गिरफ्त होगी। यह कहानी है आर्किटेक्ट वर्षा जैन की। एक दिन जब पता चला कि वे खुद भी उसी गंभीर बीमारी की चपेट में हैं तो वे शॉक्ड हो गईं लेकिन मुश्किल समय में परिवार सहारा बनकर खड़ा हुआ। बहन ने बहुत हिम्मत बंधाई ट्रीटमेंट की सभी स्टेज समझाई पति व बेटे ने भी खूब हिम्मत दी। वर्किंग वुमन होने से तत्कालीन बॉस ने भी उन्हें बहुत सहयोग किया। वे कहती हैं आठ माह के इलाज जिसमें ऑपरेशन कीमो थैरेपी रेडियेशन के बाद मैं आज फिर उसी उत्साह के साथ जीवन को जी रही हूं। इतना ही नहीं अब वे उन महिलाओं को सहयोग करती हैं जिन्हें
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