बैंक केवाईसी कराने में कहीं आपने तो नहीं की गलती, आरबीआई ने साझा की अहम जानकारी

बैंक केवाईसी कराने में कहीं आपने तो नहीं की गलती, आरबीआई ने साझा की अहम जानकारी
बैंक केवाईसी कराने में कहीं आपने तो नहीं की गलती, आरबीआई ने साझा की अहम जानकारी

नई दिल्ली। किसी भी वित्तीय लेनदेन के लिए बैंकों ने अपने कस्टमर्स के लिए केवाईसी अनिवार्य कर दिया है। आरबीआई की तरफ से केवाईसी (Bank KYC) को लेकर कुछ अहम जानकारी साझा की गई है। दरअसल, बैकों या वित्तीय संस्थानों द्वारा अपने ग्राहकों से केवाईसी के लिए कुछ दस्तावेज मांगे जाते हैं। इनके आधार पर चार प्रकार के केवाईसी -फुल केवाईसी, हाफ केवाईसी/ई-केवाईसी और वीडियो केवाईसी - किए जाते हैं।

क्या है फुल केवाईसी

सबसे पहले बात करें तो फुल केवाईसी (Bank KYC) को सबसे कारगर माना जाता है और बैंक आंखे बंद कर ग्राहक पर भरोसा करते हैं। इसी तरह हाफ केवाईसी में केवाईसी आधा-अधूरा होता है। इसी वजह से सुविधाएं भी उसी हिसाब से दी जाती हैं।

फुल KYC में एड्रेस प्रूफ और ग्राहक की पहचान के लिए फिजिकल वेरीफिकेशन किया जाता है। रिजर्व बैंक की तरफ से इसके लिए निर्देश मिलता है। फुल केवाईसी कराने के लिए आप आधार या बिना आधार के भी काम करा सकते हैं। अगर आधार से केवाईसी (Bank KYC) करा रहे हैं तो बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन कराना इसमें जरूरी होता है। अगर बिना आधार केवाईसी हो रहा है तो आपको बैंक की ब्रांच में हाथों-हाथ सभी दस्तावेज जमा कराने होंगे।

क्या है हाफ केवाईसी

हाफ केवाईसी की बात करें तो इसे आप लिमिटेड केवाईसी भी कह सकते हैं। इसमें डिटेल या दस्तावेज कम से कम दिए जाते हैं और वह भी ऑनलाइन, इसलिएइसे ई-केवाईसी (Bank KYC) भी कहते है। इसमें आपको अपनी मर्जी से पहचान के कुछ दस्तावेज ऑनलाइन शेयर कर सकते हैं। इस काम में आप आधार नंबर या पैन कार्ड नंबर से काम चल जाता है। वैध दस्तावेजों का वेरिफिकेशन ओटीपी से किया जाता है। हाफ केवाईसी के कुछ फायदे हैं तो कुछ नुकसान भी।

हाफ केवाईसी के फायदे और नुकसान

अगर आपको झटपट बैंक खाता खोलना है तो हाफ केवाईसी (Bank KYC) नए ग्राहकों के लिए वरदान है। ग्राहक e-KYC या हाफ केवाईसी से काम चला सकते हैं। ऑनलाइन बिल पेमेंट करने या ऑनलाइन खरीदारी के लिए भी हाफ केवाईसी से काम चल जाता है। हालांकि, हाफ केवाईसी से जो अकाउंट खुलता है, उसकी मदद से आप वर्चुअल कार्ड पा सकते हैं और इससे ऑनलाइन खरीदारी कर सकते हैं।

हाफ केवाईसी का दायरा सीमित है। इसकी वजह से ग्राहक को कुछ नुकसान भी उठाने पड़ सकते हैं। दरअसल, ई-केवाईसी (Bank KYC) या हाफ केवाईसी पर खुले बैंक खाते में 1,00,000 रुपये से ज्यादा नहीं रख सकते। इसके साथ ही, एक वित्तीय वर्ष में हाफ केवाईसी वाले खाते में 2,00,000 रुपये से ज्यादा नहीं जोड़ सकते।

इसके अलावा हाफ केवाईसी से कोई बैंक खाता एक साल ही चला सकते हैं। उसके बाद आपको हर हाल में फुल केवाईसी कराना होगा। हाफ केवाईसी (Bank KYC) से आप चेक या कैश के जरिये फंडिंग नहीं कर सकते। हाफ केवाईसी में बैंकों की तरफ से ग्राहक को चेकबुक भी जारी नहीं की जाती है।

क्या है वीडियो केवाईसी

जनवरी 2020 में रिजर्व बैंक ने वीडियो केवाईसी (Bank KYC) कर खाता खोलने की इजाजत दी थी। वीडियो केवाईसी को फुल केवाईसी के दर्जे में रखा गया है। कोरोना काल में जब ग्राहक ब्रांच में नहीं जा सकते थे, तो उस वक्त वीडियो केवाईसी से खाता खोला जाना शुरू हुआ था।

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