सप्ताहभर के लॉकडाउन से देशी राखियों के बाजार को लगा तगड़ा झटका
सप्ताहभर के लॉकडाउन से देशी राखियों के बाजार को लगा तगड़ा झटका
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सप्ताहभर के लॉकडाउन से देशी राखियों के बाजार को लगा तगड़ा झटका

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कोरबा 23 जुलाई (हि.स.)। कोरबा जिले में हफ्तेभर के लाकडॉउन से जिले के देशी राखियों के बाजार को तगड़ा झटका लगा है। बाज़ारों में सजी राखियों की बिक्री पर लाकडॉउन ने ग्रहण लगा दिया है। चाइनीज माल को बायकॉट करते हुए इस बार राखियों का बाजार पूरी तरह से देसी राखियों से सज चुका था। कोरबा जिले के जनपद पंचायत कटघोरा के जननी महिला संकुल संगठन धंवईपुर की महिलाएं चाइनीज राखियों को कड़ी टक्कर देने के लिए छत्तीसगढ़ी थीम पर राखियां बनाई गई थी। त्योहार के ठीक पहले बाज़ारों से राखी की रौनक गायब होने से थोक व्यापारियों के साथ -साथ चिल्हर विक्रेताओं को भी भारी नुकसान हो रहा है। बहनों का प्रेम बनकर इस रक्षाबंधन पर चावल, गेहूं, दाल, धान, पैरा, बांस, कौड़ी, रूद्राक्ष जैसे परंपरागत चीजों से बनी आकर्षक राखियां भाईयों की कलाईयों पर सजने वाली थी । समूह की 20-25 महिलाएं मिलकर पैरा, दाल, चावल दाने, कौंड़ी और गेहूं दाने से विभिन्न प्रकार की और नये-नये कलात्मक डिजाइन में राखियां बनाई हैं। भाई-बहन के प्रेम का त्यौहार रक्षा बंधन में स्वदेशी और पूर्ण रूप से छत्तीसगढ़ी स्वरूप देने के लिए लगभग दस हजार राखियां समूह की महिलाएं तैयार की गई हैं। महिलाएं यू-ट्यूब से देखकर और खुद इनोवेशन के नये तरीके सीखकर कलात्मक डिजाइन की संरचना की हें। समूह की महिलाओं का राखी बनाने के लिए धन की आपूर्ति क्लस्टर द्वारा प्रदान की जा रही हें। लेकिन इस बार ऐसा लगटा है कि समूह कि महिलाओं कि म्हणत पर पानी फिर जाएगा। इस बार एक हफ्ते के लॉक डाउन ने सभी के सपनों पर पानी फिर गया है । हिन्दुस्थान समाचार / हरीश तिवारी-hindusthansamachar.in