​एलएसी विवाद पर बैठक की सेना ने, लेकिन बयान जारी किया विदेश मंत्रालय ने
​एलएसी विवाद पर बैठक की सेना ने, लेकिन बयान जारी किया विदेश मंत्रालय ने
news

​एलएसी विवाद पर बैठक की सेना ने, लेकिन बयान जारी किया विदेश मंत्रालय ने

news

नई दिल्ली, 07 जून (हि.स.)। पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव खत्म करने को लेकर शुरू से ही भारतीय सेना ने चीन के साथ विभिन्न सैन्य स्तरों पर बैठक करके विवाद सुलझाने के प्रयास किए। वार्ताओं के कई दौर नाकाम होने के बाद शनिवार को पूर्वी लद्दाख में भारतीय सेना और चीनी सेना (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी- पीएलए) के कमांडर स्तर पर वार्ता तय की गई थी। इसीलिए इस बैठक में भारतीय सेना का नेतृत्व लेह-स्थित 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने किया, जबकि चीनी सेना का नेतृत्व दक्षिण शिनजियांग सैन्य क्षेत्र के कमांडर मेजर जनरल लियू लिन ने किया। यानी कि भारतीय सेना ने लगातार चीन के साथ बैठक करके इस विवाद को सुलझाने का प्रयास किया। इसी क्रम में शनिवार को भी भारतीय सेना और पीएलए के कमांडर स्तर पर वार्ता हुई लेकिन आधिकारिक बयान रविवार को सेना के बजाय विदेश मंत्रालय ने जारी किया है। जानकार कहते हैं कि इस बारे में भारतीय सेना या रक्षा मंत्रालय को एक बयान जारी करना चाहिए था जो विदेश मंत्रालय द्वारा विधिवत अनुमोदित किया गया होता। यह भी दिलचस्प है कि विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में इस वार्ता में शामिल हुए भारतीय और चीनी कमांडर का नाम या पदनाम तक नहीं दिया है। जानकार यह भी बताते हैं कि चली आ रही एक परंपरा के मुताबिक पाकिस्तान के बारे में भारतीय सेना बयान जारी कर सकती है लेकिन चीन के साथ विवाद पर विदेश मंत्रालय को आधिकारिक बयान जारी करने के आदेश मिलते हैं। पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सीमा विवाद सुलझाने के लिए चुशुल-मोलदो क्षेत्र में हुई बैठक में सेना के लेह स्थित 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई की। उन्होंने शनिवार शाम को ही लेह लौटने पर सेना के मुख्यालय को भारत-चीन वार्ता से संबंधित एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट के बारे में सैन्य मुख्यालय के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन ने विदेश मंत्रालय और अन्य संबंधित सरकारी विभागों को बता दिया है। इससे जुड़ा एक आधिकारिक बयान शनिवार को ही आना था लेकिन रविवार सुबह विदेश मंत्रालय से बयान जारी करके सिर्फ इतना बताया गया कि 'दोनों पक्ष विभिन्न द्विपक्षीय समझौतों के अनुसार सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिति को शांतिपूर्वक हल करने के लिए सहमत हुए हैं।' सौहार्द्रपूर्ण माहौल के साथ समाप्त हुई बैठक में लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने अपने चीनी समकक्ष से स्पष्ट रूप से कहा कि भारत सीमा पर निर्माणों को नहीं रोकेगा। साथ ही चीन उन सैनिकों को हटाकर अप्रैल, 2020 की यथास्थिति बहाल करे, जिन्होंने पैंगोंग त्सो के उत्तरी किनारे पर और साथ ही गलवान घाटी और गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में 'फिंगर-4 से फिंगर 8' क्षेत्र पर भौतिक रूप से कब्जा कर लिया है। वार्ता के दौरान चीनी सेना पीएलए ने भी भारत की फीडर सड़कों और पुलों के निर्माण का कड़ा विरोध किया, जिसे वह पैंगोंग त्सो और गलवान घाटी जैसे 'विवादित क्षेत्र' कहता है। इस पर भारतीय पक्ष ने कहा कि चीनी घुसपैठ को खाली किया जाए और भारत सीमावर्ती बुनियादी ढांचे के विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं। इससे पहले भी सीमा पर तनाव दूर करने के लिए प्रोटोकॉल के मुताबिक भारतीय सेना के स्थानीय कमांडर स्तर पर बातचीत कर मामला सुलझाने के लिए दो दौर की वार्ता हुई है। उस वार्ता के दौरान लिये गए फैसलों को चीनी सेना ने जमीनी स्तर पर लागू नहीं किया, जिससे तनाव में कमी नहीं आई। इसलिए इसके बाद दोनों सेनाओं के ब्रिगेडियर स्तर के अधिकारियों के बीच मीटिंग हुई। वार्ता के दौरान हालांकि कुछ छोटे मसलों पर सहमति भी बनी जिसके बाद चीन और भारत ने भी अपने कुछ भारी वाहनों को पीछे किया। इसके बावजूद तनाव खत्म करने के लिए दोनों देश किसी सहमति पर नहीं पहुंच पाए। ब्रिगेडियर स्तर पर मामला न सुलझने पर 2 जून को डिवीजनल कमांडर स्तर की बैठक हुई जिसमें दोनों तरफ के मेजर जनरल स्तर के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। यह बैठक भी बेनतीजा रही। इसलिए 6 जून को पूर्वी लद्दाख में भारतीय सेना और पीएलए के कमांडर स्तर पर फिर वार्ता तय की गई थी। इसलिए इस बैठक में भारतीय सेना का नेतृत्व लेह-स्थित 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने किया, जबकि चीनी सेना का नेतृत्व दक्षिण शिनजियांग सैन्य क्षेत्र के कमांडर मेजर जनरल लियू लिन ने किया। हिन्दुस्थान समाचार/सुनीत-hindusthansamachar.in