वर्ल्ड बैंक की तरह भारत का भी है NDB बैंक, आम आदमी को नहीं बल्कि देशों को देता है लोन

वर्ल्ड बैंक की तरह भारत का भी है NDB बैंक, आम आदमी को नहीं बल्कि देशों को देता है लोन
वर्ल्ड बैंक की तरह भारत का भी है NDB बैंक, आम आदमी को नहीं बल्कि देशों को देता है लोन

नई दिल्ली। हाल ही में संपन्न हुए पांच देशों के समूह ब्रिक्स के सालाना शिखर सम्मेलन में कोरोना काल के बीच आर्थिक हालातों को लेकर चर्चा हुई। इसी सम्मेलन के दौरान एक नाम उभर कर सामने आया। यह नाम था एनडीबी यानी न्यू डेवलपमेंट बैंक (New Development Bank)। पांच देशों के समूह ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका ने मिलकर एनडीबी बैंक की स्थापना की है।

भारत ने रखा था प्रस्ताव

ब्रिक्स देशों का चौथा सम्मेलन साल 2021 में भारत में आयोजित हो रहा था। उसी समय भारत की तरफ से प्रस्ताव रखा कि ब्रिक्स समूह का अपना बैंक (New Development Bank) होना चाहिए। 2 साल बाद वर्ष 2014 में छठे ब्रिक्स सम्मेलन में NDB की घोषणा कर दी गई। 2015 में सातवें ब्रिक्स सम्मेलन के वक्त इसकी स्थापना हुई।

चीन के शंघाई शहर में NDB (New Development Bank) का मुख्यालय स्थापित किया गया और केवी कामथ इसके पहले अध्यक्ष बने। मई 2020 में ब्राज़ील के मार्कोस ट्रॉयजो इसके दूसरे अध्यक्ष बने। मौजूदा वक्त में मार्कोस ट्रॉयजो एनडीबी के अध्यक्ष है। न्यू डेवलपमेंट बैंक में तीन नए सदस्य देश शामिल किए गए हैं। इन देशों में संयुक्त अरब अमीरात, उरुग्वे और बांग्लादेश को सदस्य देशों के रूप में स्वीकार किया है।

इतनी पूंजी के साथ हुई थी शुरुआत

एनडीबी की शुरुआत 50 अरब डॉलर से हुई थी, जो बाद में बढ़कर 100 अरब डॉलर हो गई। न्यू डेवलपमेंट बैंक (New Development Bank) में हर ब्रिक्स देश का 10 अरब डॉलर का योगदान है। ब्रिक्स देशों की आबादी दुनिया की कुल जनसंख्या का 41.4% है। इस बैंक से भारत को भी फायदा होगा। एनडीबी की वजह से भारत की IMF और वर्ल्ड बैंक पर निर्भरता कम होगी। बैंक का मकसद बंदरगाह, सड़क और दूरसंचार नेटवर्क को मजबूत करने के साथ इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना है।

दूसरे बैंको से है अलग

न्यू डेवलपमेंट बैंक (New Development Bank) आम बैंको से काफी अलग है। ऐसे बैंको ंकी स्थापना ‘विकास कार्यों’ को बढ़ावा देने के लिए की जाती है। जैसा कि नाम से भी ज़ाहिर है, डेवलपमेंट बैंक, ख़ासतौर पर कृषि और औद्योगिक विकास से संबंधित कंपनियों और परियोजनाओं के लिए यह पैसा उपलब्ध कराते हैं। यानी कम्पनियों और संस्थानों के लिए ये बने होते हैं।

एनडीबी (New Development Bank) जैसे बैंकों को बनाने का मुख्य उद्देश्य विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को आसान शर्तों पर लोन मुहैया कराना है। ब्रिक्स देशों को इस बैंक के बनने का फायदा यह है कि इससे इन देशों के फाइनेंशियल सिस्टम पर पश्चिमी मुल्कों का एकाधिकार कम होगा।

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