Know Everything about Will: क्यों और कैसे बनाई जाती है वसीयत? यहां जानें सब कुछ

Know Everything about Will: क्यों और कैसे बनाई जाती है वसीयत? यहां जानें सब कुछ
Know Everything about Will: क्यों और कैसे बनाई जाती है वसीयत? यहां जानें सब कुछ

नई दिल्ली: Know Everything about Will: इंसान जीवन भर मेहनत कर अपने बच्चों और परिवार के लिए विरासत (How to Make a Will) छोड़ता आया है, ताकि घर के मुखिया या कमाऊ व्यक्ति की मृत्यु के बाद परिवार के किसी भी व्यक्ति को आर्थिक चुनौतियों का सामना न करना पड़े। लेकिन विरासत में मिली संपत्ति को लेकर अक्सर पारिवारिक विवाद देखने को मिलते हैं। यह विवाद सिर्फ सामान्य परिवारों में ही नहीं बल्कि कई हाइप्रोफ़ाइल परिवारों में भी होता आया है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए कई लोग दूरदर्शिता दर्शाते हुए अपने जीते-जी वसीयत यानि विल (Vasiyat Kaise Banaein) बनाते हैं, ताकि भविष्य में उनके बच्चे या परिवार के लोग संपत्ति को लेकर आपस में न लड़ें।

वसीयत भारत में एक ऐसा आम शब्द है जिसका इस्तेमाल संपति के संबंध में किया जाता है। अंग्रेजी में वसीयत को विल (Will) कहा जाता है। यह एक ऐसा वैधानिक दस्तावेज है, जो किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके संपत्ति का उत्तराधिकार तय करता है।

भारतीय संविधान में वसीयत संबंधी प्रावधानों के तहत चल एवं अचल दोनों संपत्ति की वसीयत की जा सकती है। अचल संपत्ति में भूमि मकान मुख्य होता है, जबकि चल संपत्ति में, नकद, कोई वाहन, पशु इत्यादि होते हैं।

वसीयत क्या है? (What is Will)

'वसीयत' एक कानूनी दस्तावेज है जो 21 वर्ष से अधिक उम्र के किसी भी व्यक्ति द्वारा बनाया जा सकता है। इसमें यह उल्लेख किया जाता है कि मृत्यु के बाद आपकी संपत्ति किन लोगों के बीच और किस तरह से विभाजित की जाए। इसके अलावा आप यह भी लिख सकते हैं कि आप किस तरह का अंतिम संस्कार चाहते हैं (विशेष पारिवारिक परंपरा) और यदि आपके बच्चे छोटे हैं तो उनकी परवरिश किसके द्वारा और कैसे की जानी चाहिए।

क्यों पड़ती है वसीयत की जरूरत और क्या हैं इसके फायदे? (Benefits of Will)

यदि कोई व्यक्ति अपनी वसीयत बनाने से पहले ही मर जाता है तो ऐसी स्थिति में सरकार या प्रशासन हिंदू उत्तराधिकार कानून के तहत आपके लिए एक वसीयत बनाती है। ठीक इसी तरह मुसलमानों और ईसाइयों के लिए उत्तराधिकार कानून अलग-अलग है। ऐसे में राज्य सरकार या प्रशासन तय करता है कि आपकी संपत्ति का क्या होगा।

सरकार द्वारा उत्तराधिकारी तय करने पर यह जरूरी नहीं कि मृतक या उसके परिवार के हित में ही फैसला हो। 'नाबालिग बच्चों की देखभाल या परिवार के सदस्यों की जगह किसी गरीब दोस्त या रिसतेदार को संपत्ति का हकदार बनाया जाए' इस तरह के फैसले भी सरकार आपकी इच्छा के विरुद्ध कर सकती है।

जाहिर सी बात है कि किसी भी व्यक्ति की मृत्यु उनके परिवार वालों के लिए कठिन समय होता है। या ये समझ लो कि दुखों का पहाड़ टूट पड़ता है। ऐसे में आपकी वसीयत उनके दुख को कुछ हद तक कम कर सकती है। वसीयत की सबसे खास बात यह है कि आप जीते-जी कभी भी अपनी वसीयत में बदलाव करवा सकते हैं। उदाहरण: मान लीजिए कि आपने अपनी वसीयत बनवा रखी है, लेकिन आपके परिवार में किसी बच्चे का जन्म हो जाता है तो आप कभी भी उसका नाम जोड़ सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे वसीयत में बदलाव जीवित रहते ही किया जा सकता है। मृत्यु के बाद कोई भी वसीयत में छेड़छाड़ नहीं कर सकता।

क्या आपको वसीयत की जरूरत है?

वसीयत की जरूरत किसी भी आम आदमी को पड़ सकती है। मसलन, उसके परिवार में बच्चे हों और वसीयत बनाने वाला व्यक्ति अपनी संपत्ति को अपने हिसाब से बच्चों में बराबर बांटना चाहता हो ताकि भविष्य में उन्हें प्रॉपर्टी के लिए किसी भी तरह के विवाद का सामना ना करना पड़े।

हालांकि, वसीयत बनाना हर किसी के लिए जरूरी नहीं है। आपको वसीयत की आवश्यकता नहीं है यदि:

  • आपके पास धन-संपत्ति नहीं है

  • बच्चे या संपत्ति संभालने वाला परिवार में कोई न हो

  • विरासत जुड़े नियम-कानूनों की अच्छी जानकारी है और आप उनसे सहमत हैं

कैसे लिखी जाती है वसीयत (How to Write A Will)

वसीयत को किसी भी कोरे कागज पर अपने ही हाथ से लिखा (How to Make a Will) जा सकता है। इसे स्टैंप पेपर पर या किसी आधिकारिक पत्र पर बनाना कानूनी रूप से जरूरी नहीं है। हाथ से लिखी गई वसीयत को बाद में रिश्तेदारों (जो संपत्ति या वसीयत में किसी भी तरह से दावा करने के हकदार न हों) से सत्यापित किया जा सकता है। वसीयत लिखते समय यह जरूरी नहीं कि कानूनी भाषा का इस्तेमाल हो। आप अपनी सहूलियत के हिसाब से सरल भाषा का उपयोग कर सकते हैं। और यह तब तक मान्य है जब तक इसका उल्लेख है:

1. आपका पैसा, संपत्ति कैसे विभाजित की जानी चाहिए? इसके लिए आपकी संपत्ति और ऋणों (लोन या कर्ज) की एक सूची बनाना आपके लिए मददगार साबित होता है। संपत्ति के उदाहरण हैं: घर, बचत (बैंक खाते में या कहीं और), वाहन, आभूषण और फर्नीचर। इसी तरह, ऋण में लोन, कर्ज आदि शामिल हो सकते हैं।

2. जिन्हें अधिकार देना है (एक से अधिक व्यक्ति हो सकते हैं) उसके नाम वाली वसीयत पर आपके और दो अन्य गवाहों के हस्ताक्षर होने चाहिए। ध्यान रहे गवाह वसीयत में हकदार नहीं हो। इसके बाद वसीयत की एक कॉपी संभालकर रखनी चाहिए और कुछ भरोसेमंद लोगों को इसे कहां रखा गया है उसकी जानकारी होनी चाहिए। दरअसल, कई बार मृत्यु के बाद कई लोगों की वसीयत ढूंढने पर भी नहीं मिलती। ऐसे में अच्छा है कि किसी ना किसी भरोसेमंद व्यक्ति (बच्चे, पत्नी माता-पिता या अन्य) को इसके बारे में बताना चाहिए।

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