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CSR की प्रकृति को समझिये, कंपनियां सब हड़पना नहीं देश को बहुत कुछ देना चाहती हैं

CSR की प्रकृति को समझिये, कंपनियां सब हड़पना नहीं देश को बहुत कुछ देना चाहती हैं

गांधी जी ने वर्धा में शिक्षा मंत्रियों के सम्मेलन में कहा था- हर हाथ को काम और हर हाथ को शिक्षा। इस सपने को पूरा करने में न केवल सरकारी योजनाएं लगी हुई हैं बल्कि सरकार के साथ-साथ सीएसआर के प्रयास भी लगे हुए हैं। इसे दूसरे शब्दों में ऐसे समझ सकते हैं कि यदि देश में रोजगार स्वास्थ्य शिक्षा आदि ... क्लिक »

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