सरपंच द्वारा मवेशी तस्करी कर भेजे जा रहे बूचड़खाने
सरपंच द्वारा मवेशी तस्करी कर भेजे जा रहे बूचड़खाने
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सरपंच द्वारा मवेशी तस्करी कर भेजे जा रहे बूचड़खाने

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रायगढ़ 23 जुलाई (हि.स.)। एक तरफ जहां छत्तीसगढ़ सरकार विगत हरियाली अमावस्या के दिन गोधन न्याय योजना का शुभारंभ किया, वहीं धरमजयगढ़ जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाला ग्राम पंचायत खर्रा का सरपंच विकास कार्य छोड़ अपनी जेब भरने के लिए गाय बैल को कत्लखाना भेजने का काम कर रहा है। आसपास के गांव के मवेशियों को इकट्ठा कर सरपंच अब गाय के दूध पीते बछड़ों तक को कत्लखाने तक पहुंचाने की जवाबदारी लेने लगे हैं और अपनी दबंगई दिखाते हुये बकायदा गांव के मुहाने पर जमा करके सबके सामने इस अवैध धंधे का कारोबार कर रहे है। जानकारी के मुताबिक सरपंच ने गांव में लगभग 50-60 मवेशियों को एक घेरा बनाकर रखा है और कत्लखाना ले जाने वाले मवेशी तस्कर को बुलाकर बेचने का धंधा कर रहे हैं। वहीं गांव में कांजीहाउस तथा गौठान नहीं होने जैसे बेबुनियाद बातों के सहारे जहां गांव के ग्रामीणों को बेवकूफ बनाकर गौतस्करों के हवाले इन मवेशियों को सौंपने की तैयारी चल रही हैं। वही गांव में रोका छेका अभियान के तहत कृषकों से इन मवेशियों को गौठान भेजने के नाम पर यह कारोबार करने की बात सामने आ रही है। गौतस्कर का धंधा करने वाले एक मजदूर ने बताया कि सरपंच इन सभी गाय बैल को मेरे मालिक को बेच रहे हैं। गांव में इन दिनों खेत खलिहानों में फसल नुकसान की बात को लेकर खर्रा सरपंच आस पड़ोस के गाय, बैल और दूध पीते बछड़ों को अपने पंचायत खर्रा में इकट्ठा किया और सरकार की रोका छेकां अभियान के नाम पर सारे मवेशियों को बूचड़खाने ले जाने गौतस्करों से सौदा भी सरपंच द्वारा कर लिया गया। वहीं जानकारी मिलने पर कामधेनु सेना के प्रदेश महासचिव नारायण बाईन ने बताया कि जब हमने इस पूरे मामले की जानकारी ली तो खर्रा सरपंच द्वारा मवेशियों के बिक्री करते हुए खूब दादागिरी करते रहे और बोलता रहा जिसको जो करना है करों मैं इस गांव का मुखिया हूं मेरे पास पावर है, मैं चाहे गाय बैल को कत्लखाना भेजूं या और कुछ करूँ मेरी मर्जी है। जिससे साफ हो गया कि मवेशी तस्कर और सरपंच की सांठगांठ से इस अवैध कार्य को किया जा रहा है। हिन्दुस्थान समाचार / रघुवीर प्रधान-hindusthansamachar.in