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मेजर खतिंग को अरुणाचल का सबसे बड़े नागरिक सम्मान “अरुणाचल रत्न”

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इटानगर, 14 फरवरी (हि.स.)। तवांग में आज का दिन इतिहास में उस समय दर्ज हो गया जब मेजर रालेंग्नाओ ’बॉब' खतिंग को अरुणाचल प्रदेश सरकार ने उन्हें “अरुणाचल रत्न” से सम्मानित करने की घोषणा की। अरुणाचल रत्न राज्य का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है। ज्ञात हो कि तवांग में मेजर खतिंग की याद में रविवार को एक स्मारक का शिलान्यास किया गया। स्मारक का शिलान्यास एक समारोह पूर्वक कार्यक्रम में किया गया। 1951 में तवांग मार्ग पर भारतीय प्रशासनिक नियंत्रण स्थापित करने वाले मेजर खतिंग के योगदान को आने वाली पीढ़ी को बताने के लिए तवांग में अरुणाचल प्रदेश सरकार द्वारा स्मारक स्थापित किया जा रहा है। इसके लिए तवांग के लोगों द्वारा जमीन दान में दी गयी है। फरवरी 1951 से पहले, शिमला सम्मेलन के समझौते के माध्यम से 1914 से भारत का हिस्सा होने के बावजूद तवांग को ल्हासा द्वारा प्रशासित किया जाता था। लेकिन मेजर के नेतृत्व में 1951 में तवांग पर भारतीय प्रशासनिक नियंत्रण स्थापित किया गया। रविवार को स्मारक के शिलान्यास अवसर पर राज्यपाल बीडी मिश्रा मुख्यमंत्री पेमा खांडू, मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा, केंद्रीय खेल और युवा मामलों के राज्य मंत्री किरण रिजिजू, रक्षा स्टाफ जनरल (आईसीडीएस) बिपिन रावत, सेना के अन्य शीर्ष अधिकारी, तवांग के विधायक तेरसिंग ताशी और मेजर खतिंग के परिवार के सदस्य उपस्थित थे। ज्ञात हो कि मेजर खतिंग के लिए लोगों के प्यार को मजबूत बनाते हुए राज्य सरकार ने उन्हें मरणोपरांत राज्य के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार, अरुणाचल रत्न से सम्मानित करने की घोषणा की। खांडू ने कहा, "अरुणाचल प्रदेश के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है। क्योंकि, हमें आखिरकार राज्य और देश के लिए किए गए योगदान की खातिर मेजर खतिंग को सम्मानित करने का अवसर मिला है।" उन्होंने कहा कि स्मारक जिला में पर्यटन को बढ़ावा देने में मदद करेगा और यह संस्था के माध्यम से लोगों को भारत के महत्वपूर्ण नायकों में से एक के बारे में जानकारी प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय लोगों ने उस स्थान पर स्मारक के लिए भूमि का एक भूखंड दान में दिया है जहां पर जहां पूर्ववर्ती प्रशासनिक शिविर स्थित था। जिसको अपने हाथों में लेने के लिए विपरित मौसम और कठिन भौगोलिक चुनौतियों का सामना करते हुए मेजर खतिंग और उनकी टीम ने असम के चारिदुआर से 17 फरवरी, 1951 को पैदल चलकर 20 दिन की एक कठिन यात्रा की। वे 6 फरवरी, 1951 को तवांग पहुंचे और स्थानीय नेताओं से सार्वजनिक तौर पर बातचीत की। उन्होंने 09 फरवरी को तवांग में भारतीय प्रशासन की स्थापना की। इस मौके पर मेजर खातिंग के सबसे बड़े बेटे जॉन एसआर खतिंग ने अपने पिता को सम्मानित करने के लिए मुख्यमंत्री खांडू और अरुणाचल सरकार को धन्यवाद दिया। जॉन ने कहा कि यह मेजर खतिंग थे, जिन्होंने 1962 के दौरान भारत-चीन युद्ध के दौरान सरकार से अनुरोध किया था कि उन्हें सिक्किम से तवांग वापस भेज दें जबकि, हर कोई इससे बच रहा था। "मेरे पिता का तवांग के लिए एक विशेष लगाव और प्रेम था। वे हमेशा बना रहेगा। तवांग के साथ हमारे परिवार के संबंध फीके नहीं पड़ेंगे। वास्तव में यह बंधन आज और मजबूत हुआ है। हिन्दुस्थान समाचार /तागू/ अरविंद-hindusthansamachar.in